भीलवाड़ा बैंक कैशियर लूट मामला: 10 साल बाद मुख्य आरोपी अशोक चौहान गिरफ्तार
2016 में कैशियर और गार्ड पर फायरिंग कर 24 लाख रुपये लूटने के मामले में प्रतापगढ़ पुलिस ने पूर्व सैनिक अशोक कुमार चौहान को गिरफ्तार किया है।

भीलवाड़ा में वर्ष 2016 में हुए चर्चित बैंक कैशियर लूट और फायरिंग मामले में पुलिस को एक दशक बाद बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। जिला पुलिस अधीक्षक सागर राणा के निर्देशन में वांछित अपराधियों के विरुद्ध चलाए जा रहे विशेष अभियान के अंतर्गत प्रतापनगर थाना पुलिस ने ₹15,000 के इनामी बदमाश और इस वारदात के मुख्य सूत्रधार अशोक कुमार चौहान उर्फ पप्पू (49) को गिरफ्तार कर लिया है। एक पूर्व सैन्यकर्मी होने के कारण शातिर अपराधी अशोक ने कानून की पकड़ से बचने के लिए अपनी पहचान और ठिकाने लगातार बदले, लेकिन अंततः तकनीकी साक्ष्यों ने उसकी घेराबंदी पूरी कर ली।
घटनाक्रम 18 फरवरी 2016 का है, जब इंडसइंड बैंक के कैशियर और गार्ड रामलाल ₹24,33,800 की नकदी लेकर जा रहे थे। इस दौरान बदमाशों ने सुनियोजित तरीके से उन पर हमला कर दिया। जब गार्ड रामलाल ने विरोध करने का साहस दिखाया, तो अपराधियों ने क्रूरता दिखाते हुए उनकी पीठ में गोली मार दी और नकदी लूटकर मौके से फरार हो गए। इस सनसनीखेज वारदात के बाद से ही पुलिस तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी थी, परंतु मुख्य आरोपी अशोक सिंह तब से ही फरार चल रहा था।
पुलिस के लिए उसकी गिरफ्तारी एक बड़ी चुनौती थी, क्योंकि वह बेहद सतर्कता से अपनी पहचान छिपा रहा था। पुलिस की टीम ने तकनीकी सहायता के माध्यम से उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के कई जिलों में उसकी सघन तलाश की। जांच में सामने आया कि इंदौर में आरोपी के पास आलीशान मकान और लग्जरी गाड़ियां मौजूद हैं, बावजूद इसके पुलिस की नजरों से ओझल रहने के लिए वह एक कच्ची झोपड़ी में छिपकर रह रहा था।
प्रतापनगर थानाधिकारी सुनील ताड़ा के नेतृत्व में एएसआई गोविन्द सिंह, कांस्टेबल सुरेन्द्र और साइबर सेल के पिन्टु कुमार की टीम ने इस जटिल ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। पूर्व सैनिक अशोक चौहान की गिरफ्तारी ने 10 साल पुरानी उस फाइल को बंद कर दिया है, जो लंबे समय से पुलिस के लिए एक अनसुलझी पहेली बनी हुई थी। कानून की लंबी भुजाओं ने आखिरकार उसे उसकी फरारी के ठिकाने से दबोच ही लिया।

