भीलवाड़ा। सेवा और परोपकार की भावना को चरितार्थ करते हुए भीलवाड़ा की भारत विकास परिषद 'वीर शिवाजी' शाखा ने एक असाधारण उपलब्धि हासिल की है। समाज में नेत्रदान के प्रति जागरूकता फैलाने के अपने निरंतर प्रयासों के परिणामस्वरूप, शाखा ने मात्र तीन माह के अंतराल में 10वां नेत्रदान सफलतापूर्वक संपन्न कराया है। यह पुण्य कार्य स्वर्गीय श्रीमती सरजू देवी जागेटिया के निधन उपरांत उनके परिजनों की संवेदनशीलता और समाज के प्रति उनके समर्पण का प्रतीक बना है।

स्वर्गीय श्रीमती सरजू देवी जागेटिया, जो स्व. श्री रामजस जी जागेटिया की धर्मपत्नी थीं, के निधन के बाद उनके परिवार ने दुख की इस घड़ी में भी एक बड़ा निर्णय लिया। परिजनों की सहमति मिलते ही लायंस हॉस्पिटल की टीम के राकेश पगारिया और नेत्र चिकित्सा सहायक चेतन भट्ट ने तत्परता दिखाते हुए नेत्रदान की प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूर्ण किया। इस पुनीत कार्य से दो नेत्रहीनों के जीवन में पुनः प्रकाश आने की संभावना प्रबल हो गई है।

शाखा अध्यक्ष कमलेश बोड़ाना ने इस उपलब्धि पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह नेत्रदान सह-सचिव हरीश अग्रवाल के विशेष समन्वय और प्रयासों का परिणाम है। शाखा द्वारा निरंतर चलाए जा रहे नेत्रदान जागरूकता अभियान का ही प्रभाव है कि लोग स्वेच्छा से इस महादान के लिए आगे आ रहे हैं। इस अभियान के तहत श्रीमती पायल अग्रवाल और श्रीमती खुशबू अग्रवाल द्वारा श्री रमन अग्रवाल के मार्गदर्शन में तैयार किए गए जनजागरण संदेशों को समाज के हर वर्ग तक पहुंचाया जा रहा है, जो नेत्रदान के प्रति भ्रांतियों को दूर करने में सहायक सिद्ध हो रहे हैं।

इस अवसर पर प्रांतीय प्रभारी महेश जाजू, संस्थापक अध्यक्ष सुमित जागेटिया, अमित पटवारी, राजेश अग्रवाल, ओमप्रकाश जागेटिया, मुकेश चेचनी और नगर परिषद की पूर्व सभापति श्रीमती मंजू चेचनी सहित अनेक गणमान्य नागरिक और जागेटिया परिवार के सदस्य उपस्थित रहे। स्वर्गीय श्रीमती सरजू देवी अपने पीछे पुत्रों अशोक, गिरिराज, श्रवण, महेश, बनवारी और रामकिशोर तथा पुत्रियों कैलाश, मंजू एवं कौशल्या सहित एक भरा-पूरा परिवार छोड़ गई हैं।

अध्यक्ष कमलेश बोड़ाना ने स्पष्ट किया कि वीर शिवाजी शाखा का यह जनजागरण अभियान भविष्य में भी इसी गति से जारी रहेगा। नेत्रदान जैसे महादान को जन-आंदोलन का रूप देकर अधिक से अधिक लोगों को प्रेरित करना ही शाखा का मुख्य ध्येय है। श्रीमती सरजू देवी जागेटिया द्वारा दिया गया यह मरणोपरांत उपहार न केवल उनके परिवार के लिए गौरव का क्षण है, बल्कि संपूर्ण समाज के लिए मानवता और करुणा का एक जीवंत उदाहरण भी है।

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