भीलवाड़ा: सुदामा चरित्र कथा के साथ भागवत समरसता महोत्सव का समापन
जोधपुर के गोवत्स श्री राधाकृष्ण जी महाराज ने मित्रता और सेवा का महत्व बताया, नौगांवा सांवरिया सेठ मंदिर में उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़।

भीलवाड़ा। परम पूज्य माधव गो विज्ञान अनुसंधान संस्थान एवं श्री सांवरिया सेठ मन्दिर ट्रस्ट नौगांवा के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित 'भागवत समरसता महोत्सव' का गुरुवार को सुदामा चरित्र की पावन कथा के साथ श्रद्धापूर्ण समापन हुआ। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में माधव गौशाला परिसर में आयोजित इस आध्यात्मिक अनुष्ठान के अंतिम दिन जोधपुर के गोवत्स श्री राधाकृष्ण जी महाराज ने सेवा और मित्रता के गूढ़ रहस्यों को उजागर किया। व्यास पीठ से सेवा के मर्म को समझाते हुए महाराज श्री ने उद्बोधित किया कि सेवा केवल समय, धन या शारीरिक बल का प्रदर्शन नहीं है, बल्कि यह एक स्वाभाविक गुण है जो केवल उसी व्यक्ति के भीतर जागृत होता है जिसके स्वभाव में परोपकार बसा हो। उन्होंने आचरण की शुद्धता पर बल देते हुए सचेत किया कि मनुष्य को अपनी 'रहनी' का विशेष ध्यान रखना चाहिए, क्योंकि लोभ का स्पर्श होते ही व्यक्ति के व्यक्तित्व का तेज और ओज स्वतः ही समाप्त हो जाता है।
सुदामा चरित्र के प्रसंग का हृदयस्पर्शी वर्णन करते हुए महाराज ने मित्रता को जीवन का सबसे बड़ा संबल बताया। उन्होंने कहा कि मित्रता वह पवित्र संबंध है जो संसार के अन्य तमाम अभावों की पूर्ति कर देता है। यदि जीवन की संघर्षपूर्ण यात्रा में एक भी सच्चा मित्र साथ हो, तो व्यक्ति विकट परिस्थितियों में भी स्वयं को एकाकी या असुरक्षित महसूस नहीं करता। सुदामा और भगवान श्री कृष्ण के अटूट प्रेम और गुरुकुल की आत्मीयता का उदाहरण देते हुए उन्होंने समाज को परस्पर मैत्री और बंधुत्व का संदेश दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि वस्तुओं का अनावश्यक संग्रह केवल कलह और विवाद को जन्म देता है, अतः प्राप्त संसाधनों का सदुपयोग करना ही श्रेष्ठता है। महाराज के अनुसार, जहाँ सच्चा मित्र विद्यमान होता है, वहाँ भय और असुरक्षा का कोई स्थान नहीं रह जाता, क्योंकि मित्रता के भाव में ही वास्तविक शांति निहित है।
महोत्सव के समापन अवसर पर नौगांवा सांवरिया सेठ मंदिर में भगवान का हनुमान और सुदामा संग मिलन का भव्य श्रृंगार किया गया, जिसे देख श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। कथा के शुभारंभ पर पंडित अशोक व्यास द्वारा हनुमान जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में संगीतमय सामूहिक हनुमान चालीसा का पाठ कराया गया। संस्थान के अध्यक्ष डी.पी. अग्रवाल एवं कथा संयोजक मनीष बहेड़िया ने बताया कि कृतज्ञता स्वरूप महाराज श्री को आभार पत्र और छायाचित्र भेंट किया गया, वहीं एक नन्हे बालक ने अपने हाथों से बनाया हुआ महाराज का चित्र उन्हें समर्पित किया। इस अवसर पर माधव गौशाला की गतिविधियों के ब्रोशर का विमोचन हुआ और पंडित अशोक व्यास की निस्वार्थ सेवाओं के लिए उनका सम्मान किया गया। मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष गोविंद प्रसाद सोडाणी ने सभी सहयोगियों का आभार ज्ञापित किया। व्यास पीठ पूजन और व्यवस्थाओं में मुकुट बिहारी बहेड़िया, भंवरलाल दरगड, मधुसूदन बहेड़िया, रामप्रसाद बहेड़िया, मनीष बहेड़िया, सतीश ईनाणी (मुंबई), जे.सी. लड्ढा, वरुण लड्ढा, दिनेश बागडोदिया, डी.पी. मंगल, ओम जागेटिया, श्याम ओझा, साक्षी धाकड़, डॉ. राजकुमार चतुर्वेदी, दीपक पाराशर पुजारी, बाबूलाल चौकीदार, रामप्रसाद, गोवर्धन लाल बहेड़िया, पंडित संजय मकराना, नरेंद्र विश्नोई, नारायण गाडरी, कमलेश मुणोत, हेमंत शर्मा और सत्यप्रकाश गग्गड सहित अनेक कार्यकर्ताओं का सक्रिय सहयोग रहा।

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