भीलवाड़ा के हरि शेवा आश्रम में मना श्रीकृष्ण जन्मोत्सव
पुरुषोत्तम मास महोत्सव के चौथे दिन स्वामी अशोकानंद महाराज ने भागवत कथा के दौरान कृष्ण जन्म प्रसंग सुनाया, जिसमें भारी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।

भीलवाड़ा के हरि शेवा उदासीन आश्रम में आयोजित पुरुषोत्तम मास महोत्सव के चौथे दिन मंच पर बैठकर श्रीमद्भागवत कथा सुनाते हुए कथाव्यास पूज्य स्वामी अशोकानंद जी महाराज।
सनातन सेवा समिति, हरि शेवा उदासीन आश्रम सनातन मंदिर एवं महामंडलेश्वर स्वामी हंसराम जी उदासीन महाराज के पावन सानिध्य में आयोजित पुरुषोत्तम मास महोत्सव के चतुर्थ दिवस पर भीलवाड़ा नगरी पूर्णतः भक्ति के रंग में सराबोर हो उठी। आश्रम परिसर में आयोजित संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा के दौरान जबलपुर से पधारे प्रख्यात कथाव्यास पूज्य स्वामी अशोकानंद जी महाराज ने जब भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य एवं आनंदमय जन्मोत्सव के प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया, तो संपूर्ण वातावरण "नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की" के गगनभेदी जयघोषों से गुंजायमान हो उठा। इस अलौकिक और ऐतिहासिक क्षण में उपस्थित श्रद्धालुओं का उत्साह चरम पर पहुंच गया और वे भक्तिमय भजनों पर भावविभोर होकर नृत्य करने लगे।
कथाव्यास स्वामी अशोकानंद जी महाराज ने श्रीमद्भागवत महापुराण के गूढ़ रहस्यों को उजागर करते हुए प्रसिद्ध श्लोक “यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत, अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्” की अत्यंत मार्मिक व्याख्या की। उन्होंने कहा कि सनातन काल से यह अकाट्य सत्य रहा है कि जब-जब इस पृथ्वी पर धर्म की हानि होती है और अधर्म तथा अत्याचार का विस्तार होता है, तब-तब भगवान स्वयं धरा पर अवतार लेकर धर्म की रक्षा और सज्जनों का कल्याण करते हैं। कंस के क्रूर शासन, अन्याय और अधर्म के अंधकार को समाप्त कर धर्म की पुनर्स्थापना करने के लिए ही भगवान श्रीकृष्ण का दिव्य अवतरण हुआ था। स्वामी जी ने "विप्र धेनु सुर संत हित लीन्ह मनुज अवतार" की महिमा गाते हुए भक्तों को आश्वस्त किया कि सच्ची श्रद्धा और पूर्ण समर्पण के आगे विवश होकर भगवान सदैव अपने भक्तों के समीप आते हैं और वे अपने शरणागत को कभी एकाकी नहीं छोड़ते।
आध्यात्मिक चेतना को गहराई प्रदान करते हुए कथाव्यास ने श्रीमद्भागवत में वर्णित भगवान ऋषभदेव, महाराज पृथु, हिरण्यकश्यप और परम भक्त प्रह्लाद के चरित्र, गज-ग्राह मोक्ष की कथा तथा भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण के प्राकट्य से जुड़े विभिन्न प्रेरणादायी प्रसंगों का अत्यंत सूक्ष्मता से जीवंत वर्णन किया। उन्होंने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि संकट चाहे कितना भी विकराल क्यों न हो, भक्त प्रह्लाद की अडिग निष्ठा, संकट के क्षणों में गजेन्द्र की आर्त पुकार और देवकी-वसुदेव की अनन्य भक्ति हमें सिखाती है कि ईश्वर का स्मरण कभी भी व्यर्थ नहीं जाता।
श्रीकृष्ण जन्मोत्सव प्रसंग के महात्म्य पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने बताया कि मथुरा के अंधकारमय कारागार में अर्धरात्रि के समय जैसे ही पूर्ण ब्रह्म परमेश्वर का प्राकट्य हुआ, वैसे ही प्रकृति और काल साक्षी बन गए। चारों ओर अलौकिक और दैवीय प्रकाश फैल गया, लोहे की बेड़ियां स्वतः ही टूट गईं, पहरेदार योगमाया के प्रभाव से गहरी निद्रा में चले गए और वसुदेव जी नवजात बालमुकुंद को सुरक्षित रूप से गोकुल पहुंचाने में सफल रहे। स्वामी जी ने रेखांकित किया कि श्रीकृष्ण का संपूर्ण जीवन मानव जाति के लिए प्रेम, करुणा, कर्तव्य, नीति और साक्षात धर्म का अनुपम संदेश है, जिसे प्रत्येक मनुष्य को अपने जीवन में उतारना चाहिए।
इस भव्य पुरुषोत्तम मास महोत्सव के अंतर्गत हरि शेवा उदासीन आश्रम में केवल कथा ही नहीं, बल्कि धार्मिक अनुष्ठानों की एक विशाल श्रृंखला निरंतर जारी है, जिसके तहत प्रतिदिन विष्णु यज्ञ, महादेव का विशेष रुद्राभिषेक, हरिनाम संकीर्तन, भव्य गंगा आरती एवं विविध आध्यात्मिक आयोजन किए जा रहे हैं। गुरुवार को आयोजित किए गए पावन विष्णु यज्ञ में यजमान हेमन्त-निकिता टिक्यानी एवं अंजना तोषनीवाल ने पूर्ण विधि-विधान से आहुतियां अर्पित कर परम धर्मलाभ प्राप्त किया तथा भगवान देवाधिदेव महादेव का रुद्राभिषेक संपन्न किया। इस पावन अवसर पर अजमेर से पधारे महंत स्वरूप दास उदासीन और पुष्कर के महंत हनुमान राम उदासीन की गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम के आध्यात्मिक गौरव को और अधिक बढ़ा दिया।
महोत्सव की महत्ता को प्रतिपादित करते हुए आश्रम के पूज्य संत मायाराम एवं संत गोविंदराम ने उपस्थित जनसमुदाय से इस पुरुषोत्तम मास में अधिकाधिक धर्मलाभ लेने का आत्मीय आह्वान किया। संतों ने कहा कि वर्तमान में भीलवाड़ा की पावन धरा पर धर्म, भक्ति और सत्संग की जो अलौकिक त्रिवेणी प्रवाहित हो रही है, वह अत्यंत दुर्लभ है। मानव जीवन में ऐसे आध्यात्मिक अवसर बार-बार नहीं आते, इसलिए प्रत्येक सनातन धर्मावलंबी को इस कथा, यज्ञ, भजन और सत्संग के दिव्य प्रवाह से जुड़कर अपनी आत्मा और जीवन को आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण कर लेना चाहिए।
इस ऐतिहासिक कृष्ण जन्मोत्सव और श्रीमद्भागवत कथा के समस्त धार्मिक कार्यक्रमों में संत राजाराम, संत ईशानराम, संत सुयज्ञराम सहित अत्यंत विशाल संख्या में भीलवाड़ा और आसपास के क्षेत्रों से आए श्रद्धालु उपस्थित रहे। महोत्सव के दौरान संपूर्ण आश्रम परिसर उल्लास, आस्था और अभूतपूर्व भक्तिमय वातावरण से सराबोर दिखाई दिया, जिसने भीलवाड़ा के धार्मिक इतिहास में एक नया स्वर्णिम अध्याय जोड़ दिया है।

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