भीलवाड़ा। भीलवाड़ा नगर निगम द्वारा शहर को अतिक्रमण मुक्त करने के नाम पर लाखों रुपये पानी की तरह बहाए जा रहे हैं, किंतु धरातल पर इस मुहिम का कोई सकारात्मक प्रभाव दृष्टिगोचर नहीं हो रहा है। नगर निगम प्रशासन की घोर लापरवाही और निरंतर निगरानी के अभाव में शहर की सूरत बदलने का दावा पूरी तरह खोखला साबित हो रहा है। आलम यह है कि निगम का दस्ता जिस मार्ग से अतिक्रमण हटाकर निकलता है, उसके महज दो-तीन दिन के भीतर ही अतिक्रमी पुन: उन्हीं स्थानों पर काबिज हो जाते हैं, जिससे जनता की गाढ़ी कमाई से खर्च की गई लाखों की राशि पूरी तरह बर्बाद हो रही है।

विदित रहे कि नगर निगम ने करीब डेढ़-दो माह पूर्व शहर के मुख्य मार्गों को अतिक्रमण मुक्त करने के उद्देश्य से एक वृहद अभियान का सूत्रपात किया था। शुरुआत में इस कार्रवाई ने प्रभाव दिखाया, परंतु निगम की शिथिलता के कारण यह मुहिम अपने उद्देश्य में विफल रही। अभी मात्र एक पखवाड़ा पूर्व निगम के अतिक्रमण निरोधी दस्ते ने पुर रोड पर सघन कार्रवाई की थी, लेकिन वर्तमान में गंगापुर तिराहे से लेकर बापूनगर तिराहे तक स्थिति पुन: पूर्ववत हो गई है। यहाँ अतिक्रमियों ने अपने ठिए वापस जमा लिए हैं और मार्ग केबिनों, सब्जी व फ्रूट के ठेलों से अटा पड़ा है। इतना ही नहीं, क्षेत्रीय दुकानदारों ने भी दुकानों के बाहर दोबारा अवैध कब्जे कर लिए हैं। यही भयावह स्थिति गंगापुर तिराहे से अजमेर एवं चित्तौड़गढ़ मार्ग पर भी बनी हुई है।

पुर रोड की स्थिति सर्वाधिक चिंताजनक है, जहाँ सड़क से बिल्कुल सटाकर केबिनें खड़ी कर दी गई हैं। पांसल चौराहे से बापूनगर चौराहे के मध्य फल, तरबूज और कपड़े विक्रेताओं का इस कदर जमावड़ा है कि वहाँ हर क्षण भीषण सड़क दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। वर्तमान में इस मार्ग पर निर्माण कार्य चलने के कारण एकतरफा यातायात व्यवस्था लागू है, ऐसे में इन अवैध कब्जों के चलते रात्रि के समय निरंतर जाम की स्थिति उत्पन्न हो रही है। यदि निगम ने समय रहते कठोर कार्रवाई सुनिश्चित नहीं की, तो किसी बड़ी अनहोनी से इनकार नहीं किया जा सकता।

शहर के मुख्य बाजारों की बात करें तो स्टेशन चौराहा से भीमगंज थाने तक फल-फ्रूट विक्रेताओं ने अपने ठेलों को बेतरतीब ढंग से खड़ा कर यातायात व्यवस्था को पंगु बना दिया है। जिला अस्पताल के मुख्य द्वार के ठीक सामने तक ठेलों की कतारें लगी होने से आपातकालीन स्थिति में भी बाधा उत्पन्न हो रही है। कोतवाली थाने और स्वयं नगर निगम कार्यालय के ठीक सामने सड़क पर अवैध कब्जों का बोलबाला है। स्टेशन चौराहा से रेलवे फाटक और सूचना केंद्र चौराहा भी इन ठेले वालों की गिरफ्त में है। विडंबना यह है कि ट्रैफिक पुलिस और नगर निगम ने इन ठेले वालों को मानो खुली छूट प्रदान कर रखी है। इसके अतिरिक्त, ऑटो चालकों द्वारा भी बीच सड़क पर बेतरतीब तरीके से वाहन खड़े करने से यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है।

Pratahkal Newsroom

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