भीलवाड़ा। राजस्थान के ग्रामीण अंचलों में गहरे तक जड़ जमा चुका अंधविश्वास आज भी मासूम जिंदगियों के लिए काल साबित हो रहा है। ऐसा ही एक रूह कंपा देने वाला और दर्दनाक मामला भीलवाड़ा जिले से सामने आया है, जहां एक साल की मासूम बच्ची को निमोनिया होने पर परिजनों ने झांसे में आकर अमानवीयता की सारी हदें पार कर दीं। अंधविश्वास के चक्कर में उलझे परिजनों ने उपचार के नाम पर बच्ची को 'डाम' लगा दिया, यानी उसे सुलगते हुए गर्म लोहे से दाग दिया। इस खौफनाक और गलत उपचार के कारण बच्ची की तबीयत सुधरने के बजाय बेहद बिगड़ गई, जिसके बाद उसे अत्यंत गंभीर स्थिति में भीलवाड़ा के मुख्य चिकित्सालय के चिल्ड्रेन वार्ड में भर्ती कराया गया है।

इस संवेदनशील मामले की आधिकारिक पुष्टि और जानकारी देते हुए मुख्य चिकित्सालय के पीएमओ डॉ. अरुण गौड़ ने बताया कि जिले के शाहपुरा कस्बे की रहने वाली एक साल की मासूम बच्ची को अस्पताल के चिल्ड्रेन वार्ड में दाखिल कराया गया है। उन्होंने बताया कि बच्ची को बुनियादी तौर पर निमोनिया की शिकायत थी, लेकिन परिजनों या किसी अन्य व्यक्ति ने इसका पारंपरिक इलाज मानकर ग्रामीण क्षेत्रों में बदस्तूर जारी कुप्रथा के तहत उसे 'डाम' लगा दिया। इस बर्बरता के कारण मासूम बच्ची की शारीरिक स्थिति और ज्यादा खराब हो गई है। फिलहाल पीड़िता को चिल्ड्रेन वार्ड में रखा गया है, जहां पीडियाट्रिशियन (शिशु रोग विशेषज्ञ) लगातार उसकी निगरानी कर रहे हैं और उसका सघन उपचार जारी है।

ग्रामीण अंचलों में फैली इस तरह की जानलेवा कुप्रथाओं पर गहरी चिंता और आक्रोश व्यक्त करते हुए पीएमओ डॉ. अरुण गौड़ ने समाज को एक कड़ा और स्पष्ट संदेश दिया है। डॉ. गौड़ ने प्रशासनिक और सामाजिक स्तर पर कमियों को रेखांकित करते हुए कहा कि जब तक जमीनी स्तर पर लोगों को इस सामाजिक बुराई के प्रति जागरूक और शिक्षित नहीं किया जाएगा, तब तक ऐसी रीढ़ विहीन घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाना बेहद मुश्किल है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए उन्होंने एक महत्वपूर्ण सुझाव दिया कि प्रशासन को तत्काल ऐसे संवेदनशील क्षेत्रों को चिन्हित करना चाहिए, जहां से इस तरह के अंधविश्वास और डाम प्रथा के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि इन चिन्हित इलाकों में स्वयंसेवी संस्थाओं, एएनएम (ANM) और महिला एवं बाल विकास विभाग के संयुक्त सहयोग से एक विशेष और सघन जागरूकता अभियान चलाया जाना चाहिए। ऐसा करने से ही आमजन को अंधविश्वास के इन घातक एवं जानलेवा परिणामों के प्रति सचेत किया जा सकेगा, जिससे भविष्य में किसी और मासूम को अपनी जान जोखिम में न डालनी पड़े।

Pratahkal Newsroom

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