भीलवाड़ा में 22 अक्टूबर को संपन्न होगा चातुर्मास, 15 को शोभायात्रा
अंतरराष्ट्रीय रामस्नेही संप्रदाय के पीठाधीश्वर आचार्य रामदयालजी महाराज ने कहा कि चातुर्मास का समापन 22 अक्टूबर को होगा, जबकि 15 को पंचमी गोटकाजी की शोभायात्रा निकलेगी।

भीलवाड़ा के माणिक्यनगर रामद्वारा धाम में अंतरराष्ट्रीय रामस्नेही संप्रदाय के पीठाधीश्वर आचार्य स्वामी श्रीरामदयालजी महाराज.
भीलवाड़ा में विश्व शांति कल्याण चातुर्मास के समापन की आहट के साथ श्रद्धालुओं के मन में आचार्य रामदयालजी महाराज के वियोग का भाव गहराने लगा है। माणिक्यनगर रामद्वारा धाम से आसोज शुक्ला पंचमी के अवसर पर 15 अक्टूबर को पंचमी गोटकाजी की शोभायात्रा निकाली जाएगी। यह शोभायात्रा चातुर्मास के समापन की ओर बढ़ने का संकेत होगी। चातुर्मास 22 अक्टूबर को संपन्न होगा, लेकिन भक्तों ने आचार्य श्री रामदयालजी महाराज से दीपावली तक भीलवाड़ा में प्रवास कर आशीर्वाद प्रदान करने की भावपूर्ण अर्जी लगाई है।
अंतरराष्ट्रीय रामस्नेही संप्रदाय शाहपुरा के पीठाधीश्वर जगद्गुरु आचार्य स्वामी श्रीरामदयालजी महाराज ने रविवार को दैनिक सत्संग में कहा कि समय का चक्र निरंतर चलता रहता है। चातुर्मास कब प्रारंभ होकर समापन के क्षणों तक पहुंच जाता है, इसका अहसास भी नहीं होता। प्रसन्नता के पल कब बीत जाते हैं, पता नहीं चलता, लेकिन वियोग के क्षण हृदय को पीड़ा देते हैं। ऐसे ही वियोग का अहसास 15 अक्टूबर को पंचमी गोटकाजी की शोभायात्रा के साथ होगा, जो चातुर्मास के समापन की सूचना देगी।
सत्संग में आचार्यश्री ने कहा कि महाप्रभु स्वामी रामचरणजी महाराज की इच्छा से पांच बार भीलवाड़ा में चातुर्मास का योग बना है। अगला चातुर्मास कहां होगा, यह कोई नहीं जानता। इस संबंध में चर्चा करने वाले लोग मिथ्या बात कर रहे हैं। रंग पंचमी के अभिजीत मुहूर्त पर स्वामी रामचरण महाराज से मिलने वाली प्रेरणा के आधार पर ही चातुर्मास तय होता है।
आचार्यश्री ने चातुर्मास की सार्थकता को जीवन में आने वाले बदलाव से जोड़ते हुए कहा कि चातुर्मास के दौरान धर्म की जो बातें सुनी जाती हैं, उन्हें अपने जीवन में आत्मसात करना जरूरी है। चातुर्मास हमारे जीवन में बदलाव का माध्यम बने और धर्म के प्रति जुड़ाव मजबूत करे। यदि चातुर्मास समाप्त होने के बाद भी जीवन में कोई बदलाव दिखाई नहीं देता, तो समझना चाहिए कि सुनी गई बातों को आत्मसात नहीं किया जा सका।
उन्होंने भीलवाड़ा चातुर्मास को सफल बनाने में आस्था प्रदर्शित करने वाले सभी भक्तों की सराहना करते हुए उन्हें साधुवाद का पात्र बताया। चातुर्मास के तीन आयोजक भामाशाह अजमेरा परिवार, गगरानी परिवार और ईनाणी परिवार की सेवा एवं भक्ति भावना की भी सराहना की। आचार्यश्री ने कहा कि चातुर्मास संपत्ति देखकर नहीं, बल्कि शुभ भक्ति भावों को देखकर होता है। जहां समर्पित भाव से श्रद्धा और भक्ति होती है, वहीं चातुर्मास प्राप्त होता है।
आचार्य रामदयालजी महाराज ने कहा कि संत का कार्य सत्संग के माध्यम से भक्तों तक धर्म की बात पहुंचाना है। संत की बातों को अपने जीवन में कितना ग्रहण करना है, यह भक्त पर निर्भर करता है। जो व्यक्ति संत की बात को अंगीकार कर लेता है, उसका जीवन पतित-पावन हो जाता है।
आचार्यश्री से पूर्व अंतरराष्ट्रीय रामस्नेही संप्रदाय के प्रखर वक्ता संत मनोरथरामजी आलोट ने मानस प्रवचन दिया। प्रवचन के विश्राम पर श्रद्धालुओं ने आचार्यश्री रामदयालजी महाराज की आरती की। सत्संग में भीलवाड़ा सहित विभिन्न स्थानों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
रामद्वारा धाम में प्रतिदिन सुबह 8.30 से 9 बजे तक रामधुनी के साथ वाणीजी का पाठ हो रहा है। दैनिक सत्संग सुबह 9 बजे से आयोजित किया जा रहा है। सूर्यास्त के समय संध्या आरती होती है। रामस्नेही संप्रदाय के युवा संत रामजस ईडर द्वारा भक्तमाल की कथा में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। 15 अक्टूबर को निकलने वाली पंचमी गोटकाजी की शोभायात्रा और 22 अक्टूबर को होने वाला चातुर्मास का समापन इस धार्मिक आयोजन के प्रमुख पड़ाव होंगे।

Anshul Toshniwal, Bhilwara
नाम: अंशुल तोषनीवाल
वर्तमान पद: रिपोर्टर
कार्यक्षेत्र: भीलवाड़ा जिला (राजस्थान)
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परिचय
अंशुल तोषनीवाल भीलवाड़ा जिले से न्यूज़ वेबसाइट के लिए रिपोर्टर के रूप में कार्यरत हैं। वह भीलवाड़ा जिले और उसके अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों की स्थानीय घटनाओं, प्रशासनिक गतिविधियों, क्राइम, राजनीति और जनहित से जुड़ी सभी प्रकार की खबरों को नियमित रूप से कवर करते हैं।
शैक्षणिक योग्यता (Education)
अंशुल तोषनीवाल शैक्षणिक रूप से इंजीनियर (Engineer) हैं। उनकी तकनीकी और विश्लेषणात्मक पृष्ठभूमि उन्हें खबरों को सटीकता से समझने और प्रस्तुत करने में मदद करती है।
