पारिवारिक ढांचा और संत सान्निध्य देश की सुरक्षा का आधार: गोवत्स राधाकृष्ण
भीलवाड़ा के माधव गौशाला में आयोजित भागवत महोत्सव में गोवत्स राधाकृष्ण महाराज ने सामाजिक समरसता और राष्ट्र सेवा के लिए एकजुट होने का आह्वान किया।

भीलवाड़ा, 01 अप्रैल। सामाजिक समरसता की अनूठी मिसाल पेश करते हुए भीलवाड़ा की धरा पर 'भागवत समरसता महोत्सव' के छठे दिन आस्था और एकता का शंखनाद हुआ। परम पूज्य माधव गो विज्ञान अनुसंधान संस्थान एवं श्री सांवरिया सेठ मंदिर ट्रस्ट, नौगांवा के संयुक्त तत्वावधान में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित इस महोत्सव में जोधपुर के विख्यात कथावाचक गोवत्स श्री राधाकृष्ण जी महाराज ने कृष्ण-रुक्मणी विवाह प्रसंग के माध्यम से राष्ट्र, समाज और संगठन की शक्ति पर सारगर्भित विचार साझा किए। महाराज श्री ने दो-टूक शब्दों में कहा कि भारतीय पारिवारिक संरचना और संतों का मार्गदर्शन ही देश की सुरक्षा का सबसे अभेद्य दुर्ग है।
कथा के दौरान वैश्विक महामारी कोरोना के कालखंड को रेखांकित करते हुए महाराज श्री ने कहा कि जहां विदेशों में लोग अकेलेपन और धर्म व परिवार के अभाव में अवसाद का शिकार हो गए, वहीं भारत अपनी सुदृढ़ पारिवारिक व्यवस्था और सामाजिक एकजुटता के कारण इस संकट से विजयी होकर निकला। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब दुनिया खत्म होती प्रतीत हो रही थी, तब 'संत' और 'राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ' जैसे संगठनों ने क्रमशः आध्यात्मिक चेतना और भौतिक संसाधनों की आपूर्ति सुनिश्चित कर समाज का कवच बनकर रक्षा की। गोवर्धन लीला की व्याख्या करते हुए उन्होंने इसे सामूहिकता का अनुपम प्रतीक बताया और कहा कि भगवान कृष्ण ने ग्वालों से लाठियां लगवाकर यह संदेश दिया था कि जब पूरा समाज एकजुट होकर खड़ा होता है, तो आकाश को भी संभाला जा सकता है। उन्होंने प्रत्येक नागरिक से ईंधन और बिजली बचाने जैसी छोटी लेकिन महत्वपूर्ण राष्ट्र सेवा का आह्वान करते हुए कहा कि संत और संघ के ध्येय एक ही हैं—जगत कल्याण और राष्ट्र सेवा।
महोत्सव का सबसे स्वर्णिम अध्याय 'समरसता महाभोज' के रूप में लिखा गया, जहाँ 'एक जाजम, एक पंगत' के संकल्प ने जाति-पाति और ऊंच-नीच की समस्त दीवारों को धराशायी कर दिया। महाराज श्री की प्रेरणा से आयोजित इस महाभोज में हजारों माताएं अपने घरों से वात्सल्यपूर्ण लापसी और पूरी लेकर पहुंचीं, जिससे हजारों टिफिनों का भोजन एक विराट महाप्रसाद में परिवर्तित हो गया। वीआईपी संस्कृति को दरकिनार कर महाराज श्री ने स्वयं विभिन्न समाजों के भक्तों के साथ जमीन पर बैठकर सादगी से प्रसाद ग्रहण किया। इस अवसर पर जल एवं संसाधन मंत्री सुरेश रावत भी पंक्ति में बैठकर भोजन ग्रहण करते नजर आए। आयोजन में हरिसेवा धाम के महामंडलेश्वर हंसराम उदासीन, पंचमुखी दरबार के महंत लक्ष्मण दास त्यागी और नृसिंह टेकरी ओंकारेश्वर के महंत श्यामसुंदर दास सहित अन्य संतों का महाराज श्री ने साष्टांग दंडवत कर अभिनंदन किया।
व्यासपीठ के पूजन और अभिनंदन कार्यक्रम में शाहपुरा विधायक डॉक्टर लालाराम बैरवा, संस्थान अध्यक्ष डीपी अग्रवाल, कथा संयोजक मनीष बहेडिया, मंदिर ट्रस्ट अध्यक्ष गोविंद प्रसाद सोडाणी सहित राधेश्याम चेचानी, मधुसूदन बहेड़िया, निश्छल बहेड़िया, राजाराम (विहिप), मुरलीधर (सीमा जन कल्याण), चांदमल सोमानी, अनिरुद्ध, हेमन्त दादा, पुरुषोत्तम, श्याम बिहारी, शंकरलाल तोषनीवाल, राजकुमार बम्ब, तिलोकचंद छाबड़ा, राजेन्द्र कचोलिया, पवन खेमका, मुकेश, सुनील, रामगोपाल, ललित, राधेश्याम मूंदड़ा, मदन लाल काबरा, प्रहलाद मूंदड़ा, गोकुल सोडाणी, रामेश्वर काबरा, भगवान सुथार, लक्ष्मी नारायण डाड, भारत विकास परिषद की सातों शाखाओं के कार्यकर्ता, सतीश बालदी, ओम गड़ानी, राजेन्द्र प्रसाद फोगला, अशोक अजमेरा, शिव कुमार सोडाणी, गजानंद बजाज, अशोक काबरा, शंकर लाल काबरा, महावीर झंवर, अक्षत संजय अग्रवाल, मदन गोपाल कालरा, महेश नवाल, राकेश गौड़, निर्मल जोशी, बद्रीलाल महावीर, गणपत एमआरसी, काना, ओमदा, प्रकाश पंडित, दीपक, बद्री, जमना, अभिषेक, दुर्गेश एवं अंशुल आदि प्रमुखता से उपस्थित रहे। गुरुवार सुबह 9 बजे सुदामा चरित्र की मार्मिक कथा के साथ इस भव्य महोत्सव का औपचारिक समापन होगा, जिसके लिए रामधाम से निःशुल्क बस सेवा की व्यवस्था की गई है।

Pratahkal Hub
प्रातःकाल हब, दै.प्रातःकाल की वह समर्पित संपादकीय टीम है, जो सटीक, सामयिक और निष्पक्ष समाचार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा प्रातःकाल हब राजनीति, समाज, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय मामलों में सत्यापित रिपोर्टिंग, गहन विश्लेषण और जिम्मेदार पत्रकारिता पर अपना ध्यान केंद्रित करता है।"
