भीलवाड़ा के छोटी हरणी स्थित हनुमान टेकरी आश्रम में पुरुषोत्तम मास की पावन बेला में भक्ति और अध्यात्म का अद्भुत प्रवाह देखने को मिल रहा है। महन्त बनवारीशरण काठियाबाबा के पावन सान्निध्य में आयोजित सात दिवसीय 11 कुण्डीय श्री विष्णु लक्ष्मी महायज्ञ शुक्रवार को अपने पांचवें चरण में प्रवेश कर गया। इस महायज्ञ का मुख्य उद्देश्य जगत के कल्याण और प्राणी मात्र के जीवन में सुख-समृद्धि का संचार करना है। यज्ञवेदी से उठती पवित्र आहुतियों की सुगंध और वैदिक मंत्रोच्चार से पूरा आश्रम परिसर गुंजायमान हो उठा, जहाँ श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का जनसैलाब उमड़ पड़ा है।

यज्ञ के पांचवें दिन का शुभारंभ प्रातः 8 बजे महन्त बनवारीशरण काठियाबाबा की देखरेख में हुआ। श्री शारदा सनातन परमार्थ न्यास के वेदाचार्य पंडित मुकेश शास्त्री के कुशल निर्देशन में सम्पन्न हुए इस अनुष्ठान में यजमानों के साथ लक्ष्मी स्वरूपा कन्याओं ने भी यज्ञवेदी में आहुतियां देकर सर्वकल्याण की प्रार्थना की। अनुष्ठान की विधिवत प्रक्रिया में सर्वप्रथम सभी यज्ञकर्ताओं को पवित्रीकरण और पंचगव्य के सेवन के उपरांत यज्ञमंडप में प्रवेश कराया गया। कल्याणकारी दिव्य मंत्रों के साथ हवन की पूर्णाहुति हुई, जिसके बाद आरती और प्रसाद वितरण के साथ प्रातःकालीन सत्र का विश्राम हुआ। यह महायज्ञ आगामी रविवार तक निरंतर जारी रहेगा, जिसमें शहर भर से भक्तगण सम्मिलित होकर पुण्य लाभ अर्जित कर रहे हैं।

महायज्ञ के आध्यात्मिक वातावरण के साथ ही, आश्रम परिसर में भक्तिपूर्ण रासलीला का मंचन भी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। गुरुवार की रात्रि को श्री राधा रासेश्वरी रासलीला मण्डल, वृन्दावन धाम के कलाकारों द्वारा प्रस्तुत भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं ने उपस्थित भक्तों को भावविभोर कर दिया। विशेष रूप से ‘माखन चोरी’ प्रसंग की जीवंत प्रस्तुति ने कान्हा की बाल लीलाओं का ऐसा दृश्य उपस्थित किया कि श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो गए। इस प्रसंग में गोपियों की शिकायत और यशोदा मैया की वात्सल्यमयी प्रतिक्रियाओं का मंचन कान्हा के जयकारों के बीच किया गया। मण्डल के निर्देशक दामोदरदास काठियाबाबा के निर्देशन में 16 कलाकारों के दल ने महिला पात्रों सहित सभी भूमिकाओं का निर्वहन किया। रासलीला का यह भक्तिपूर्ण दौर प्रतिदिन रात्रि 8 बजे से आयोजित हो रहा है, जो श्रद्धालुओं के लिए एक अविस्मरणीय अनुभव बन गया है।

इस सात दिवसीय अनुष्ठान की भव्यता ने न केवल छोटी हरणी क्षेत्र बल्कि पूरे भीलवाड़ा को धर्ममय बना दिया है। वैदिक रीति-रिवाजों और लोक-संस्कृति के समन्वय से आयोजित यह महायज्ञ विश्वशांति और सनातन संस्कारों की पुनर्स्थापना के संदेश को प्रबल कर रहा है। रविवार को होने वाला इसका समापन आयोजन की भक्तिपूर्ण यात्रा का एक भावपूर्ण अंत बनेगा, जो श्रद्धालुओं के हृदय में चिरस्थायी स्मृतियां छोड़ जाएगा।

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