भीलवाड़ा: हरि शेवा उदासीन आश्रम में नौ दिवसीय श्रीराम कथा का समापन
महामंडलेश्वर स्वामी जगदीश दास उदासीन ने श्रीराम कथा के विविध प्रसंगों का वर्णन किया, 26 मई से भक्तमाल कथा शुरू होगी।

भीलवाड़ा के हरि शेवा उदासीन आश्रम में नौ दिवसीय श्रीराम कथा के समापन अवसर पर व्यासपीठ से प्रवचन देते महामंडलेश्वर स्वामी जगदीश दास उदासीन।
भीलवाड़ा, 25 मई। सनातन सेवा समिति के तत्वावधान एवं महामंडलेश्वर स्वामी हंसराम उदासीन के सानिध्य में हरि शेवा उदासीन आश्रम सनातन मंदिर में अधिकमास के अंतर्गत आयोजित नौ दिवसीय श्रीराम कथा का भावपूर्ण विश्राम हुआ। पुरुषोत्तम माह महोत्सव के तहत आयोजित इस आध्यात्मिक अनुष्ठान के अंतिम दिवस पर हरिद्वार के महामंडलेश्वर स्वामी जगदीश दास उदासीन ने व्यासपीठ से श्रीराम कथा के विविध प्रसंगों का अमृतपान कराया।
स्वामी जगदीश दास उदासीन ने अगस्त्य ऋषि आश्रम एवं पंचवटी प्रसंग का वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को समझाया कि वनवास काल में भगवान श्रीराम, माता सीता एवं लक्ष्मण ने ऋषि-मुनियों के आश्रमों में रहकर धर्म, सेवा और मर्यादा का अनुकरणीय पालन किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि विपरीत परिस्थितियों में धैर्य और संयम बनाए रखना ही जीवन की सबसे बड़ी साधना है। सूर्पणखा प्रसंग के माध्यम से उन्होंने संदेश दिया कि काम, क्रोध और अहंकार मनुष्य के पतन के मुख्य कारण हैं और मर्यादा का उल्लंघन करने वाला व्यक्ति स्वयं संकट को निमंत्रण देता है। सीता हरण प्रसंग का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि रावण द्वारा छलपूर्वक किया गया यह कृत्य धर्म और अधर्म के बीच महान संघर्ष का आधार बना।
श्रीराम-हनुमान-सुग्रीव मिलन प्रसंग को सुनाते हुए स्वामी जी ने मित्रता, विश्वास और धर्म के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सच्चा मित्र वही है जो विपत्ति के समय साथ खड़ा रहे। हनुमान जी को सेवा, समर्पण और गुरु-भक्ति का सर्वोच्च उदाहरण बताते हुए उन्होंने कहा कि उनकी निष्ठा प्रत्येक व्यक्ति को कर्तव्यपरायण बनने की प्रेरणा देती है। लंका कांड में सीता माता की खोज, समुद्र लांघकर हनुमान जी का लंका पहुंचना, अशोक वाटिका विध्वंस एवं लंका दहन का वर्णन करते समय पांडाल "जय बजरंग बली" के जयघोष से गुंजायमान हो उठा। रावण वध प्रसंग पर स्वामी जी ने कहा कि अहंकार और अधर्म का अंत निश्चित है। भगवान श्रीराम ने रावण का वध कर यह संदेश दिया कि सत्य और धर्म की विजय सदैव होती है। अंत में माता सीता के अग्नि प्रवेश और प्रभु की अयोध्या वापसी के प्रसंग पर "राम वन से लौट घर आए, आज अवध में आनंद छाए" भजन गाते ही श्रद्धालु भावविभोर होकर झूम उठे।
स्वामी जगदीश दास उदासीन ने कहा कि श्रीराम का जीवन केवल एक कथा नहीं, बल्कि आदर्श जीवन जीने की प्रेरणा है। वर्तमान समय में परिवारों में बढ़ती दूरियों और स्वार्थ को समाप्त करने के लिए श्रीराम के आदर्शों को अपनाना आवश्यक है। सेवा, संयम और संस्कारों से ही समाज में सुख-शांति संभव है। कथा समापन पर महाआरती और प्रसाद वितरण किया गया। इससे पूर्व विष्णु यज्ञ में नरेन्द्र चौहान एवं नरेश चौहान ने जोड़े सहित आहुतियां दीं और महादेव का अभिषेक किया। सायंकाल गंगा आरती में भी सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित रहे।
उल्लेखनीय है कि हरि शेवा उदासीन आश्रम में धार्मिक आयोजनों की श्रृंखला में 26 मई से 30 मई तक प्रतिदिन दोपहर 3 बजे से 6 बजे तक "भक्तमाल-कथा" का आयोजन होगा, जिसमें भानपुरा पीठ के जगतगुरु शंकराचार्य ज्ञानानंद जी तीर्थ महाराज अपनी ओजस्वी वाणी से श्रद्धालुओं को कथा का रसपान कराएंगे।

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