सेवादारों का सम्मान सौभाग्य का द्वार, भीलवाड़ा में बोले गोवत्स राधाकृष्ण महाराज
माधव गो विज्ञान अनुसंधान संस्थान में आयोजित महोत्सव के दूसरे दिन उमड़े श्रद्धालु, आरएसएस के शताब्दी वर्ष और सामाजिक समरसता पर दिया गया विशेष जोर।

भीलवाड़ा। "सेवादारों का सम्मान करना केवल नैतिकता नहीं, बल्कि सौभाग्य का द्वार है; जब आप निस्वार्थ भाव से सेवा करने वालों के प्रति कृतज्ञता रखते हैं, तो उनकी दुआएं जीवन में सकारात्मक ऊर्जा भर देती हैं और सोए हुए भाग्य को जगा देती हैं।" यह प्रेरक विचार जोधपुर के विख्यात गोवत्स संत श्री राधाकृष्ण महाराज ने व्यक्त किए। अवसर था शहर से 17 किलोमीटर दूर नोगांवा सांवरिया सेठ पावन धाम में परम पूज्य माधव गो विज्ञान अनुसंधान संस्थान एवं श्री सांवरिया सेठ मंदिर ट्रस्ट के तत्वावधान में आयोजित 'श्रीमद् भागवत समरसता महोत्सव' के द्वितीय दिवस की कथा का, जहाँ हजारों की संख्या में श्रद्धालु भक्ति रस में सराबोर हुए।
कथा के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष का विशेष उल्लेख करते हुए महाराज श्री ने कहा कि समाज को गौरवान्वित करने वाली यह महती सेवा पूर्णतः ईश्वरीय है। उन्होंने संघ की कार्य पद्धति को अनुभव की कसौटी पर खरा बताते हुए एक मार्मिक तुलना की कि जिस प्रकार पूजा की थाली पवित्र है, उसी प्रकार हाथ में झाड़ू लेकर समाज को स्वच्छ करने वाला व्यक्ति भी माँ भारती की ही पूजा कर रहा है। झाड़ू को 'लक्ष्मी' का प्रतीक बताते हुए उन्होंने इसे व्यवस्थित रखने की सीख दी और कहा कि जो राष्ट्र के लिए कष्ट उठाता है, वही शीतलता प्रदान करता है, ठीक उसी प्रकार जैसे कुम्हार द्वारा तपाया गया मटका शीतल जल देता है। उन्होंने सचेत किया कि प्रकृति हमारी हर गतिविधि को नोट करती है और सेवादारों का अनादर प्रकृति की दृष्टि में अक्षम्य है।
महोत्सव के दूसरे दिन की शुरुआत उपनगर पुर से भव्य प्रभात फेरी के साथ हुई, जिसमें भक्तों के हरि उद्घोष से मार्ग गुंजायमान रहा। संस्थान की रसायनशाला में लगी छायाचित्र प्रदर्शनी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनी रही, जिसमें पिछले 23 वर्षों की गो-संरक्षण यात्रा को दर्शाया गया है। आयोजन को सुगम बनाने हेतु रामधाम से निशुल्क बस सेवा, पेयजल और सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए हैं, जबकि कथा का कुशल संचालन पंडित अशोक व्यास द्वारा किया गया।
इस आध्यात्मिक आयोजन में पूर्व सांसद सुभाष बहेडिया, डॉ. ऋतु बनावत, उद्योगपति बनवारी लाल मुरारका, सत्यप्रकाश गगड़, नवीन मूंदड़ा, संघ प्रचारक जयंतीलाल, मुरलीधर, शिवलहरी, धर्मराज, राजेंद्र समदानी, शैलेश दरगड़, मुकुट बिहारी बहेडिया, अनिल कंदोई, नरेंद्र भाई मुंबई, जगदीश काबरा, प्रहलाद बहेडिया, हरीश काबरा, गिरिराज काबरा, सोहन लाल गहलोत, अजीत सिंह, सूरज सिंह, जगदीश प्रसाद कोगटा, भंवरलाल दरगड़, रामप्रकाश बहेड़िया, मुकेश सोनी, रितु शेखर शर्मा, श्रवण सेन, राकेश खोईवाल, आचार्य रमाकांत दाधीच, पुरुषोत्तम दाधीच, कमलेश शर्मा, रोहित शर्मा एवं हिमांशु शर्मा सहित अनेक गणमान्य जनों ने महाराज श्री से आशीर्वाद प्राप्त किया। इसके अतिरिक्त, कुमुद विहार में आयोजित भजन संध्या में चैत्र शुक्ल दशमी पर भक्तों ने नृत्य कर भक्ति का आनंद लिया।
आगामी कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए संस्थान अध्यक्ष डीपी अग्रवाल एवं ट्रस्ट अध्यक्ष गोविंद प्रसाद सोडानी ने बताया कि 29 मार्च को प्रह्लाद चरित्र, 30 मार्च को कृष्ण जन्मोत्सव एवं युवा गोष्ठी, 31 मार्च को बाल कृष्ण लीला व छप्पन भोग, 01 अप्रैल को रुक्मणी विवाह और 02 अप्रैल को सुदामा चरित्र के साथ महोत्सव का विश्राम होगा। यह आयोजन न केवल आध्यात्मिक चेतना जगा रहा है, बल्कि सामाजिक समरसता और सेवा के भाव को भी सुदृढ़ कर रहा है।

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