भीलवाड़ा: डिजिटल अरेस्ट साइबर ठगी मामले में पुलिस ने 13.46 लाख रुपये वापस कराए
भीलवाड़ा पुलिस ने प्रहलाद राय सोडानी के साथ हुई 32.75 लाख की ठगी के मामले में तकनीकी जांच कर बैंक खातों को फ्रीज करवाया और 13.46 लाख रुपये का रिफंड सुनिश्चित किया।

भीलवाड़ा में 'डिजिटल अरेस्ट' का भय दिखाकर बुजुर्ग से 32.75 लाख रुपये की साइबर ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह के खिलाफ भीलवाड़ा पुलिस ने आक्रामक और प्रभावी कार्रवाई की है। साइबर थाना पुलिस ने न केवल ठगों के नेटवर्क को चिन्हित कर ध्वस्त करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं, बल्कि उनके बैंक खातों को फ्रीज कर पीड़ित को बड़ी राहत पहुंचाई है। पुलिस ने तकनीकी अनुसंधान के दम पर ठगों के खातों से 16.36 लाख रुपये की राशि होल्ड करवाई और कानूनी प्रक्रिया के तहत न्यायालय से आदेश प्राप्त कर 13.46 लाख रुपये पीड़ित के खाते में वापस रिफंड करवा दिए हैं।
इस सनसनीखेज वारदात का शिकार संजय कॉलोनी, सुभाषनगर निवासी भीलवाड़ा डेयरी के सेवानिवृत्त लेखाकार 74 वर्षीय प्रहलाद राय सोडानी हुए थे। 27 मार्च 2026 को ठगों ने उन्हें कॉल कर डराया कि उनके दस्तावेजों का दुरुपयोग कर मुंबई से ली गई सिम का उपयोग अश्लील मैसेज भेजने में हुआ है। शातिर अपराधियों ने खुद को सीबीआई जज और पुलिस अधिकारी बताकर व्हाट्सएप वीडियो कॉल के जरिए बुजुर्ग दंपत्ति को घर में ही 'डिजिटल अरेस्ट' कर लिया। जेल जाने और बदनामी के भय से पीड़ित ने अपने खाते से 22,50,000 रुपये और अपनी पत्नी श्रीमती सुशीला देवी की एफडी तुड़वाकर 10,25,000 रुपये, यानी कुल 32,75,000 रुपये बदमाशों के खातों में स्थानांतरित कर दिए।
पीड़ित ने 14 अप्रैल 2026 को साइबर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई, जिसके बाद पुलिस टीम ने अत्याधुनिक तकनीकी साधनों का उपयोग करते हुए उन संदिग्ध बैंक खातों को ट्रेस किया जिनमें ठगी की राशि भेजी गई थी। पुलिस ने बैंकों के साथ समन्वय स्थापित कर ठगों के खातों में मौजूद 16,36,153 रुपये की राशि को तुरंत फ्रीज करवा दिया। इसके पश्चात कानूनी औपचारिकताएं युद्धस्तर पर पूरी करते हुए 12 मई 2026 को न्यायालय से आवश्यक आदेश प्राप्त किए गए। इस सफल ऑपरेशन के तहत 13,46,153 रुपये की राशि सीधे प्रहलाद राय के खाते में सुरक्षित रिफंड करवा दी गई। पुलिस अब शेष राशि की रिकवरी और गिरोह के सदस्यों की गिरफ्तारी के लिए अपना शिकंजा कस रही है। पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि कोई भी जांच एजेंसी वीडियो कॉल पर डिजिटल अरेस्ट नहीं करती है। किसी भी संदिग्ध कॉल से भयभीत न हों और ऐसी स्थिति में तत्काल 1930 नंबर या नजदीकी साइबर थाने पर सूचित करें।

