भीलवाड़ा। जिला एवं सत्र न्यायालय भीलवाड़ा के प्रस्तावित नवीन परिसर हेतु किए गए भूमि आवंटन को निरस्त करने की मांग ने अब एक उग्र जन-आंदोलन का रूप ले लिया है। आज दिनांक 12 मई 2026 को इस विवादित आवंटन के विरुद्ध जिला एवं सत्र न्यायालय परिसर में एक व्यापक हस्ताक्षर अभियान का शंखनाद किया गया। जिला बार एसोसिएशन के पूर्व महासचिव एडवोकेट राकेश जैन के नेतृत्व में प्रारंभ हुए इस अभियान में न्यायालय में नियमित रूप से प्रैक्टिसरत अधिवक्ताओं ने अभूतपूर्व एकजुटता दिखाई। अभियान के प्रथम चरण में ही लगभग 90 प्रतिशत अधिवक्ताओं ने प्रस्तावित भूमि आवंटन के विरोध में प्रस्तुत याचिका पर अपने हस्ताक्षर अंकित किए, जिससे अब तक 600 से अधिक हस्ताक्षर एकत्रित किए जा चुके हैं और शेष को भी शीघ्र पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है।

अधिवक्ता समुदाय ने इस आवंटन को जनभावनाओं, न्यायिक आवश्यकताओं और पेशेवर हितों के सर्वथा विपरीत करार देते हुए इसे अव्यवहारिक और अनुपयुक्त बताया है। वकीलों का गंभीर आरोप है कि संपूर्ण आवंटन प्रक्रिया को अत्यंत गोपनीय, अपारदर्शी और एकपक्षीय तरीके से अंजाम दिया गया। इस महत्वपूर्ण विषय पर न तो जिला बार एसोसिएशन की जनरल बॉडी की कोई बैठक बुलाई गई और न ही किसी प्रकार का आधिकारिक प्रस्ताव पारित किया गया। अधिवक्ताओं का स्पष्ट मत है कि उनकी राय, सहमति या आपत्तियों को पूरी तरह दरकिनार कर उन्हें विश्वास में लिए बिना यह कार्यवाही पूर्ण की गई, जिससे पूरे विधिक समाज में गहरा रोष और असंतोष व्याप्त है।

विरोध का मुख्य आधार नवीन आवंटित भूमि की शहर से अत्यधिक दूरी और मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। अधिवक्ताओं के अनुसार, प्रस्तावित स्थान बाहरी क्षेत्र में स्थित होने के कारण महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों और ग्रामीण अंचलों से आने वाले पक्षकारों के लिए दुर्गम है। वर्तमान में वहां तक आवागमन के सीधे और पर्याप्त साधन उपलब्ध नहीं हैं, साथ ही प्रशासनिक कार्यालयों और पुलिस थानों से अत्यधिक दूरी होने के कारण न्यायिक प्रक्रियाओं में गंभीर बाधाएं उत्पन्न होना निश्चित है। भीलवाड़ा न्यायालय में प्रतिदिन शाहपुरा, गंगापुर, बिजौलिया, गुलाबपुरा और आसींद सहित जिले के सुदूर क्षेत्रों से हजारों नागरिक आते हैं, जिनके लिए "सुलभ एवं सस्ता न्याय" का सिद्धांत इस दूरस्थ स्थान पर निष्प्रभावी हो जाएगा।

उल्लेखनीय है कि हाल ही में राजस्थान उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के भीलवाड़ा प्रवास के दौरान उन्होंने स्वयं इस बात पर आश्चर्य व्यक्त किया था कि अधिवक्ता इतनी दूर जाने के लिए कैसे सहमत हो गए। उन्होंने भी माना कि यह भूमि अधिवक्ताओं के लिए उपयुक्त नहीं है। इस पृष्ठभूमि के बावजूद किए गए आवंटन को अधिवक्ता समुदाय ने संस्थागत मर्यादाओं का उल्लंघन माना है।

इस संघर्ष को निर्णायक मोड़ देने हेतु अधिवक्ताओं ने अब विधिक लड़ाई का मार्ग चुना है। प्रथम चरण में माननीय मुख्य न्यायाधीश सर्वोच्च न्यायालय नई दिल्ली और माननीय मुख्य न्यायाधीश राजस्थान उच्च न्यायालय को विस्तृत अभ्यावेदन प्रेषित किए जाएंगे। आवश्यकता पड़ने पर इस विषय को मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री स्तर तक ले जाने की रणनीति तैयार की गई है। इसके अतिरिक्त, आगामी दिनों में विभिन्न व्यापार मंडलों, स्वयंसेवी संस्थाओं, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों का समर्थन जुटाकर इसे एक बड़े जन-आंदोलन में बदला जाएगा। पूर्व अध्यक्ष जिला अभिभाषक संस्था भीलवाड़ा मोहम्मद फरजन (मोबाइल: 94134 59986) और विक्रम सिंह राठौड़ (मोबाइल: +91 8385-833333) ने संयुक्त रूप से स्पष्ट किया है कि यह केवल वकीलों की लड़ाई नहीं, बल्कि भीलवाड़ा की न्यायिक आत्मा और आमजन के अधिकारों की रक्षा का धर्मयुद्ध है।

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Pratahkal Newsroom

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