कोटड़ी क्षेत्र में अवैध गार्नेट खनन से जुड़े व्यापारियों से अवैध वसूली के बहुचर्चित मामले में पुलिस जांच ने भ्रष्टाचार और संगठित अपराध की परतों को खोलकर रख दिया है। पुलिस द्वारा किए गए चौंकाने वाले खुलासे बताते हैं कि पकड़े गए आरोपी 'सिस्टम' के नाम पर खौफ पैदा कर व्यापारियों को लूट रहे थे। रिमांड अवधि समाप्त होने पर न्यायालय में पेश किए गए पांचों आरोपियों को जेल भेज दिया गया है। मामले का सबसे विडंबनापूर्ण पहलू यह है कि गिरफ्तार किए गए पांच आरोपियों में से तीन स्वयं भी गार्नेट के अवैध कारोबार में लिप्त थे।

इस पूरी साजिश का मास्टरमाइंड मुख्य आरोपी अजय पांचाल था, जिसने राजनीतिक पार्टी के कार्यकर्ता के रूप में अपने रसूख और अधिकारियों से संपर्कों का दुरुपयोग कर अवैध वसूली का एक जटिल जाल बुना। जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया कि आरोपी नारायण और नंदसिंह उर्फ पिंटू स्वयं गार्नेट व्यवसाय से जुड़े थे; नारायण का अपना कारखाना था जबकि कालू किराए की मशीनें संचालित करता था। लंबे समय से बंद पड़े कारोबार को फिर से शुरू करने का प्रलोभन देकर अजय ने पिंटू सिंह को अपने साथ जोड़ा और उसे विश्वास दिलाया कि उसके बताए मार्ग पर चलने से बिना किसी प्रशासनिक बाधा के उनका अवैध धंधा फिर से फलने-फूलने लगेगा।

अजय के निर्देश पर इन आरोपियों ने कोटड़ी क्षेत्र के गार्नेट व्यापारियों की एक विस्तृत सूची तैयार की, जिसमें कुल 35 मशीनों को लक्षित किया गया था। प्रति मशीन वसूली की दर निर्धारित करने के बाद आरोपियों ने व्यापारियों को सीधे तौर पर धमकाना शुरू किया कि "यदि वे सिस्टम के साथ चलेंगे तो लाभ में रहेंगे, अन्यथा उनके प्लांट और मशीनें जब्त करवा दी जाएंगी।" इसी प्रशासनिक कार्रवाई के डर से 22 व्यापारियों ने आत्मसमर्पण करते हुए आरोपियों को कुल 7 लाख 50 हजार रुपये की राशि सौंप दी।

वसूली के इस धन के लेन-देन में आरोपियों ने नकद और डिजिटल माध्यमों का प्रयोग किया। कुल राशि में से 5 लाख 40 हजार रुपये नकद लिए गए, जबकि शेष 2 लाख रुपये पांचवें आरोपी सौरभ के माध्यम से ऑनलाइन मंगवाए गए। इसमें से 1.10 लाख रुपये सौरभ के स्वयं के खाते में और 90 हजार रुपये उसके एक मित्र के बैंक खाते में स्थानांतरित किए गए थे, जिसे पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए बरामद कर लिया है।

वर्तमान में पुलिस उन सभी 22 व्यापारियों की पहचान कर साक्ष्य जुटा चुकी है जिनसे वसूली की गई थी। अब इन व्यापारियों के विरुद्ध भी अनुसंधान किया जाएगा कि उन्होंने अपने अवैध कार्यों को संरक्षण देने हेतु रिश्वत की राशि क्यों दी। कार्रवाई को आगे बढ़ाते हुए पुलिस ने आरोपी नंदसिंह का कारखाना और नारायण की गार्नेट धुलाई में प्रयुक्त होने वाली दो स्क्रू मशीनें जब्त कर ली हैं। यह मामला क्षेत्र में खनन माफिया और कथित बिचौलियों के बीच के गहरे गठजोड़ को उजागर करता है, जिस पर पुलिस की यह कार्रवाई एक कड़ा प्रहार मानी जा रही है।

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