भीलवाड़ा जिले के हमीरगढ़ क्षेत्र के सरकारी अस्पताल में उस समय एक गंभीर चिकित्सकीय स्थिति उत्पन्न हो गई जब एक 3 वर्षीय बच्ची ने खेल-खेल में हाथ की घड़ी का छोटा बटन सेल अपनी नाक में डाल लिया। घटना नंदलाल प्रजापत की पुत्री माया प्रजापत के साथ हुई, जिसके बाद बच्ची को सांस लेने में तकलीफ और बेचैनी महसूस होने लगी।

परिजन तुरंत बच्ची को लेकर हमीरगढ़ के सरकारी अस्पताल पहुंचे, जहां स्थिति की गंभीरता को देखते हुए ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. मुकेश कुमावत ने तत्काल उपचार शुरू किया। चिकित्सकों के अनुसार, नाक में फंसा बटन सेल अत्यंत जोखिमपूर्ण था, क्योंकि इसके रासायनिक तत्व नाक के अंदरूनी ऊतकों को गंभीर क्षति पहुंचा सकते थे।

डॉ. कुमावत ने बिना समय गंवाए आधुनिक दूरबीन (एंडोस्कोपी) तकनीक का उपयोग करते हुए अत्यंत सावधानीपूर्वक नाक में फंसे सेल को सफलतापूर्वक बाहर निकाल दिया। पूरी प्रक्रिया के दौरान किसी प्रकार की जटिलता नहीं आई और बच्ची को सुरक्षित बचा लिया गया।

इलाज के बाद बच्ची की स्थिति सामान्य और पूरी तरह स्थिर बताई गई है। इस सफल चिकित्सकीय प्रयास के बाद परिजनों ने डॉ. मुकेश कुमावत और अस्पताल स्टाफ के प्रति आभार व्यक्त किया।

डॉक्टर ने परिजनों से अपील की कि छोटे बच्चों की पहुंच से दूर छोटी वस्तुएं जैसे बटन बैटरी, सिक्के, मोती और छोटे खिलौने रखें, क्योंकि ऐसी लापरवाही गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर सकती है। यह घटना समय पर चिकित्सा सहायता और आधुनिक तकनीक के महत्व को भी उजागर करती है।

Pratahkal Bureau

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