भीलवाड़ा: नया खेड़ा में चार साल की मासूम बच्ची का शव कुएं में मिला
पांच महीने पहले इसी कुएं में सगे भाई की मौत हुई थी, परिजनों ने हत्या की आशंका जताते हुए पुलिस से निष्पक्ष जांच की मांग की है।

भीलवाड़ा। राजस्थान के भीलवाड़ा जिले से एक ऐसी रूह कंपा देने वाली हृदयविदारक खबर सामने आई है, जिसने मानवीय संवेदनाओं को झकझोर कर रख दिया है। रायला थाना क्षेत्र के नया खेड़ा गांव में रविवार को एक 4 साल की मासूम बच्ची 'दिया' का शव उसी मनहूस कुएं में बरामद हुआ, जिसने महज कुछ महीने पहले उसके सगे भाई को मौत की नींद सुला दिया था। एक ही परिवार के दो चिरागों का एक ही कुएं में बुझ जाना क्या महज इत्तेफाक है या इसके पीछे कोई गहरी साजिश छिपी है? इस अनुत्तरित सवाल ने वर्तमान में पूरे गांव में दहशत और भारी आक्रोश पैदा कर दिया है।
घटना के समय बदकिस्मत पिता कैलाश खारोल अपनी पत्नी का ऑपरेशन कराने के लिए भीलवाड़ा के एक अस्पताल में मौजूद थे। घर पर 4 साल की मासूम दिया अपनी दादी के पास थी, जो घर के बाहर खेलते-खेलते अचानक ओझल हो गई। काफी देर तक बच्ची के नजर न आने पर परिजनों के हाथ-पांव फूल गए और तुरंत पुलिस को सूचना दी गई। इसके पश्चात ग्रामीणों और पुलिस ने मिलकर सघन सर्च ऑपरेशन शुरू किया। तलाशी के दौरान घर से करीब 400 मीटर दूर खेतों के बीच स्थित एक बिना मुंडेर के कुएं में दिया का बेजान शरीर तैरता मिला। उल्लेखनीय है कि यह कुआं दिया के चाचा ने हिस्से (साझे) पर ले रखा था। जैसे ही मासूम का शव कुएं से बाहर निकाला गया, परिजनों के करुण क्रंदन से पूरा इलाका दहल उठा।
यह मामला महज साधारण हादसा प्रतीत नहीं हो रहा है, क्योंकि ठीक 5 महीने पूर्व कैलाश के 6 वर्षीय बेटे देवराज की मौत भी इसी कुएं में गिरने से हुई थी। एक ही कुएं में एक के बाद एक दो बच्चों की बलि ने ग्रामीणों को गंभीर चिंतन और संदेह पर मजबूर कर दिया है। ग्रामीणों का प्रश्न है कि क्या बच्चों का वहां तक अकेले जाना मुमकिन था या किसी ने जानबूझकर उन्हें मौत के मुंह में धकेला है? आक्रोशित ग्रामीणों का कहना है कि दो मासूमों की जान जाना कोई सामान्य बात नहीं है, अतः पुलिस को हर एंगल से जांच कर न्याय सुनिश्चित करना चाहिए।
मामले की गंभीरता को देखते हुए रायला थाना अधिकारी मूलचंद वर्मा ने बताया कि शव का मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम करवाकर परिजनों को सौंप दिया गया है। परिजनों द्वारा घटना को संदिग्ध बताए जाने पर पुलिस अब गहनता से तकनीकी और पारिस्थिकीय साक्ष्यों के आधार पर जांच कर रही है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि क्या यह वाकई एक दुखद हादसा है या इसके पीछे कोई पुरानी रंजिश अथवा सोची-समझी साजिश है। बिना मुंडेर का यह कुआं अब गांव के लिए खौफ का प्रतीक बन चुका है।

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