भीलवाड़ा: 77 लाख के गबन मामले में लिपिक देवेंद्र कुमार जोशी फिर बर्खास्त
राजस्थान उच्च न्यायालय के आदेश के बाद जिला प्रशासन ने लिपिक देवेंद्र कुमार जोशी को 77 लाख रुपये के गबन मामले में दोबारा बर्खास्त कर दिया है।

तस्वीर में दिख रहे लिपिक देवेंद्र कुमार जोशी को 77 लाख रुपये के गबन मामले में राजस्थान उच्च न्यायालय के आदेश पर जिला प्रशासन ने सेवा से पुनः बर्खास्त किया है।
भीलवाड़ा के न्यायिक गलियारों में उस समय हलचल मच गई जब 77 लाख रुपये के गबन मामले में दोषी पाए गए लिपिक देवेंद्र कुमार जोशी की बर्खास्तगी को जिला प्रशासन ने पुनः प्रभावी कर दिया। राजस्थान उच्च न्यायालय की डबल बेंच द्वारा पारित हालिया आदेशों की अनुपालना करते हुए, जिला एवं सेशन न्यायाधीश अभय जैन ने आरोपित कर्मचारी को तत्काल प्रभाव से पदमुक्त करने का कठोर निर्णय सुनाया है। यह कार्रवाई उस न्यायिक प्रक्रिया का अंतिम चरण मानी जा रही है, जिसने पिछले कई महीनों से कानूनी दांव-पेचों के बीच एक गंभीर मोड़ ले रखा था।
पूरे प्रकरण की शुरुआत जिला न्यायालय में फर्जी बिलों के माध्यम से हुए 77 लाख रुपये के बड़े वित्तीय घोटाले से हुई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए एक उच्च-स्तरीय जांच समिति का गठन किया गया, जिसकी रिपोर्ट में देवेंद्र कुमार जोशी को दोषी पाया गया। इस जांच के आधार पर, जिला न्यायाधीश अभय जैन ने 28 अगस्त 2025 को जोशी को सरकारी सेवा से बर्खास्त करने का कड़ा आदेश दिया था। हालाँकि, यह मामला तब कानूनी पेचीदगियों में उलझ गया जब आरोपित ने राजस्थान उच्च न्यायालय का रुख किया। 19 मई 2026 को हाईकोर्ट से बर्खास्तगी आदेश पर स्थगन मिलने के बाद, जोशी को सेवा में पुनः बहाल करते हुए रायपुर न्यायालय में पदस्थापित कर दिया गया था।
न्यायिक प्रक्रिया में नया मोड़ तब आया जब राजस्थान उच्च न्यायालय की डबल बेंच ने इस मामले में दखल दिया। डी.बी. स्पेशल अपील रिट संख्या 699/2026 के अंतर्गत 05 जून 2026 को जारी आदेश में अदालत ने पूर्व में मिले स्थगन आदेश की क्रियान्विति पर रोक लगा दी। उच्च न्यायालय के इस सख्त रुख के बाद जिला एवं सेशन न्यायालय प्रशासन ने तुरंत प्रभाव से सक्रियता दिखाई और जोशी की बर्खास्तगी को पुनः बहाल कर दिया।
इस घटनाक्रम ने प्रशासनिक हलकों में एक कड़ा संदेश दिया है कि सरकारी कोष के साथ गबन जैसे मामलों में कानूनी संरक्षण की गुंजाइश सीमित है। देवेंद्र कुमार जोशी की दोबारा बर्खास्तगी न केवल न्यायिक शुचिता को बनाए रखने की एक मिसाल है, बल्कि यह उन भ्रष्ट गतिविधियों के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति को भी पुष्ट करती है जो न्यायपालिका जैसे पवित्र संस्थान की साख को प्रभावित करती हैं। फिलहाल, न्यायालय के इस निर्णय के बाद संबंधित लिपिक को तत्काल प्रभाव से अपने पद से मुक्त कर दिया गया है।

Rajesh Toshniwal, Bhilwara
नाम: राजेश तोषनीवाल
वर्तमान पद: ब्यूरो चीफ (भीलवाड़ा)
कार्यक्षेत्र: भीलवाड़ा (राजस्थान)
बीट (मुख्य विषय): राजनीति, क्राइम, प्रशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य और बिज़नेस
परिचय
राजेश तोषनीवाल राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के वरिष्ठ पत्रकार और ब्यूरो चीफ हैं। वह राजनीति, अपराध (क्राइम), स्थानीय प्रशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक गतिविधियों (बिज़नेस) सहित सभी मुख्य विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग करते हैं। मौके पर पहुंचकर सक्रियता से ग्राउंड रिपोर्टिंग करना उनकी मुख्य विशेषता है।
पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)
राजेश तोषनीवाल को पत्रकारिता के क्षेत्र में कुल 44 वर्षों का व्यापक अनुभव है।
- वह पिछले 35 वर्षों से अधिक समय से 'प्रातःकाल' समाचार पत्र से निरंतर जुड़े हुए हैं।
- इससे पूर्व उन्होंने 'दैनिक जागरण', 'नवभारत टाइम्स' सहित कई अन्य लोकल एवं राज्यस्तरीय मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं।
शैक्षणिक योग्यता (Education)
- स्नातक (Graduate)
- डिप्लोमा इन जर्नलिज्म (Diploma in Journalism)
