भीलवाड़ा रिश्वत मामला: एएसआई कालूराम कहार को 4 साल की जेल, एसीबी कोर्ट ने सुनाई सजा
भीलवाड़ा की एसीबी कोर्ट ने वर्ष 2014 के रिश्वत मामले में तत्कालीन एएसआई कालूराम कहार को दोषी ठहराते हुए 4 साल के कठोर कारावास और 15,000 रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई। जानिए कैसे एसीबी ने जाल बिछाकर आरोपी को रंगे हाथों पकड़ा और किन साक्ष्यों के आधार पर कोर्ट ने फैसला दिया।

भीलवाड़ा की विशेष अदालत ने वर्ष 2014 के चर्चित रिश्वत मामले में तत्कालीन सहायक उप निरीक्षक (एएसआई) कालूराम कहार को दोषी करार देते हुए 4 साल के कठोर कारावास और 15,000 रुपये के अर्थदंड (जुर्माने) की सजा सुनाई है। भ्रष्टाचार मामलों के विशिष्ट न्यायाधीश पवन कुमार सिंघल ने यह फैसला सुनाया। मामले में सरकार की ओर से विशिष्ट लोक अभियोजक कृष्णकांत शर्मा ने प्रभावी पैरवी करते हुए गवाहों और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर आरोपी का अपराध सिद्ध कराया।
मामला वर्ष 2014 का है, जब परिवादी रमेश चन्द्र मीणा और उनके चचेरे भाई फोरू लाल मीणा, निवासी ग्राम गोगा का खेड़ा, जहाजपुर ने भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी), भीलवाड़ा में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के अनुसार, उनकी साझीदारी की जमीन पर पड़ोसी द्वारा जबरन कब्जा करने के प्रयास को लेकर पुलिस थाना जहाजपुर में प्रकरण संख्या 212/14 दर्ज था।
आरोप था कि इस मुकदमे में त्वरित कार्रवाई करने और न्यायालय में जल्द चालान पेश करने की एवज में जांच अधिकारी एएसआई कालूराम कहार ने परिवादी से 3,000 रुपये की रिश्वत मांगी थी। शिकायत के अनुसार, आरोपी पहले ही 1,000 रुपये ले चुका था और शेष 2,000 रुपये के साथ एक मुर्गा देने का भी दबाव बना रहा था। रिश्वत नहीं देना चाहने पर परिवादी ने एसीबी से संपर्क किया।
तत्कालीन अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक राजेश कुमार गुप्ता के निर्देशन में एसीबी ने शिकायत का सत्यापन कराया। सत्यापन के दौरान भी आरोपी ने परिवादी से 500 रुपये और ले लिए थे।
इसके बाद 25 जुलाई 2014 को एसीबी ने जाल बिछाया। परिवादी रमेश चन्द्र मीणा जब शेष रिश्वत के 1,000 रुपये लेकर जहाजपुर थाना पहुंचे, तब उन्होंने आरोपी एएसआई कालूराम कहार को राशि सौंप दी। आरोपी ने रिश्वत की रकम अपनी टेबल की दूसरी दराज में रख दी।
इसी दौरान एसीबी टीम ने मौके पर दबिश देकर आरोपी को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। तलाशी के दौरान दराज से रिश्वत की राशि बरामद की गई। आरोपी के हाथों और दराज की धुलाई कराने पर केमिकल का रंग हल्का गुलाबी हो गया, जिसे रिश्वत लेने का वैज्ञानिक साक्ष्य माना गया।
मामले में एसीबी ने विस्तृत अनुसंधान के बाद न्यायालय में चालान पेश किया। सुनवाई के दौरान प्रस्तुत गवाहों और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर विशिष्ट न्यायालय (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) के न्यायाधीश पवन कुमार सिंघल ने आरोपी कालूराम कहार को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं के तहत दोषी ठहराया और उसे 4 वर्ष के कठोर कारावास के साथ 15,000 रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। यह फैसला एक दशक पुराने रिश्वत मामले में न्यायिक प्रक्रिया के महत्वपूर्ण निष्कर्ष के रूप में सामने आया।

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