हरिशेवा उदासीन आश्रम में पांच दिवसीय अनुष्ठान का समापन, जून में श्रीमद्भागवत और श्री शिव महापुराण कथा का होगा भव्य आयोजन।

सनातन धर्म की पावन धरा भीलवाड़ा में अध्यात्म और सेवा की त्रिवेणी प्रवाहित हो रही है। सनातन सेवा समिति, हरिशेवा उदासीन आश्रम सनातन मंदिर एवं महामंडलेश्वर स्वामी हंसराम जी उदासीन महाराज के पावन सानिध्य में पुरुषोत्तम मास के अंतर्गत आयोजित विराट धार्मिक अनुष्ठान के क्रम में श्री भक्तमाल कथा के पांचवें एवं अंतिम दिवस का भावपूर्ण समापन हुआ। ज्योतिर्मठ अवान्तर भानपुरा पीठ, मध्यप्रदेश के जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी ज्ञानानंद जी तीर्थ महाराज के श्रीमुख से श्रद्धा की रसधार बही, जिसने उपस्थित जनमेदिनी को सराबोर कर दिया। जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी ज्ञानानंद जी तीर्थ महाराज ने व्यासपीठ से दिव्य उद्घोष करते हुए कहा कि प्राणी की पूजा ही परमात्मा की पूजा है, संत महापुरुष सदैव समाज को धर्म, भक्ति, सेवा और सदाचार का अमर मार्ग दिखाते हैं।

जगद्गुरु स्वामी ज्ञानानंद जी तीर्थ महाराज ने श्रीभक्तमाल के प्रख्यात टीकाकार श्री प्रियादास जी द्वारा वर्णित भगवान शिव की भगवत निष्ठा के अलौकिक प्रसंग का सविस्तार रसपान कराया। उन्होंने श्रोताओं को भावविभोर करते हुए बताया कि भगवान शिव स्वयं देवाधिदेव होकर भी मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के परम भक्त हैं। माता सती द्वारा श्रीराम की परीक्षा लेने के गूढ़ प्रसंग की व्याख्या करते हुए उन्होंने दृढ़तापूर्वक कहा कि ईश्वर की अलौकिक लीला और संतों की महिमा को तर्क की कसौटी पर नहीं, बल्कि केवल अगाध श्रद्धा और अनन्य भक्ति से ही समझा जा सकता है। मानव जीवन के मूल सिद्धांतों को रेखांकित करते हुए स्वामी जी ने कहा कि हमारे जीवन की सुदृढ़ नींव सेवा, स्वाध्याय, संयम और सद्विचारों के स्तंभों पर आधारित होनी चाहिए। वाणी में परम संयम, बड़ों का आदर-सम्मान तथा "राम-राम" ध्वनि से परस्पर अभिवादन करना ही हमारी गौरवशाली भारतीय संस्कृति की वास्तविक पहचान है। उन्होंने जनमानस को चेताया कि भौतिक संपदा क्षणभंगुर है, रामनाम ही मनुष्य की वास्तविक एवं अक्षय संपत्ति है। संत और शास्त्र सदैव सत्य का मार्ग प्रशस्त करते हैं, किंतु उस मार्ग पर चलने के लिए जीवन में विवेक का जागृत होना भी अत्यंत आवश्यक है।

शंकराचार्य जी ने भारतीय सनातन परंपराओं एवं सनातन आहार-विहार के वैज्ञानिक पक्ष पर गहन प्रकाश डाला। उन्होंने मांगलिक कार्यों में पारंपरिक रूप से प्रयुक्त होने वाले गुड़-धनिया के वैज्ञानिक महत्व को प्रतिपादित किया तथा ऋतु एवं मास के अनुसार खान-पान की विशिष्ट उपयोगिता समझाई। उन्होंने समस्त श्रद्धालुओं को इस पवित्र पुरुषोत्तम मास की महिमा समझाते हुए धर्म, मानव सेवा, सत्संग और अविरल भक्ति के मार्ग पर अनवरत चलने का दिव्य संदेश दिया।

कथा की पूर्णाहुति पर भव्य महाआरती का आयोजन हुआ तथा उपस्थित विशाल भक्त समुदाय में महाप्रसाद का वितरण किया गया। अनुष्ठान के अंतर्गत आयोजित विशेष विष्णु यज्ञ में आज डॉ. अशोक खटवानी परिवार सहित बड़ौदा से विशेष रूप से पधारे श्रद्धालुओं ने पूर्ण श्रद्धाभाव से आहुतियां प्रदान कीं तथा देवाधिदेव महादेव का अलौकिक रुद्राभिषेक संपन्न किया।

हरिशेवा उदासीन आश्रम के संत मायाराम ने आगामी कार्यक्रमों की आधिकारिक घोषणा करते हुए बताया कि पुरुषोत्तम मास के इसी पावन विधान के अंतर्गत कल, 31 मई को पंडित गौरी शंकर शास्त्री के विद्वत सानिध्य में श्री सत्यनारायण कथा एवं सामूहिक पूर्णिमा उद्यापन का बृहद आयोजन सुनिश्चित किया गया है। इसके तुरंत बाद, आगामी 1 जून से 7 जून तक जबलपुर के प्रख्यात स्वामी अशोकानंद जी महाराज के श्रीमुख से संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा की अमृतवर्षा होगी, जबकि 8 जून से 14 जून तक काशी के परम पूज्य डॉ. स्वामी निर्मल दास जी महाराज के मुखारविंद से ज्ञानमयी श्री शिव महापुराण कथा का भव्य आयोजन किया जाएगा।

आश्रम के संत गोविन्दराम ने आगामी रुपरेखा प्रस्तुत करते हुए बताया कि इस पवित्र अधिक मास के अंतिम दिवस, 15 जून को भीलवाड़ा की इस पावन धरा पर एक विशाल संत समागम का आयोजन होगा, जिसमें विष्णु यज्ञ की पूर्णाहुति, समस्त धार्मिक पाठ-परायणों की पूर्णाहुति, भव्य महा गंगा आरती एवं अखंड रामधुन का विश्राम संपन्न होगा। उन्होंने संपूर्ण भीलवाड़ा सहित देश-विदेश से आए सभी श्रद्धालुओं से पुरुषोत्तम मास के इस दुर्लभ अवसर पर भीलवाड़ा में प्रवाहित हो रही धर्मगंगा की इस अभूतपूर्व आध्यात्मिक त्रिवेणी का पूर्ण लाभ उठाने और पुण्य का भागी बनने का पुरजोर आग्रह किया है।

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