15 साल की अनदेखी से भड़के बलिया खेड़ा के ग्रामीण, निकाय चुनाव के बहिष्कार का ऐलान
भीलवाड़ा के बलिया खेड़ा में 15 साल से श्मशान घाट और बुनियादी सुविधाओं की समस्या से नाराज ग्रामीणों ने निकाय चुनाव के पूर्ण बहिष्कार का ऐलान किया है। बैनर लगाकर कहा—काम नहीं तो वोट नहीं।

तस्वीर में भीलवाड़ा के बलिया खेड़ा (पुर) वार्ड नंबर 1 के ग्रामीण और स्थानीय निवासी चुनाव बहिष्कार का बैनर पकड़े हुए नजर आ रहे हैं।
भीलवाड़ा। प्रशासन की कथित अनदेखी और जनप्रतिनिधियों की वर्षों से चली आ रही उपेक्षा से नाराज नगर निगम वार्ड नंबर 1 स्थित बलिया खेड़ा (पुर) के ग्रामीणों ने आगामी निकाय चुनाव के सामूहिक बहिष्कार का निर्णय लिया है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव पिछले 15 वर्षों से बुनियादी सुविधाओं और श्मशान घाट जैसी आवश्यक व्यवस्था के लिए संघर्ष कर रहा है। इसी विरोध में पुरुषों, महिलाओं और युवाओं की मौजूदगी में गांव में बैनर लगाकर स्पष्ट संदेश दिया गया है—“काम नहीं तो वोट नहीं।”
ग्रामीणों ने कहा कि किसी भी राजनीतिक दल के प्रत्याशी या निर्दलीय उम्मीदवार को वोट मांगने के लिए गांव की सीमा में प्रवेश नहीं करना चाहिए। उनका आरोप है कि चुनाव के समय प्रत्याशी गांव में पहुंचकर वादे करते हैं, लेकिन चुनाव जीतने के बाद समस्याओं की ओर मुड़कर नहीं देखते। ग्रामीणों के अनुसार पिछले पार्षद ने एक मोटर डलवाकर अपनी जिम्मेदारी पूरी कर ली और इसके बाद दोबारा गांव की ओर ध्यान नहीं दिया।
ग्रामीणों के आक्रोश का प्रमुख कारण पिछले 15 वर्षों से श्मशान घाट का निर्माण नहीं होना है। ग्रामीणों के अनुसार जिस भूमि पर खुले में अंतिम संस्कार किया जाता था, उस जमीन को भी असामाजिक तत्वों ने खुर्द-बुर्द कर दिया और वहां से मिट्टी तक उठा ली गई। इस मामले में ग्रामीणों ने कलेक्टर, सांसद, विधायक से लेकर पुलिस थाने तक लिखित शिकायतें और आवेदन दिए, लेकिन उनका कहना है कि अब तक कोई प्रभावी सुनवाई नहीं हुई।
ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस ने भी मामले में कार्रवाई करने के बजाय उनसे ही आरोपियों के नाम पूछकर पल्ला झाड़ लिया। उनका कहना है कि इससे शासन-प्रशासन और मौजूदा लोकतांत्रिक व्यवस्था के प्रति उनका भरोसा पूरी तरह खत्म हो गया है।
श्मशान घाट के अलावा गांव में सड़क और पेयजल व्यवस्था की स्थिति भी खराब बताई गई है। ग्रामीणों के अनुसार गांव के दो-दो एनीकट क्षतिग्रस्त पड़े हैं, जिससे जल संचयन प्रभावित है। वहीं, महिलाओं के लिए महिला स्नान गृह तक की व्यवस्था नहीं है। ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से इन समस्याओं को उठाने के बावजूद समाधान नहीं किया गया।
ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से कहा, “नगर निगम वार्ड नंबर 1, ग्राम बलिया खेड़ा वासियों ने सामूहिक निर्णय लिया है कि इस बार हम चुनाव का पूर्ण बहिष्कार कर रहे हैं। 15 साल से हमारे साथ सिर्फ धोखा हो रहा है। श्मशान के लिए हम 15 साल से संघर्ष कर रहे हैं। अब हमें उम्मीद नहीं बची है, इसलिए हमने शांतिपूर्वक और लोकतांत्रिक तरीके से विरोध का निर्णय लिया है। जो भी प्रत्याशी हो—चाहे पार्टी का हो या निर्दलीय—गांव में वोट मांगने न आए। काम नहीं तो वोट नहीं!”
ग्रामीणों ने प्रशासन पर नाराजगी जताते हुए कहा, “हमने कलेक्टर साहब, सांसद साहब, विधायक साहब और थाने में भी रिपोर्ट दी, लेकिन आज तक कोई सुनवाई नहीं हुई। प्रशासन सो रहा है! हमारे श्मशान की जगह से मिट्टी तक उठाकर ले गए, और पुलिस हमसे पूछती है कि नाम बताओ! ढूंढना पुलिस का काम है या हमारा? हमारे एनीकट टूटे पड़े हैं, सड़कें खराब हैं। जब कोई सुनने वाला ही नहीं है, तो हमें ऐसे लोकतंत्र और वोटों की कोई आवश्यकता नहीं है!”
बलिया खेड़ा के ग्रामीणों ने बैनर के जरिए “काम नहीं तो वोट नहीं” का संदेश देते हुए आगामी निकाय चुनाव के पूर्ण बहिष्कार का ऐलान किया है। 15 वर्षों से श्मशान घाट, सड़क, पानी, एनीकट और महिला स्नान गृह जैसी समस्याओं को लेकर उठ रही उनकी शिकायतों के बीच यह सामूहिक निर्णय स्थानीय स्तर पर प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के प्रति बढ़ते असंतोष को सामने लाता है।

Anshul Toshniwal, Bhilwara
नाम: अंशुल तोषनीवाल
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कार्यक्षेत्र: भीलवाड़ा जिला (राजस्थान)
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परिचय
अंशुल तोषनीवाल भीलवाड़ा जिले से न्यूज़ वेबसाइट के लिए रिपोर्टर के रूप में कार्यरत हैं। वह भीलवाड़ा जिले और उसके अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों की स्थानीय घटनाओं, प्रशासनिक गतिविधियों, क्राइम, राजनीति और जनहित से जुड़ी सभी प्रकार की खबरों को नियमित रूप से कवर करते हैं।
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