निष्काम भक्ति से मोक्ष का मार्ग प्रशस्त, शिव महापुराण कथा में उमड़ा श्रद्धा का सागर
हरि सेवा उदासीन आश्रम में आयोजित शिव महापुराण कथा के पांचवें दिन कथा व्यास डॉ. स्वामी निर्मल दास जी महाराज ने शिव-पार्वती विवाह और कार्तिकेय-गणेश जन्म प्रसंगों पर मार्मिक प्रवचन दिए।

हरि सेवा उदासीन आश्रम में पुरुषोत्तम मास के अंतर्गत व्यासपीठ से श्रद्धालुओं को निष्काम भक्ति और सदाचार का संदेश देते प्रखर प्रवक्ता डॉ. स्वामी निर्मल दास जी महाराज।
पुरुषोत्तम मास के पावन अवसर पर सनातन सेवा समिति, हरि सेवा उदासीन आश्रम सनातन मंदिर एवं महामंडलेश्वर स्वामी श्री हंसराम जी उदासीन महाराज के सान्निध्य में आयोजित श्रीशिव महापुराण कथा के पांचवें दिन श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम देखने को मिला। कथा व्यास प्रखर प्रवक्ता डॉ. स्वामी निर्मल दास जी महाराज ने भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान कार्तिकेय और श्रीगणेश की दिव्य लीलाओं का भावपूर्ण वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को धर्म, भक्ति और जीवन मूल्यों का संदेश दिया।
कथा का शुभारंभ सामूहिक "ॐ नमः शिवाय" मंत्रोच्चार से हुआ, जिससे पूरा वातावरण शिवमय हो उठा। इसके पश्चात भजन गायक मंडली के सदस्यों जलज पाठक, नमन पांडे, सूरज मिश्रा, अरुण मिश्रा एवं स्वामी रामदास ने भक्तिमय भजनों की प्रस्तुति देकर श्रद्धालुओं को भक्ति रस में सराबोर कर दिया। मधुर भजनों पर श्रद्धालु भाव-विभोर होकर झूम उठे और सभागार जयघोषों से गूंजता रहा।
अपने प्रवचन में डॉ. स्वामी निर्मल दास जी महाराज ने कहा कि भगवान की निष्काम भक्ति ही मोक्ष प्राप्ति का सबसे सरल और श्रेष्ठ मार्ग है। उन्होंने कहा कि जब मनुष्य बिना किसी स्वार्थ और अपेक्षा के ईश्वर की आराधना करता है, तब उसके जीवन में आत्मिक शांति, संतोष और परम कल्याण का मार्ग खुलता है। उन्होंने कथा के केवल श्रवण ही नहीं, बल्कि उसके मनन और आत्मसात करने की आवश्यकता पर भी बल दिया।
कथावाचन के दौरान उन्होंने शिव-पार्वती विवाह प्रसंग के माध्यम से गृहस्थ जीवन की महत्ता को रेखांकित करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में विवाह केवल सामाजिक बंधन नहीं, बल्कि दो आत्माओं का पवित्र आध्यात्मिक मिलन है। प्रेम, विश्वास, त्याग और समर्पण पर आधारित दांपत्य जीवन का आदर्श उदाहरण भगवान शिव और माता पार्वती का जीवन है।
भगवान कार्तिकेय के जन्म प्रसंग का वर्णन करते हुए डॉ. स्वामी निर्मल दास जी महाराज ने बताया कि देवताओं की रक्षा और तारकासुर के अत्याचारों के अंत के लिए भगवान शिव की दिव्य शक्ति से कार्तिकेय का अवतार हुआ। उन्होंने अपनी वीरता, पराक्रम और नेतृत्व क्षमता से देवताओं को विजय दिलाई। यह प्रसंग युवाओं को साहस, अनुशासन और राष्ट्रधर्म के प्रति समर्पण की प्रेरणा प्रदान करता है।
भगवान श्रीगणेश के जन्म प्रसंग का मार्मिक वर्णन करते हुए उन्होंने बताया कि माता पार्वती ने अपने उबटन से गणेश जी की रचना कर उन्हें द्वारपाल नियुक्त किया था। भगवान शिव द्वारा उनका मस्तक विच्छेद और बाद में हाथी का शीश लगाकर पुनर्जीवन प्रदान करने की कथा सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। उन्होंने कहा कि भगवान गणेश बुद्धि, विवेक, विनम्रता और शुभारंभ के देवता हैं, इसलिए प्रत्येक मांगलिक कार्य से पूर्व उनकी पूजा का विधान है।
कथा के दौरान "हर-हर महादेव" और "जय श्री गणेश" के जयघोष लगातार गूंजते रहे। श्रद्धालु भगवान शिव एवं उनके परिवार की दिव्य लीलाओं का श्रवण कर आध्यात्मिक आनंद में डूबे नजर आए।
पुरुषोत्तम मास में आने वाली विशेष महाशिवरात्रि के महत्व पर प्रकाश डालते हुए डॉ. स्वामी निर्मल दास जी महाराज ने बताया कि इस वर्ष 13 जून को पड़ने वाली महाशिवरात्रि अत्यंत पुण्यदायी मानी गई है। उन्होंने कहा कि इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से भगवान शिव का पूजन, रुद्राभिषेक, उपवास और शिव मंत्रों का जाप करने से मनोकामनाओं की पूर्ति, पापों का क्षय तथा आध्यात्मिक उन्नति का लाभ प्राप्त होता है।
कार्यक्रम के अंत में आरती एवं प्रसाद वितरण किया गया। प्रातःकाल आयोजित विष्णु यज्ञ में चाँदमल सोमानी, कन्हैया मोरयानी, हरीश-निशा आडवाणी, राजा-वर्षा टिक्यानी, जयराम-वर्षा अभिचंदानी, भगवान सिंह चौहान सपत्नी, संगीत बालानी, पल्लवी वच्छानी तथा अशोक मूंदड़ा सहित अनेक श्रद्धालुओं ने आहुतियां अर्पित कर महादेव का अभिषेक किया।
आश्रम के संत मायाराम जी एवं संत गोविंदराम जी ने बताया कि पुरुषोत्तम मास के दौरान प्रतिदिन प्रातः विष्णु यज्ञ, महादेव का रुद्राभिषेक तथा सायंकाल काशी की तर्ज पर भव्य गंगा आरती, दुर्गा सप्तशती पाठ एवं अखंड रामधुन का आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने धर्मप्रेमी श्रद्धालुओं से अधिकाधिक संख्या में उपस्थित होकर धर्मलाभ एवं पुण्य अर्जित करने का आह्वान किया।

Pratahkal Bureau
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