भीलवाड़ा चारभुजा मंदिर पाटोत्सव: 12 जून से शुरू होगी भागवत कलश शोभा यात्रा
पुरुषोत्तम मास में संजय कॉलोनी चारभुजा मंदिर के 26वें पाटोत्सव के तहत आठ दिवसीय महोत्सव, हवन और छप्पन भोग का होगा भव्य आयोजन।

पुरुषोत्तम मास के पावन अवसर पर भीलवाड़ा के संजय कॉलोनी महेश मार्ग स्थित चारभुजा मंदिर में आठ दिवसीय 26वें पाटोत्सव महोत्सव को लेकर धार्मिक उत्साह का माहौल है और इसकी भव्य तैयारियां धूमधाम से की जा रही हैं। श्री चारभुजा सेवा समिति एवं महिला मंडल के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित हो रहे इस पावन आयोजन के अंतर्गत विभिन्न धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की गई है, जिसे लेकर श्रद्धालुओं में अपूर्व उत्साह एवं भक्ति भावना अपने चरम पर है।
श्री चारभुजा सेवा समिति के अध्यक्ष जगदीश चन्द्र देवपुरा ने आयोजन की आधिकारिक जानकारी देते हुए बताया कि आगामी 12 जून 2026 (शनिवार) को प्रातः 7:30 बजे भव्य भागवत कलश शोभा यात्रा के साथ इस 26वें पाटोत्सव का गरिमामय शुभारंभ होगा। यह विशाल शोभा यात्रा चारभुजा मंदिर से विधि-विधान पूर्वक शुरू होकर महेश मार्ग होते हुए नेहरू रोड की ओर प्रस्थान करेगी, जिसके बाद कॉलोनी के विभिन्न प्रमुख मार्गों से गुजरती हुई निर्धारित कथा स्थल पर पहुंचेगी। इस पाटोत्सव यात्रा में पारंपरिक बैंड-बाजों, ढोल-नगाड़ों की थाप पर नाचते-गाते और भगवान के गगनभेदी जयकारे लगाते श्रद्धालुओं के सैलाब से पूरा क्षेत्र किसी बड़े ऐतिहासिक उत्सव के नजारे में तब्दील हो जाएगा।
इस भव्य कलश शोभा यात्रा के दौरान कई विशेष और मुख्य आकर्षण श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करेंगे। आयोजन को एकरूपता देने के लिए विशेष ड्रेस कोड निर्धारित किया गया है, जिसके तहत पुरुष श्वेत वस्त्र धारण कर और महिलाएँ पारंपरिक लाल चुंदड़ी की पोशाक पहनकर यात्रा में सम्मिलित होंगी। महोत्सव में जैसे ही महाराज श्री का पदार्पण होगा, वैसे ही उपस्थित श्रद्धालुओं द्वारा पलक-पावड़े बिछाकर उनकी भव्य अगवानी एवं अभूतपूर्व स्वागत किया जाएगा। वृन्दावन आश्रम के प्रवक्ता एवं देश के क्रान्तिकारी विचारक आचार्य श्री शक्ति देव जी महाराज विशेष रूप से सुसज्जित बग्गी में सवार होकर इस कलश यात्रा की शोभा बढ़ाएंगे एवं मार्ग में भक्त जनों का उत्साहवर्धन करेंगे। इस धार्मिक यात्रा के लिए मुख्य कलश सहित कुल 31 कलशों की विशेष व्यवस्था समिति द्वारा स्वयं की गई है। इसके साथ ही, यात्रा प्रारंभ होने के समय मंदिर के मुख्य द्वार पर भदादा परिवार द्वारा सभी श्रद्धालुओं के लिए सुंदर एवं शीतल पेय की नि:शुल्क व्यवस्था की गई है।
इस आठ दिवसीय पाटोत्सव की विस्तृत रूपरेखा के अनुसार, 12 जून से 18 जून 2026 तक प्रतिदिन भागवत कथा के प्रारम्भ में आमंत्रित मुख्य अतिथियों द्वारा भगवान की विधि-विधान से महाआरती की जाएगी, जबकि कथा की समाप्ति पर प्रतिदिन सायंकाल व्यापक स्तर पर महाप्रसाद का वितरण संपन्न होगा। पाटोत्सव के अंतर्गत आध्यात्मिक शुद्धि के लिए प्रतिदिन प्रातः 8:00 बजे से 9:15 बजे तक यज्ञ-हवन का आयोजन भी सुनिश्चित किया गया है, जिसमें आहुति देने के लिए अभी तक क्षेत्र के 25 जोड़ों ने हवन में बैठने हेतु अपनी लिखित एवं मौखिक सहमति सहर्ष प्रदान कर दी है। इसके अतिरिक्त, महोत्सव के दौरान महाराज श्री की व्यक्तिगत सेवा करने एवं अपने निवास पर पदरावणी (भोजन कराने) का पावन लाभ लेने हेतु भी स्थानीय श्रद्धालुओं में अपूर्व और अप्रत्याशित उत्साह बना हुआ है। इस पूरे आयोजन के भव्य समापन के रूप में आगामी 19 जून 2026 को भगवान के सम्मुख छप्पन भोग प्रसादी का एक अत्यंत भव्य एवं विशाल आयोजन किया जाएगा, जिसमें हजारों भक्तों के शामिल होने की संभावना है।
महोत्सव के सफल संचालन और इसकी व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने के संबंध में समिति के सचिव अरविंद जैन ने बताया कि इस पूरे आयोजन को सुचारू, सुरक्षित और सफल बनाने के लिए विभिन्न प्रकार की प्रशासनिक व कार्यकारी कमेटियों का गठन किया गया है। इन कमेटियों में समाज और संगठन के प्रमुख व्यक्तियों को शामिल करते हुए योगेश लढा, अनिल खारीवाल, विनोद अजमेरा, दिनेश कोगटा, राजेश भदादा, श्याम मंत्री, मदन गट्टानी, दिनेश शारदा, कुशल बोल्या, लोकेश टांक, पदम पाराशर, अजीत झामड़, रमेश वर्मा, रघु तोषनीवाल, सुनील डाड, ओम खंडेलवाल, नाथू लाल शर्मा, कैलाश पोखरा, शांति लाल बाबेल, राज कुमार सोमानी, सत्य नारायण चोखड़ा, सतीश गोड़, सोहन लाल लढा, पारस मल कूकड़ा, लादू लाल पारीक, महेश लढा, रतन खारीवाल, अनिल गोखरू, राजेश अजमेरा, विद्याधर व्यास, दिनेश डांगी, दिलीप पाराशर, सुनील काबरा, अरविन्द पाराशर, राम नारायण बांगड, लादू लाल स्वर्णकार, बंशी लाल लाड, शांति लाल माली, जानकी वल्लभ न्याति तथा राकेश कूकड़ा को अलग-अलग महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। यह पाटोत्सव भीलवाड़ा के स्थानीय श्रद्धालुओं एवं दूर-दराज से आने वाले भक्तों के लिए एक मील का पत्थर और बड़ा धार्मिक उत्सव साबित होने जा रहा है, जिसमें श्रद्धा, अटूट भक्ति, निस्वार्थ सेवा, पूर्ण समर्पण और सामूहिक सामाजिक उत्साह का एक सुंदर एवं अलौकिक संगम देखने को मिलेगा। इस महोत्सव के दौरान क्षेत्र में अनेक अन्य सांस्कृतिक, संगीतबद्ध एवं आध्यात्मिक आयोजन भी समानांतर रूप से किए जाएंगे, जो भीलवाड़ा को धर्ममय बनाएंगे।

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