भीलवाड़ा: नए कोर्ट परिसर की आवंटित भूमि निरस्त करने की मांग, वकीलों ने सौंपा ज्ञापन
अधिवक्ता संघर्ष समिति का तर्क है कि प्रस्तावित स्थल शहर से दूर होने के कारण वकीलों और वादकारियों को परेशानी होगी, इसलिए वर्तमान परिसर के पास ही नया भवन बने।

भीलवाड़ा में मंगलवार को जिला न्यायालय परिसर अधिवक्ता संघर्ष समिति के पदाधिकारियों और वकीलों ने भाजपा जिलाध्यक्ष प्रशांत मेवाड़ा (दाहिनी ओर पत्र लेते हुए) से मुलाकात कर नए कोर्ट परिसर के लिए आवंटित दूरस्थ भूमि का आवंटन निरस्त करने की मांग को लेकर राज्य सरकार के नाम ज्ञापन सौंपा।
जिला न्यायालय परिसर अधिवक्ता संघर्ष समिति ने भीलवाड़ा में नवीन न्यायालय परिसर के निर्माण हेतु आवंटित की गई भूमि को तत्काल निरस्त करने तथा इस निर्णय पर पुनर्विचार करने की पुरजोर मांग उठाई है। इस गंभीर विषय को लेकर मंगलवार को संघर्ष समिति के पदाधिकारियों एवं बड़ी संख्या में उपस्थित अधिवक्ताओं ने भारतीय जनता पार्टी के जिलाध्यक्ष प्रशांत मेवाड़ा से मुलाकात की और उन्हें राज्य सरकार के नाम एक प्रशासनिक ज्ञापन सौंपा। अधिवक्ताओं ने चेतावनी दी है कि प्रस्तावित स्थल शहर की मुख्य आबादी से अत्यधिक दूर है, जिसके कारण भविष्य में अधिवक्ताओं, वादकारियों सहित संपूर्ण आमजन को अत्यंत गंभीर और भारी परेशानियों का सामना करने के लिए विवश होना पड़ेगा।
संघर्ष समिति के प्रतिनिधिमंडल ने भौगोलिक और व्यावहारिक परिस्थितियों को रेखांकित करते हुए स्पष्ट किया कि नवीन परिसर के लिए दूरस्थ स्थान का चयन सर्वथा अनुचित है। इसके विपरीत, वर्तमान न्यायालय परिसर के समीप ही पर्याप्त भूमि उपलब्ध है, जिसका सुनियोजित उपयोग करके एक भव्य, बहुमंजिला और आधुनिक न्यायालय भवन का निर्माण सुगमता से किया जा सकता है। अधिवक्ताओं के अनुसार, वर्तमान स्थल पर ही विस्तार करना अधिक सुविधाजनक, सुरक्षित और जनहित के दृष्टिकोण से पूर्णतः व्यावहारिक रहेगा। प्रदर्शनकारी वकीलों ने विशेष रूप से महिला अधिवक्ताओं की सुरक्षा और ग्रामीण क्षेत्रों से सुदूर सफर तय कर आने वाले पीड़ित वादकारियों को होने वाली आवागमन संबंधी विकट समस्याओं का प्रमुखता से उल्लेख किया।
न्यायिक समुदाय के इस व्यापक विरोध और जनभावनाओं को भाजपा जिलाध्यक्ष प्रशांत मेवाड़ा ने अत्यंत गंभीरता से सुना। अधिवक्ताओं को आश्वस्त करते हुए जिलाध्यक्ष मेवाड़ा ने कहा कि न्याय व्यवस्था से जुड़े सभी स्तंभों, अधिवक्ताओं एवं आम जनता की सुविधा और हितों का संरक्षण किया जाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने संघर्ष समिति को भरोसा दिलाया कि इस संवेदनशील मांग एवं व्यावहारिक सुझावों को राज्य सरकार और संबंधित उच्च विभागों तक बेहद प्रभावी रूप से पहुंचाया जाएगा ताकि इस दिशा में कोई सकारात्मक व न्यायसंगत पहल की जा सके। इस महत्वपूर्ण ज्ञापन प्रेषण के दौरान संघर्ष समिति के शीर्ष पदाधिकारी और भीलवाड़ा के भारी संख्या में सजग अधिवक्तागण मौजूद रहे, जिन्होंने इस आंदोलन को तार्किक परिणति तक ले जाने का संकल्प दोहराया है।

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