राजस्थान के भीलवाड़ा में नवीन न्यायालय परिसर के लिए आवंटित भूमि को लेकर छिड़ा विवाद अब देश के सर्वोच्च नीति-नियामकों के द्वार तक पहुँच गया है। स्थानीय वकीलों और आमजन के हितों की रक्षा के लिए लामबंद हुई 'जिला न्यायालय परिसर बचाओ संघर्ष समिति' के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय कानून एवं संसदीय कार्य मंत्री अर्जुनराम मेघवाल से सीधी मुलाकात कर उन्हें एक विस्तृत प्रतिवेदन और मांगपत्र सौंपा है। बार काउंसिल ऑफ इंडिया के पूर्व को-चेयरमैन सुरेश चंद्र श्रीमाली के नेतृत्व में हुई यह महत्वपूर्ण मुलाकात भीलवाड़ा के नवनिर्वाचित सांसद दामोदर अग्रवाल के निवास स्थान पर संपन्न हुई, जहाँ समिति ने केंद्रीय मंत्री का पारंपरिक स्वागत करने के साथ ही नए कोर्ट परिसर के भूमि आवंटन को तत्काल निरस्त करने की पुरजोर वकालत की।

संघर्ष समिति ने केंद्रीय मंत्री मेघवाल के समक्ष भीलवाड़ा की जटिल भौगोलिक परिस्थितियों और प्रस्तावित न्यायालय परिसर के लिए आवंटित की गई ६२ बीघा भूमि की वास्तविक जमीनी स्थिति का पूरा कच्चा-चिट्ठा खोलकर रख दिया। प्रतिनिधिमंडल ने तीखे शब्दों में अवगत कराया कि प्रशासन द्वारा प्रस्तावित यह भूमि मुख्य शहर से अत्यधिक दूर, बेहद दुर्गम और पूरी तरह से निर्जन क्षेत्र में स्थित है। इस अदूरदर्शी निर्णय के कारण भविष्य में दूर-दराज से आने वाले वादकारियों, महिला फरियादियों, वकीलों और आम जनता को आवागमन सहित सुरक्षा संबंधी गंभीर और अत्यंत संवेदनशील समस्याओं से जूझना पड़ेगा। समिति ने पूरी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि इस विशालकाय भूमि के आवंटन की पूरी कार्रवाई अधिवक्ताओं को रत्ती भर भी विश्वास में लिए बिना और पारदर्शिता के घोर अभाव में आनन-फानन में पूर्ण की गई है, जिसके चलते भीलवाड़ा के पूरे अधिवक्ता समाज में प्रशासन के खिलाफ गहरा आक्रोश और तीव्र असंतोष व्याप्त है।

इस गंभीर गतिरोध के बीच, संघर्ष समिति ने केंद्रीय कानून मंत्री से पुरजोर आग्रह किया कि वे अधिवक्ता समाज के मान-सम्मान और आमजन की बुनियादी सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए इस संवेदनशील विषय में तुरंत सकारात्मक हस्तक्षेप करें। समिति ने इसके व्यावहारिक विकल्प के रूप में एक मजबूत विधिक प्रस्ताव भी रखा, जिसके तहत भीलवाड़ा न्यायालय परिसर को शहर से बाहर ले जाने के बजाय वर्तमान स्थान पर ही 'मल्टी-स्टोरी बिल्डिंग' (बहुमंजिला भवन) का निर्माण कर इसका आधुनिक विस्तार किया जाए, ताकि न्याय का मुख्य केंद्र शहर के हृदय स्थल में ही सुरक्षित बना रहे।

केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुनराम मेघवाल ने भीलवाड़ा के वकीलों के इस गंभीर पक्ष को बेहद शालीनता और संवेदनशीलता के साथ सुना। उन्होंने प्रतिनिधिमंडल को पूरी तरह आश्वस्त किया कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में अधिवक्ताओं एवं आमजन के मूल हितों के विपरीत कोई भी निर्णय नहीं थोपा जाना चाहिए। केंद्रीय मंत्री ने दृढ़तापूर्वक विश्वास दिलाया कि इस पूरे भूमि विवाद के तकनीकी और व्यावहारिक पक्षों का गहन परीक्षण करवाकर एक सर्वमान्य, सकारात्मक और धरातलीय समाधान निकालने के लिए केंद्र और राज्य के स्तर पर हरसंभव प्रभावी प्रयास किए जाएंगे।

इस अत्यंत महत्वपूर्ण रणनीतिक मुलाकात के दौरान भीलवाड़ा के अधिवक्ता आंदोलन की एकजुटता साफ नजर आई। प्रतिनिधिमंडल में पूर्व बार एसोसिएशन अध्यक्ष कृष्ण गोपाल शर्मा, पूर्व अध्यक्ष मोहम्मद फरजन, पूर्व अध्यक्ष विक्रम सिंह राठौड़, वरिष्ठ अधिवक्ता लादूलाल तेली, हेमेन्द्र सिंह राणावत, संघर्ष समिति के मुख्य संयोजक राकेश जैन, अंशुल बंसल, प्रदीप व्यास, बाबूलाल आचार्य, गोपाल सोनी, सुरेश पालीवाल, आदित्य जाजपुरा, कोशल खाती, अनिल धाकड़, ममता मेघवंशी, कृष्ण कुमार और कुणाल ओझा सहित जिले के कई अन्य गणमान्य अधिवक्तागण प्रमुख रूप से उपस्थित रहे, जिन्होंने इस कानूनी और जनहित की लड़ाई को इसके तार्किक अंजाम तक पहुँचाने का संकल्प दोहराया है।

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