भीलवाड़ा: हरि शेवा उदासीन आश्रम में श्रीमद्भागवत कथा का भक्तिमय समापन
पुरुषोत्तम मास के उपलक्ष्य में आयोजित कथा का विश्राम, 8 जून से शिव महापुराण कथा का होगा शुभारंभ।

भीलवाड़ा स्थित हरि शेवा उदासीन आश्रम में स्वामी अशोकानंद जी महाराज द्वारा श्रीमद्भागवत कथा का वाचन करते हुए।
सनातन सेवा समिति, हरि शेवा उदासीन आश्रम सनातन मंदिर एवं महामंडलेश्वर स्वामी हंसराम जी उदासीन महाराज के सान्निध्य में पुरुषोत्तम मास के पावन अवसर पर आयोजित संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव का रविवार को श्रद्धा, भक्ति एवं उल्लास के साथ भव्य विश्राम हुआ। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भागवत अमृत का रसपान कर धर्मलाभ प्राप्त किया और भगवान श्री हरि के जयघोषों से संपूर्ण आश्रम परिसर भक्तिमय हो उठा। कथाव्यास पूज्य स्वामी अशोकानंद जी महाराज, भक्ति धाम आश्रम, नर्मदा तट, जबलपुर ने अंतिम दिवस श्रीमद्भागवत के विविध प्रेरणादायक प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण के 16,108 रानियों के साथ दिव्य विवाह प्रसंग, स्यमंतक मणि के आख्यान, कुरुक्षेत्र में गोपियों से मिलन, भगवान दत्तात्रेय द्वारा बताए गए 24 गुरुओं के संदेश, सुदामा चरित्र तथा राजा परीक्षित के मोक्ष प्रसंग का विस्तृत वर्णन किया। उन्होंने कहा कि इन प्रसंगों में भक्ति, ज्ञान, वैराग्य, मित्रता, समर्पण और आत्मकल्याण का संदेश निहित है। श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता निष्काम प्रेम का सर्वोत्तम उदाहरण है, वहीं परीक्षित मोक्ष प्रसंग संदेश देता है कि श्रद्धा और सत्संग के माध्यम से मनुष्य जन्म-मरण के बंधनों से मुक्ति पा सकता है। भगवान भक्त के भाव के भूखे होते हैं, वैभव के नहीं।
स्वामीजी ने श्रीमद्भागवत का प्रसिद्ध श्लोक “स वै पुंसां परो धर्मो यतो भक्तिरधोक्षजे। अहैतुक्यप्रतिहता ययाऽत्मा सुप्रसीदति॥” का उल्लेख करते हुए बताया कि मनुष्य का सर्वोत्तम धर्म वही है जिससे भगवान के प्रति निष्काम एवं निरंतर भक्ति उत्पन्न हो, जिससे आत्मा को परम संतोष प्राप्त होता है। भागवत श्रवण से ज्ञान और वैराग्य का उदय होता है। कथा के दौरान भजनों ने श्रद्धालुओं को सराबोर कर दिया और “राधे-श्याम”, “जय श्रीकृष्ण” एवं “हरि बोल” के जयघोषों से वातावरण गुंजायमान रहा। विश्राम उपरांत स्वामी अशोकानंद जी महाराज की आश्रम परिवार द्वारा भावपूर्ण विदाई की गई। महामंडलेश्वर स्वामी हंसराम जी उदासीन महाराज ने पुरुषोत्तम मास की महिमा बताते हुए कहा कि वर्तमान में सनातन संस्कृति का पावन पर्व चल रहा है। आश्रम में प्रतिदिन गंगा आरती, दुर्गासप्तशती का अखंड पाठ एवं अखंड रामधुन का लाभ भक्तजन ले रहे हैं। उन्होंने आत्महत्या और जीव हत्या को महापाप बताते हुए इनसे दूर रहने का आह्वान किया। स्वामी जी ने बाबा शेवाराम साहब एवं बाबा गंगाराम साहब महाराज के तप-त्याग का स्मरण करते हुए कहा कि इन्हीं के पुण्य प्रताप से कल्पवृक्ष के सान्निध्य में कथा श्रवण का सौभाग्य प्राप्त हुआ है।
उन्होंने बताया कि पुरुषोत्तम मास में आयोजित चारों कथाओं का सफलतापूर्वक समापन हुआ है तथा 8 जून से श्री शिव महापुराण कथा का शुभारंभ होगा। श्रद्धालुओं से संतों की मर्यादापूर्वक सेवा करने का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा कि जीवन में सुख-शांति हेतु सेवा एवं सुमिरन को आधार बनाना होगा। जो संतों और प्रभु की कृपा के पात्र बनते हैं, उन पर निरंतर अमृतवर्षा होती है। इस अवसर पर संत मायाराम, संत गोविन्दराम, संत राजाराम, संत ईशानराम, संत सुयज्ञराम, संत केशव राम आदि ने अभिनंदन किया। संत मायाराम ने बताया कि 8 जून सोमवार से 14 जून रविवार तक प्रतिदिन दोपहर 3 बजे से सायं 6 बजे तक श्री शिव महापुराण कथा का आयोजन होगा, जिसमें काशी के स्वामी डॉ. निर्मल दास जी महाराज अपनी ओजस्वी वाणी से शिवतत्व का वाचन करेंगे। महोत्सव का समापन 15 जून को पूर्णाहुति एवं संत समागम के साथ होगा। आज विष्णु यज्ञ में जय राम-वर्षा अभिचंदानी एवं अशोक मूंदड़ा ने आहुतियाँ दीं तथा महादेव का अभिषेक किया। संत गोविन्दराम ने बताया कि प्रतिदिन सायंकाल काशी की तर्ज पर आयोजित गंगा आरती आश्रम में विशेष आकर्षण का केंद्र है।

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