भीलवाड़ा: बाबा शेवाराम साहेब की 42वीं वर्सी पर उमड़े श्रद्धालु
हरि शेवा उदासीन आश्रम में महामंडलेश्वर स्वामी हंसराम उदासीन के सानिध्य में भजन, सत्संग और भंडारे का आयोजन हुआ, संतों ने दिया सेवा-सिमरन का संदेश।

भीलवाड़ा के हरि शेवा उदासीन आश्रम में गुरुवार को आयोजित बाबा शेवाराम साहेब के 42वें वर्सी उत्सव के दौरान सत्संग श्रवण करते श्रद्धालु और उपस्थित संत समाज।
भीलवाड़ा। हरि शेवा उदासीन आश्रम, सनातन मंदिर भीलवाड़ा में आराध्य सतगुरु बाबा शेवाराम साहेब जी की 42वीं वार्षिक वर्सी उत्सव गुरुवार को श्रद्धा, भक्ति एवं उल्लास के साथ संपन्न हुआ। कार्यक्रम सायं 5:30 से 8:30 बजे तक आयोजित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर धार्मिक लाभ प्राप्त किया। बाबा शेवाराम साहेब ने अखण्ड भारत के सिन्ध प्रांत से विभाजन के पश्चात भीलवाड़ा को अपनी कर्मस्थली बनाया और जीवनभर सेवा, सत्संग, कीर्तन व भजन के माध्यम से सनातन धर्म की पताका फहराते रहे।
संतों का सानिध्य और सेवा-सिमरन का संदेश
संत गोविन्द राम ने जानकारी देते हुए बताया कि सेवा-सुमिरन की कड़ी में महामण्डलेश्वर स्वामी हंसराम उदासीन के सानिध्य में सतगुरुओं का गुणगान, भजन एवं सत्संग आयोजित हुए। महामंडलेश्वर स्वामी हंसराम जी उदासीन ने अपने सत्संग में अपने गुरु की स्तुति करते हुए "तुम दान दियो महारवान गुरु" भजन गाया और श्रद्धालुओं को अपने गुरु से एक ही दान माँगने का संदेश दिया, वह है नाम दान। उन्होंने सभी को सत्कर्म के मार्ग पर चलते हुए सेवा और सिमरन करने की प्रेरणा दी। स्वामी जी ने सावधानी बरतने का संदेश देते हुए कहा कि "पानी पीजे छान के, गुरु कीजिए जान के - आज के कालिकाल में ढोंगी संत बहुत आ गए हैं। ना उनको गुरु परंपरा का ज्ञान है ना वेशभूषा का। इसीलिए समाज में भटकाव आता जा रहा है।"
आश्रम में विविध धार्मिक अनुष्ठान एवं आयोजन
आश्रम परिसर में सतगुरुओं की समाधि एवं आसन साहेब पर फूल-मालाओं से विशेष श्रृंगार किया गया। साथ ही हवन, पूजन-अर्चन एवं श्री हरि सिद्धेश्वर मंदिर में अभिषेक सहित विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम सम्पन्न हुए। इस विशेष अवसर पर कुमारी पूजा कोली पुत्री श्री खेमचंद कोली ने बाबा शेवाराम साहेब की तस्वीर अपने हाथ से बनाकर स्वामी जी को भेंट की। सायंकाल में संत-महापुरुषों के सत्संग प्रवचन, अरदास एवं प्रार्थना का आयोजन हुआ, जिसके पश्चात भंडारा प्रसाद वितरित किया गया।
जनसेवा और गुरु के मूल मंत्र का संकल्प
इस अवसर पर नगर की बस्तियों में अन्न क्षेत्र के माध्यम से सेवा कार्य भी किए गए। श्रद्धालुओं ने बाबा शेवाराम साहेब के बताए मूल मंत्र “सुख चाहो सेवा करो - सुख चाहो सिमरन करो” को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लिया। यह आयोजन भजन, सत्संग, हवन व भंडारे के साथ पूर्ण हुआ, जहाँ संतों ने मानवता को सेवा व सिमरन का मार्ग दिखाया।

Pratahkal Bureau
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