भीलवाड़ा। केंद्र सरकार द्वारा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) की मूल संरचना में किए गए हालिया बदलावों को लेकर सियासी पारा गरमा गया है। भीलवाड़ा जिले के देहात कांग्रेस मुख्यालय पर शनिवार, 10 जनवरी 2026 को आयोजित एक विशेष प्रेस वार्ता के दौरान कांग्रेस नेतृत्व ने केंद्र की भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला। जिला अध्यक्ष रामलाल जाट और जिला प्रभारी प्रशांत बैरवा ने संयुक्त रूप से मीडिया को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि मनरेगा में किए जा रहे बदलाव महज प्रशासनिक सुधार नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत की आर्थिक रीढ़ पर किया गया सीधा प्रहार है। कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि यदि इन जनविरोधी निर्णयों को वापस नहीं लिया गया, तो इस आंदोलन को जिले की हर ग्राम पंचायत और ढाणी-ढाणी तक ले जाया जाएगा।

प्रेस वार्ता के दौरान रामलाल जाट ने विस्तार से बताया कि जिस मनरेगा ने संप्रग (UPA) सरकार के दौरान ग्रामीण परिवारों को काम की कानूनी गारंटी प्रदान की थी, उसे अब सरकार की मर्जी पर निर्भर एक 'रेवड़ी' के समान बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पहले 15 दिनों के भीतर काम उपलब्ध कराना एक अनिवार्य कानूनी बाध्यता थी, लेकिन अब पंचायतों के नियोजन अधिकारों को छीनकर दिल्ली के हाथों में सौंपा जा रहा है। यह विकेंद्रीकरण की भावना के विरुद्ध है और इससे ग्रामीण क्षेत्रों में फिर से ठेकेदारी प्रथा को बढ़ावा मिलेगा। कांग्रेस नेताओं ने चिंता व्यक्त की कि राज्यों पर 40 प्रतिशत मजदूरी का भार डालने से वित्तीय संकट खड़ा होगा, जिससे अंततः गरीब मजदूरों को काम मिलना बंद हो जाएगा।

अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के निर्देशानुसार आयोजित इस कार्यक्रम में मनरेगा की ऐतिहासिक उपलब्धियों को भी रेखांकित किया गया। नेताओं ने याद दिलाया कि कोविड-19 जैसी वैश्विक महामारी के दौरान इसी योजना ने 4.6 करोड़ परिवारों को भुखमरी से बचाया था। वर्ष 2006 से अब तक 180 करोड़ कार्य-दिवस और 10 करोड़ ग्रामीण परिसंपत्तियों का निर्माण इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है। वर्तमान चुनौतियों का जिक्र करते हुए प्रशांत बैरवा ने कहा कि डिजिटल सत्यापन (NMMS) और आधार आधारित भुगतान की जटिलताओं के कारण लगभग 2 करोड़ मजदूर अपने संवैधानिक हक से वंचित हो गए हैं। कांग्रेस ने अब चार सूत्रीय मांगों को लेकर आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है, जिसमें न्यूनतम वेतन 400 रुपये सुनिश्चित करना और काम के संवैधानिक अधिकार की पूर्ण बहाली प्रमुख है।

इस महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता और विरोध प्रदर्शन के दौरान जिले के वरिष्ठ कांग्रेस पदाधिकारियों की उपस्थिति ने संगठन की एकजुटता को प्रदर्शित किया। कार्यक्रम में अक्षय त्रिपाठी, कैलाश व्यास, गायत्री त्रिवेदी, राजेंद्र त्रिवेदी, ओम नरानीवाल, दुर्गेश शर्मा, शंकर लाल गाडरी, महेश सोनी, मनीष मेवाडा, रणदीप त्रिवेदी, शंकर लाल कुमावत, विकास सुवालका, संदीप जिनगर, संपत गुर्जर और भंवर गर्ग सहित कई प्रमुख कार्यकर्ता मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में केंद्र सरकार के इन निर्णयों का विरोध किया और संकल्प लिया कि जब तक ग्रामीण मजदूरों के हक बहाल नहीं होते, कांग्रेस चैन से नहीं बैठेगी।

Pratahkal Bureau

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