सनातन सेवा समिति के तत्वावधान एवं महामंडलेश्वर स्वामी हंसराम उदासीन के सानिध्य में हरी शेवा उदासीन आश्रम सनातन मंदिर में अधिकमास के अवसर पर आयोजित नौ दिवसीय श्रीराम कथा के सातवें दिवस पर भक्ति और अध्यात्म का अनूठा संगम देखने को मिला। पुरुषोत्तम माह महोत्सव के अंतर्गत चल रहे सेवा-सुमिरन प्रकल्प में हरिद्वार से पधारे महामंडलेश्वर स्वामी जगदीश दास उदासीन ने व्यासपीठ से भगवान श्रीराम के विवाह उपरांत अयोध्या आगमन और वहां छाए हर्षोल्लास के प्रसंग का अत्यंत भावपूर्ण और जीवंत वर्णन किया।

कथा की मर्यादा को रेखांकित करते हुए स्वामी जगदीश दास उदासीन ने कहा कि जब भगवान श्रीराम, माता सीता सहित चारों भाई अपनी-अपनी अर्धांगिनियों के साथ अयोध्या पहुंचे, तो संपूर्ण अयोध्या नगरी दीपों, मंगल गीतों और उत्सवों से गुंजायमान हो उठी। नगरवासियों ने प्रभु के स्वागत में घर-घर वंदनवार सजाए तथा माताओं ने भावविभोर होकर आरती उतारकर नववधुओं का आत्मीय स्वागत किया। उन्होंने बल देकर कहा कि भगवान श्रीराम का संपूर्ण जीवन आदर्श, मर्यादा, त्याग और परिवार के प्रति पूर्ण समर्पण का शाश्वत संदेश देता है। विवाह के बाद अयोध्या में चारों भाइयों एवं उनकी पत्नियों के मधुर व्यवहार, माताओं के अगाध स्नेह तथा राजमहल के आनंदमय वातावरण का प्रामाणिक वृत्तांत प्रस्तुत करते हुए उन्होंने कहा कि जहां प्रेम, संस्कार और धर्म का वास होता है, वहीं सच्चा सुख और वास्तविक समृद्धि निवास करती है।

मानव जीवन के गूढ़ रहस्यों को उजागर करते हुए स्वामी जी ने दृढ़तापूर्वक कहा कि मनुष्य की इच्छा बहुत कुछ होती है, किंतु परमात्मा की इच्छा के आगे किसी की भी नहीं चलती। उन्होंने कथा के मर्मस्पर्शी प्रसंग को सुनाते हुए बताया कि जब राजा दशरथ ने अपने कानों के पास सफेद बाल देखे, तो उनके भीतर वैराग्य का भाव जाग्रत हुआ और उन्होंने तत्काल गुरु वशिष्ठ से आज्ञा लेकर भगवान श्रीराम को अयोध्या का राजा बनाने की घोषणा कर दी। इस समाचार से संपूर्ण अयोध्या आनंदित हो उठी थी, किंतु नियति और ईश्वर की इच्छा कुछ और ही थी। माता कैकेयी ने पूर्व में मिले दो वरदान मांगते हुए भगवान श्रीराम के लिए चौदह वर्ष का कठोर वनवास तथा भरत के राज्याभिषेक की मांग रख दी। इस ऐतिहासिक प्रसंग के माध्यम से स्वामी जी ने समाज को संदेश दिया कि प्रभु की अलौकिक लीला और इच्छा के आगे संसार की सभी मानवीय योजनाएं छोटी पड़ जाती हैं, इसलिए मनुष्य को जीवन की हर विषम परिस्थिति में भी धैर्य, मर्यादा और धर्म का पालन करना चाहिए।

कथा के दौरान स्वामी जी ने सुमधुर भजनों एवं चौपाइयों के माध्यम से संपूर्ण वातावरण को पूरी तरह भक्तिमय बना दिया। पंडाल में गूंजे “अवध में आनंद भयो, जय सियाराम” जैसे भजनों पर श्रद्धालु भावविभोर होकर झूम उठे और पूरा परिसर जय श्रीराम के गगनभेदी उद्घोष से गुंजायमान हो गया। इस धार्मिक आयोजन के समापन पर महाआरती की गई तथा उपस्थित श्रद्धालुओं में प्रसाद का वितरण किया गया।

इसी क्रम में, शनिवार को आयोजित विशेष विष्णु यज्ञ एवं रुद्राभिषेक अनुष्ठान में वर्षा सखरानी एवं गायत्री टेलर ने अपने परिवार सहित पूर्ण विधि-विधान से आहुतियां दीं और महादेव का दिव्य अभिषेक संपन्न किया। उल्लेखनीय है कि इस पुरुषोत्तम माह महोत्सव के अंतर्गत आश्रम में प्रतिदिन विष्णु यज्ञ, रुद्राभिषेक, संकीर्तन, काशी की तर्ज पर भव्य गंगा आरती एवं हरिनाम कीर्तन सहित विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान अगाध श्रद्धा और उत्साह के साथ संपन्न हो रहे हैं। आश्रम के पूज्य संत मायाराम और संत गोविन्दराम ने सनातन धर्म के समस्त श्रद्धालुओं से पुरुषोत्तम मास के इस पावन अवसर पर भीलवाड़ा में निरंतर बह रही धर्मगंगा की इस त्रिवेणी का अधिक से अधिक लाभ उठाने और धर्मलाभ प्राप्त करने का पुरजोर आग्रह किया है।

Rajesh Toshniwal, Bhilwara

Rajesh Toshniwal, Bhilwara

नाम: राजेश तोषनीवाल

वर्तमान पद: ब्यूरो चीफ (भीलवाड़ा)

कार्यक्षेत्र: भीलवाड़ा (राजस्थान)

बीट (मुख्य विषय): राजनीति, क्राइम, प्रशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य और बिज़नेस

परिचय 

राजेश तोषनीवाल राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के वरिष्ठ पत्रकार और ब्यूरो चीफ हैं। वह राजनीति, अपराध (क्राइम), स्थानीय प्रशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक गतिविधियों (बिज़नेस) सहित सभी मुख्य विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग करते हैं। मौके पर पहुंचकर सक्रियता से ग्राउंड रिपोर्टिंग करना उनकी मुख्य विशेषता है।

पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)

राजेश तोषनीवाल को पत्रकारिता के क्षेत्र में कुल 44 वर्षों का व्यापक अनुभव है।

  • वह पिछले 35 वर्षों से अधिक समय से 'प्रातःकाल' समाचार पत्र से निरंतर जुड़े हुए हैं।
  • इससे पूर्व उन्होंने 'दैनिक जागरण', 'नवभारत टाइम्स' सहित कई अन्य लोकल एवं राज्यस्तरीय मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं।

शैक्षणिक योग्यता (Education)

  • स्नातक (Graduate)
  • डिप्लोमा इन जर्नलिज्म (Diploma in Journalism)

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