रूपाहेली में सामाजिक बहिष्कार के आरोप पर बलाई समाज का कलेक्ट्रेट घेराव
रूपाहेली गांव में कथित सामाजिक बहिष्कार और उत्पीड़न के खिलाफ अखिल भारतीय बलाई महासभा ने जिला कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन कर राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा।

भीलवाड़ा जिला कलेक्ट्रेट के बाहर रूपाहेली गांव में बलाई समाज के कथित सामाजिक बहिष्कार और उत्पीड़न के विरोध में प्रदर्शन करते अखिल भारतीय बलाई महासभा के लोग।
जिले के कोटड़ी तहसील स्थित रूपाहेली गांव में बलाई समाज के लोगों के कथित सामाजिक बहिष्कार, मारपीट और जातीय उत्पीड़न के विरोध में सोमवार को अखिल भारतीय बलाई महासभा के नेतृत्व में समाज के सैकड़ों लोगों ने जिला कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान लोगों ने प्रशासन और पुलिस के खिलाफ नारेबाजी करते हुए मुख्यमंत्री और राज्यपाल के नाम जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर दोषियों के विरुद्ध तत्काल सख्त कार्रवाई की मांग की।
ज्ञापन के अनुसार विवाद की शुरुआत उस समय हुई जब गांव निवासी गोपाल लाल भट्ट पर आरोप लगाया गया कि उन्होंने दलित समाज द्वारा दिए गए चंदे को ब्रह्म भोज में शामिल करने से इनकार कर दिया। इसके बाद 8 मार्च 2026 को गांव के हनुमान मंदिर परिसर में आयोजित एक बैठक में बलाई समाज के लोगों का सामाजिक बहिष्कार करने का निर्णय लिया गया।
आरोप है कि इस निर्णय के तहत बलाई समाज के लोगों को गांव की विभिन्न मूलभूत सुविधाओं से वंचित करने की कोशिश की गई। ज्ञापन में कहा गया है कि राशन और किराना सामग्री देने, बाल काटने तथा दवाइयां उपलब्ध कराने जैसी सेवाओं पर अनौपचारिक रोक लगाने की घोषणा की गई। साथ ही यह चेतावनी भी दी गई कि यदि कोई व्यक्ति बहिष्कार का विरोध करेगा या पीड़ित समाज की सहायता करेगा तो उसके खिलाफ भी सामाजिक कार्रवाई की जाएगी।
बलाई समाज ने आरोप लगाया है कि बहिष्कार के बाद समाज के बच्चों, महिलाओं और अन्य सदस्यों के साथ मारपीट की गई तथा उन्हें जातिसूचक शब्द कहकर अपमानित किया गया। समाज के प्रतिनिधियों का दावा है कि घटनाओं से जुड़े वीडियो साक्ष्य उनके पास सुरक्षित हैं। ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि आगामी समय में स्कूल खुलने पर बच्चों के साथ भेदभाव और उनकी सुरक्षा को लेकर समाज में चिंता व्याप्त है।
अजमेर संभाग अध्यक्ष गोवर्धन बलाई और भीलवाड़ा जिलाध्यक्ष हरीश कुमार सालवी के नेतृत्व में सौंपे गए मांग पत्र में आरोपी गोपाल भट्ट की तत्काल गिरफ्तारी, सामाजिक उत्पीड़न के आरोपों की निष्पक्ष जांच, सभी आरोपियों के विरुद्ध कार्रवाई, कथित लापरवाही के लिए संबंधित पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई तथा सामाजिक बहिष्कार को प्रभावी बनाने में भूमिका निभाने वाले व्यक्तियों और प्रतिष्ठानों की जांच की मांग की गई है। साथ ही मारपीट और जातिसूचक गाली-गलौज के आरोपों में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग भी उठाई गई है।
प्रदर्शन के समापन पर बलाई महासभा ने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन और पुलिस द्वारा मामले में शीघ्र प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई तो समाज व्यापक आंदोलन का रास्ता अपनाने को बाध्य होगा। ऐसे किसी भी आंदोलन की जिम्मेदारी राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन की होगी। यह मामला अब जिले में सामाजिक सौहार्द, कानून व्यवस्था और दलित समुदाय की सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दे के रूप में चर्चा का विषय बन गया है।

Pratahkal Bureau
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