भीलवाड़ा, 26 अगस्त। राम नाम का श्रवण करने मात्र से पशुओं का भी उद्धार हो जाता है, लेकिन मनुष्य को राम नाम बोलने के लिए भी समय की कमी महसूस होती है। सत्संग और भक्ति की इच्छा होने के बावजूद ‘मगर’ को बहाना बनाकर पीछे हटना कर्मों के जाल को और मजबूत करता है। इससे मुक्ति के लिए राम नाम का कीर्तन और सत्संग ही मार्ग है। यह विचार अंतरराष्ट्रीय रामस्नेही संप्रदाय शाहपुरा के पीठाधीश्वर जगद्गुरु आचार्य स्वामी श्रीरामदयालजी महाराज ने बुधवार को माणिक्यनगर रामद्वारा धाम में ‘विश्व शांति कल्याण’ चातुर्मास के तहत आयोजित दैनिक सत्संग में व्यक्त किए।

आचार्यश्री ने कहा कि हम अक्सर कहते हैं कि सत्संग में जाना चाहते हैं, भक्ति करना चाहते हैं, ‘मगर’ क्या करें, समय ही नहीं मिलता। अपने भविष्य की राह में इस ‘मगर’ को बाधक नहीं बनने देना चाहिए। कर्मों का जाल तोड़ना है तो ‘मगर’ से मुक्ति पानी होगी। ‘मगर’ के शिकंजे से न पत्नी और न बच्चे कोई बल छुड़ा सकता है। केवल राम नाम का कीर्तन और सत्संग ही ‘मगर’ से मुक्त करा सकता है।

उन्होंने कहा कि श्रवण भक्ति अनुपम होती है। ‘मगर’ ने राम नाम का श्रवण किया तो उसका भी उद्धार हो गया। राम भक्ति के बिना संसार में सब व्यर्थ है। राम नाम लेने और सुनने से उद्धार होता है। आचार्यश्री ने कहा कि स्वतंत्र बनें, लेकिन स्वच्छंदता से दूर रहें। शास्त्रीय नियमों से बंधे रहना चाहिए। धर्म और संस्कृति के अपने नियम एवं मर्यादाएं होती हैं, जिनका पालन करना चाहिए। मर्यादा के साथ जीवन जीने वाले व्यक्ति का उत्थान होता है।

आचार्य रामदयालजी महाराज ने कहा कि शरीर से मोह नहीं रखना चाहिए और आत्मा के कल्याण के लिए धर्म एवं सत्संग करते रहना चाहिए। जिस शरीर से हम मोह रखते हैं, वह एक दिन अवश्य धोखा देकर छोड़ जाएगा। हम शरीर को अपना मानते हैं, लेकिन शरीर हमें अपना नहीं मानता। मृत्यु कब आएगी, यह कोई नहीं जानता, इसलिए हमेशा उसके लिए तैयार रहना चाहिए।

उन्होंने कहा कि अपनी वाणी में हमेशा मधुरता, व्यवहार में उदारता और विचारों में महानता रखनी चाहिए। ऐसा व्यक्ति जब दुनिया से जाता है तो लोग कहते हैं कि एक अच्छा आदमी दुनिया से चला गया, जबकि कुछ लोगों के जाने पर कहा जाता है कि दुनिया का भार कम हुआ। हम किसी का भला नहीं कर सकते तो बुरा भी नहीं करना चाहिए। किसी को सुख नहीं दे सकते तो दुःख भी नहीं देना चाहिए।

आचार्यश्री ने कहा कि जो व्यक्ति परमात्मा की भक्ति में डूब जाता है, उसका जीवन सार्थक हो जाता है। भगवान के नाम का जाप करने से जीभ भी पवित्र हो जाती है। उन्होंने अपनी प्रज्ञा को जागृत करने और आत्मचिंतन करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भगवान की भक्ति में इतनी शक्ति है कि वह भक्त के सारे मनोरथ पूर्ण कर सकती है।

आचार्यश्री के पूर्व अंतरराष्ट्रीय रामस्नेही संप्रदाय के प्रखर वक्ता संत मनोरथरामजी आलोट ने मानस प्रवचन किया। प्रवचन के विश्राम पर श्रद्धालुओं ने आचार्यश्री रामदयालजी महाराज की आरती की। सत्संग में भीलवाड़ा सहित विभिन्न स्थानों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।

चातुर्मास के दौरान दैनिक सत्संग का समय सुबह 9 से 10 बजे तक है। रामधुनी के साथ सुबह 8.30 से 9 बजे तक वाणीजी का पाठ हो रहा है। सूर्यास्त के समय संध्या आरती और रामस्नेही संप्रदाय के युवा संत रामजस ईडर द्वारा भक्तमाल की कथा में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।

Rajesh Toshniwal, Bhilwara

Rajesh Toshniwal, Bhilwara

नाम: राजेश तोषनीवाल

वर्तमान पद: ब्यूरो चीफ (भीलवाड़ा)

कार्यक्षेत्र: भीलवाड़ा (राजस्थान)

बीट (मुख्य विषय): राजनीति, क्राइम, प्रशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य और बिज़नेस

परिचय 

राजेश तोषनीवाल राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के वरिष्ठ पत्रकार और ब्यूरो चीफ हैं। वह राजनीति, अपराध (क्राइम), स्थानीय प्रशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक गतिविधियों (बिज़नेस) सहित सभी मुख्य विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग करते हैं। मौके पर पहुंचकर सक्रियता से ग्राउंड रिपोर्टिंग करना उनकी मुख्य विशेषता है।

पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)

राजेश तोषनीवाल को पत्रकारिता के क्षेत्र में कुल 44 वर्षों का व्यापक अनुभव है।

  • वह पिछले 35 वर्षों से अधिक समय से 'प्रातःकाल' समाचार पत्र से निरंतर जुड़े हुए हैं।
  • इससे पूर्व उन्होंने 'दैनिक जागरण', 'नवभारत टाइम्स' सहित कई अन्य लोकल एवं राज्यस्तरीय मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं।

शैक्षणिक योग्यता (Education)

  • स्नातक (Graduate)
  • डिप्लोमा इन जर्नलिज्म (Diploma in Journalism)

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