भीलवाड़ा: ऋष्य श्रृंग संस्थान में 51 कलशों के साथ भागवत कथा शुरू
पारीक परिवार द्वारा आयोजित पितृ मोक्षदायिनी कथा के प्रथम दिन भगवती कृष्ण महाराज ने भागवत महात्म्य बताया और भक्तों ने फूलों की होली खेली।

भीलवाड़ा के हरणी महादेव रोड पर 51 कलशों के साथ निकाली गई भव्य शोभायात्रा में भजनों पर झूमते श्रद्धालु और कलश धारण किए महिलाएं।
भीलवाड़ा में 51 कलशों के साथ श्रीमद् भागवत कथा का भव्य शुभारंभ: पितृ मोक्ष के लिए उमड़ा श्रद्धा का सैलाब
भीलवाड़ा। ऋष्य श्रृंग संस्थान, हरणी महादेव रोड, भीलवाड़ा में 11 से 17 मार्च तक आयोजित होने वाली श्रीमद् भागवत कथा का 51 कलश यात्रा व भव्य शोभायात्रा के साथ मंगल शुभारंभ हुआ। इस दौरान संपूर्ण मार्ग भक्ति के रंग में रंगा नजर आया और भक्तजन भजनों की स्वर लहरियों के साथ नाचते-गाते हुए चल रहे थे।
स्व. श्री जगदीश प्रसाद पारीक की स्मृति में पितृ मोक्षदायिनी कथा
विशेष अनुग्रह श्रीमती अरुणा पारीक (धर्मपत्नी) आयोजक हर्षवर्धन, प्रहलाद, बालमुकुंद, बालस्वरूप, रविशंकर, विवेक पारीक एवं समस्त पारीक परिवार (खजूरी वाले) भीलवाड़ा ने जानकारी देते हुए बताया कि "स्व. श्री जगदीश प्रसाद पारीक की पावन पुण्य स्मृति में मेवाड़ धरा के सुप्रसिद्ध अथर्ववेदाचार्य श्रद्धेय कथावाचक भगवती कृष्ण महाराज के मुखारविंद द्वारा पितृ मोक्षदायिनी श्रीमद् भागवत कथा महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है।" यह कथा 17 मार्च मंगलवार तक ऋष्य श्रृंग संस्थान, हरणी महादेव रोड शास्त्रीनगर भीलवाड़ा में प्रतिदिन मध्यान्ह 12:15 बजे से 4:15 बजे तक की जाएगी।
राम मंदिर से कथा स्थल तक निकली भव्य शोभायात्रा
श्रीमद् भागवत कथा का भव्य शुभारंभ बुधवार को भव्य शोभायात्रा के साथ हुआ। यह यात्रा प्रातः श्री राम मंदिर (श्याम विहार कॉलोनी) से प्रारंभ होकर गाजे-बाजे और 51 कलश के साथ श्याम विहार, निवास स्थान, एवं बालाजी मंदिर होते हुए कथा स्थल ऋष्य श्रृंग संस्थान पर पहुंची। पारीक परिवार द्वारा अधिक से अधिक संख्या में कथा श्रवण करने के लिए भक्तों को पहुंचने का आव्हान किया जा रहा है।
प्रथम दिन भागवत महात्म्य और भजनों पर झूमे श्रद्धालु
कथा के प्रथम दिन कथावाचक भगवतीकृष्ण महाराज द्वारा श्रीमद् भागवत कथा महात्म्य, वैदिक मंत्रोच्चार, देव आव्हान एवं पितृ आव्हान संपन्न किया गया। इस अवसर पर शीतला अष्टमी पर्व एवं फागोत्सव का विशेष उल्लास देखने को मिला। "सावरों तेरे से मन लगा बैठे, हे मुरली वाले, रंग मत डाले रे सावरिया जैसे भजनों पर पांडाल भक्तिमयता के साथ फूलों से होली खेलते हुए भक्त झूम उठे।"

Pratahkal Bureau
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