भीलवाड़ा में पुरुषोत्तम मास महोत्सव के तहत पांच दिवसीय भक्तमाल कथा शुरू
जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी ज्ञानानंद तीर्थ के श्रीमुख से कथा श्रवण के लिए उमड़े श्रद्धालु, हरि शेवा उदासीन आश्रम में धार्मिक अनुष्ठानों की श्रृंखला जारी।

भीलवाड़ा के हरि शेवा उदासीन आश्रम में आयोजित पुरुषोत्तम मास महोत्सव के प्रथम दिन व्यासपीठ पर विराजमान होकर श्रद्धालुओं को भक्तमाल कथा का महत्व समझाते ज्योतिर्मठ आवांतर भानपुरा पीठ के पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी ज्ञानानंद तीर्थ जी महाराज।
भीलवाड़ा, 26 मई। सनातन सेवा समिति के तत्वावधान एवं हरि शेवा उदासीन आश्रम सनातन मंदिर व महामंडलेश्वर स्वामी हंसराम जी उदासीन महाराज के सानिध्य में आयोजित पुरुषोत्तम मास (अधिक मास) महोत्सव के अंतर्गत पांच दिवसीय “भक्तमाल कथा” का भव्य शुभारंभ हो गया है। ज्योतिर्मठ आवांतर भानपुरा पीठ के पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी ज्ञानानंद तीर्थ जी महाराज के श्रीमुख से अमृतमयी कथा श्रवण करने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु आश्रम परिसर में उमड़ पड़े, जिससे पूरा वातावरण हरिनाम संकीर्तन और भक्ति रस से सराबोर हो उठा। कथा के प्रथम दिवस का शुभारंभ आश्रम के महामंडलेश्वर स्वामी हंसराम उदासीन एवं संत समाज द्वारा व्यासपीठ के विधि-विधान से पूजन तथा जगद्गुरु शंकराचार्य जी के भव्य स्वागत के साथ किया गया।
इस गरिमामयी आध्यात्मिक अवसर पर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी ज्ञानानंद तीर्थ जी महाराज ने भक्तमाल ग्रंथ के मंगलाचरण “भक्त भक्ति भगवंत गुरु चतुर नाम वपु एक” की विस्तृत व्याख्या प्रस्तुत की। उन्होंने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि भगवान, उनकी भक्ति, स्वयं भक्त तथा सही मार्ग दिखाने वाले गुरु-ये चारों नाम और स्वरूप से भिन्न प्रतीत होते हैं, किन्तु तत्वतः एक ही हैं। उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि जो व्यक्ति श्रद्धा और निष्कपट भाव से संतों एवं भक्तों के चरित्र का श्रवण करता है, उसके जीवन के समस्त विघ्न और संकट स्वतः दूर हो जाते हैं। शंकराचार्य जी ने आगे कहा कि इस भवसागर से पार होने का सबसे सरल और श्रेष्ठ मार्ग भगवद्- आराधना तथा भक्तों के यश का गान ही है। चारों वेद, पुराण और इतिहास भी इसी सत्य की पुष्टि करते हैं कि ईश्वर और उनके भक्त दोनों ही परम वंदनीय एवं पूजनीय हैं।
कथा के दौरान श्रीप्रियादास जी कृत “भक्तिरसबोधिनी टीका” के माध्यम से महाप्रभु श्रीकृष्ण चैतन्य के चरणों का ध्यान एवं हरिनाम संकीर्तन की अनुपम महिमा का गहन वर्णन किया गया। इस दौरान प्रस्तुत हुए सुमधुर भजनों पर श्रद्धालु भावविभोर होकर झूम उठे तथा पूरा पांडाल भक्तिमय वातावरण से गुंजायमान हो गया। पुरुषोत्तम मास के पावन उपलक्ष्य में आयोजित यह विशेष "भक्तमाल कथा" आगामी论 30 मई तक प्रतिदिन दोपहर 3 बजे से शाम 6 बजे तक निरंतर चलेगी। प्रथम दिन के प्रवचन के अंत में महाआरती की गई तथा उपस्थित श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरण किया गया।
धार्मिक अनुष्ठानों की इसी श्रृंखला में आज आयोजित हुए विशेष विष्णु यज्ञ में डॉ. प्रकाश थावानी और अजमेर के दौलतानी परिवार ने पूर्ण श्रद्धाभाव से आहुतियाँ दीं तथा इसके साथ ही हरि सीधेश्वर महादेव का रुद्राभिषेक संपन्न किया। उल्लेखनीय है कि इस पुरुषोत्तम माह महोत्सव के अंतर्गत आश्रम में प्रतिदिन विष्णु यज्ञ, रुद्राभिषेक, संकीर्तन, गंगा आरती एवं विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान पूरी श्रद्धा और उत्साह के साथ संपन्न हो रहे हैं। आश्रम के पूजनीय संत मायाराम और संत गोविन्दराम ने सनातन धर्म के सभी श्रद्धालुओं से पुरुषोत्तम मास के इस पावन अवसर पर भीलवाड़ा में बह रही धर्मगंगा की इस अद्भुत त्रिवेणी का अधिक से अधिक लाभ लेने का भावपूर्ण आग्रह किया है।

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