भीलवाड़ा में भक्तमाल कथा के दूसरे दिन उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़
हरि शेवा उदासीन आश्रम में जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी ज्ञानानंद तीर्थ ने संतों के त्याग, तपस्या और गुरु महिमा के महत्व पर प्रकाश डाला।

भीलवाड़ा के हरि शेवा उदासीन आश्रम में आयोजित पुरुषोत्तम मास महोत्सव के दौरान व्यासपीठ पर बैठकर श्रद्धालुओं को भक्तमाल कथा सुनाते ज्योतिर्मठ अवांतर भानपुरा पीठ के जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी ज्ञानानंद तीर्थ जी महाराज।
हरि शेवा उदासीन आश्रम स्थित सनातन मंदिर में सनातन सेवा समिति, हरि शेवा उदासीन आश्रम सनातन मंदिर एवं महामंडलेश्वर स्वामी हंसराम जी महाराज के सानिध्य में चल रहे पुरुषोत्तम मास महोत्सव के अंतर्गत धार्मिक अनुष्ठानों की श्रृंखला में आयोजित भक्तमाल कथा के दूसरे दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। कथा के दौरान सम्पूर्ण वातावरण भक्तिरस से परिपूर्ण और पूर्णतः धर्ममय बना रहा।
ज्योतिर्मठ अवांतर भानपुरा पीठ के जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी ज्ञानानंद तीर्थ जी महाराज ने भक्तमाल कथा के माध्यम से संत महात्माओं के जीवन, उनके त्याग, तपस्या एवं भक्ति की महिमा का विस्तारपूर्वक वर्णन किया। उन्होंने कहा कि संतों का जीवन समाज को सदैव सत्य, सेवा और सदाचार की प्रेरणा प्रदान करता है तथा संत परंपरा भारतीय संस्कृति की आत्मा है। संतों के बताए मार्ग पर चलकर ही मानव जीवन की सार्थकता संभव है।
उन्होंने भगवान भक्ति, गुरु महिमा एवं सत्संग के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कलियुग में भगवान प्राप्ति का सरलतम माध्यम नामस्मरण एवं सत्संग है। उन्होंने श्रद्धालुओं से जीवन में धर्म, संस्कार एवं गौसेवा को अपनाने का आह्वान किया। अपने उपदेशों में उन्होंने जीव की परतंत्रता, भगवान की सर्वशक्ति, गुरु महिमा एवं हरिनाम की महत्ता को सरल एवं मार्मिक भावों में प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि यह जीव पूर्णतः भगवान के अधीन है और मनुष्य को अहंकार त्यागकर स्वयं को ईश्वर की इच्छा के प्रति समर्पित करना चाहिए। उन्होंने कठपुतली, रथ, नाव और बैल जैसे उदाहरणों के माध्यम से बताया कि जैसे कठपुतली संचालक के अनुसार नाचती है, रथ सारथी के अनुसार चलता है और नाव केवट की दिशा में आगे बढ़ती है, वैसे ही जीव भी ईश्वर एवं गुरु की प्रेरणा से संचालित होता है।
स्वामी ज्ञानानंद जी तीर्थ महाराज ने कहा कि मनुष्य को अपने ज्ञान, वाणी और विद्वता पर अभिमान नहीं करना चाहिए, क्योंकि वास्तविक शक्ति एवं प्रेरणा भगवान एवं गुरु से प्राप्त होती है। उन्होंने कहा कि यदि वाणी में भगवान राम और हरि का नाम नहीं है तो समस्त काव्य, शास्त्र एवं विद्वता भी अधूरी है। भक्तमाल कथा का मूल संदेश बताते हुए उन्होंने कहा कि हरि सेवा, संत संग, गंगा एवं गुरु चरणों में श्रद्धा ही मानव जीवन का वास्तविक सार है तथा हरिनाम, भक्ति एवं सत्संग के माध्यम से ही जीवन का कल्याण संभव है।
कथा के दौरान भजनों की मधुर प्रस्तुतियों से सभागार भक्तिमय हो उठा। कार्यक्रम के अंत में आरती के पश्चात प्रसाद वितरण किया गया। पुरुषोत्तम मास महोत्सव के अंतर्गत आज विष्णु यज्ञ में सम्पत सिसोदिया एवं नरेन्द्र चौहान ने आहुतियाँ दीं तथा महादेव का अभिषेक किया। आश्रम में प्रतिदिन विष्णु यज्ञ, रुद्राभिषेक, संकीर्तन, गंगा आरती एवं विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान श्रद्धा एवं उत्साह के साथ संपन्न हो रहे हैं। आश्रम के संत मायाराम एवं संत गोविन्दराम ने समस्त श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि वे पुरुषोत्तम मास में भीलवाड़ा में प्रवाहित हो रही धर्मगंगा की त्रिवेणी का लाभ प्राप्त करें, जिससे जीवन आध्यात्मिक रूप से समृद्ध हो सके।

Pratahkal Bureau
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