भीलवाड़ा: मनरेगा के वजूद पर संकट के खिलाफ कांग्रेस का शंखनाद, 45 दिवसीय 'महासंग्राम' से केंद्र को घेरने की तैयारी
भीलवाड़ा में कांग्रेस ने केंद्र की नीतियों के खिलाफ 'मनरेगा बचाओ महासंग्राम' का शंखनाद किया है। 10 जनवरी से शुरू होने वाले 45 दिवसीय अभियान के जरिए जिला अध्यक्ष शिवराम खटीक और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मनरेगा कानून को बचाने और ग्रामीण रोजगार के अधिकार की रक्षा के लिए निर्णायक संघर्ष का संकल्प लिया है। जानिए क्या है पूरी योजना और कांग्रेस की रणनीति।

भीलवाड़ा। राजस्थान के वस्त्रनगरी भीलवाड़ा की धरती आज एक बड़े राजनीतिक और सामाजिक आंदोलन की गवाह बनी, जहां गरीब और मजदूर वर्ग के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए 'मनरेगा बचाओ महासंग्राम' का बिगुल फूंका गया। केंद्र की मोदी सरकार द्वारा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) जैसे लोक-कल्याणकारी कानून को कथित तौर पर कमजोर करने की कोशिशों के खिलाफ अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के आह्वान पर आज एक निर्णायक हुंकार भरी गई। राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के निर्देशों की पालना में भीलवाड़ा शहर जिला कांग्रेस कमेटी ने 10 जनवरी से 25 फरवरी तक चलने वाले इस 45 दिवसीय सघन अभियान की रूपरेखा तैयार कर ली है। शुक्रवार, 9 जनवरी 2026 को आयोजित इस जिला स्तरीय बैठक में कांग्रेस ने स्पष्ट कर दिया कि वह गरीबों के निवाले पर होने वाले किसी भी प्रहार को बर्दाश्त नहीं करेगी।
जिला अध्यक्ष शिवराम खटीक (जीपी) की अध्यक्षता में संपन्न हुई इस बैठक में केंद्र सरकार की नीतियों पर तीखे प्रहार किए गए। बैठक का मुख्य केंद्र बिंदु तथाकथित 'वी-बी-जी राम जी कानून' रहा, जिसे कांग्रेस ने ग्रामीण भारत की रीढ़ पर सीधा हमला करार दिया। शिवराम खटीक ने अपने संबोधन में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि मोदी सरकार वर्तमान में जनविरोधी नीतियों की फैक्ट्री बन चुकी है, जो पहले रोजगार छीनने के बाद अब रोजगार के कानूनी अधिकार को भी खत्म कर उसे 'भीख' में तब्दील करना चाहती है। उन्होंने चेतावनी दी कि मनरेगा केवल एक योजना नहीं बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा है और यदि इसे कमजोर किया गया तो करोड़ों परिवार भुखमरी और पलायन की आग में झोंक दिए जाएंगे।
कानूनी और संवैधानिक पक्ष रखते हुए एडवोकेट कुणाल ओझा ने स्पष्ट किया कि मनरेगा कोई खैरात नहीं बल्कि संसद द्वारा पारित एक अधिकार है, जिसकी रक्षा के लिए कांग्रेस सड़क से लेकर संसद तक संघर्ष करेगी। बैठक में रणनीतिक चर्चा के दौरान आगामी 45 दिनों के लिए आंदोलनात्मक कार्यक्रमों की एक विस्तृत श्रृंखला तैयार की गई, जिसमें जिले के हर गांव, वार्ड और गली तक पहुंचकर जनसंवाद, पदयात्रा, धरना और प्रदर्शन के माध्यम से केंद्र की नीतियों का पर्दाफाश किया जाएगा।
इस महत्वपूर्ण बैठक में वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं अक्षय त्रिपाठी, अनिल डांगी, संजय पेड़ीवाल, मोहम्मद याकूब, धर्मेंद्र पारीक, मनोज पालीवाल, राजेंद्र जैन, प्रकाश ओझा, राजकुमार माली, शिवप्रकाश घावरी, अनिता पहाड़िया और सीपी अमारवाल ने एकजुट होकर हुंकार भरी कि अब केवल बयानों का दौर समाप्त हो चुका है और निर्णायक लड़ाई मैदान में लड़ी जाएगी।
संगठन की एकजुटता और संघर्ष के इस संकल्प में उस्मान पठान, जय कुमार कोठारी, मोहम्मद वसीम, सुरेश बम्ब, हारून रंगरेज, सत्यवीर सिंह, विक्की ब्यावट, निसार सिलावट, नादिर पठान, जितेश चपलोत, मेवाराम खोईवाल, गोपाल खटिक, संदीप टेलर, धनराज सिंह, अशोक सोलंकी, गौरी शंकर दायमा, दीपक व्यास, पर्वत सिंह, दुर्गेश, लाजपत आचार्य, धनराज जाट, सोहन लाल रेगर, धर्मराज रेगर, नवरत्न जैन, वाशिम काजी, रफीक शेख, रोहित पोरवाल, सुनील मिश्रा, सुरेश चंद्र पारिक, युवराज, कुणाल गोरण, राकेश देसाई, खुर्शीद अहमद, साजिद छिपा, शिवराज सुराणा और सतीश सुखवाल सहित सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। सभा के अंत में यह दृढ़ संकल्प दोहराया गया कि जब तक मनरेगा सुरक्षित है तभी तक गरीब सुरक्षित है, और कांग्रेस इस अधिकार को बचाने के लिए अपने अंतिम दम तक डटी रहेगी।

