भीलवाड़ा, 11 अगस्त। संसार की ओर ध्यान देने के बजाय संसार बनाने वाले परमात्मा की ओर ध्यान केंद्रित करने से जीवन का कल्याण संभव है। परमात्मा को अपनी भक्ति चाहिए और जो भक्त उसके प्रति असीम श्रद्धा व विश्वास रखता है, वह जीवन में आने वाले संकटों से सुरक्षित निकल जाता है। यह विचार अन्तरराष्ट्रीय रामस्नेही सम्प्रदाय शाहपुरा के पीठाघीश्वर जगतगुरू आचार्य स्वामी श्रीरामदयालजी महाराज ने मंगलवार को माणिक्यनगर रामद्वारा धाम में ‘‘विश्व शांति कल्याण’’ चातुर्मास के तहत आयोजित दैनिक सत्संग में व्यक्त किए।

आचार्यश्री ने कहा कि संसार की तरफ ध्यान मत दो, संसार बनाने वाले की तरफ ध्यान दो। उसकी तरफ ध्यान दे दिया तो वह प्रतिदिन 24 घंटे तुम्हारा ध्यान रखेगा, क्योंकि वह परमात्मा है। उसे कुछ नहीं, आपकी भक्ति चाहिए। भक्त के जीवन में भी सारे संकट आते हैं, लेकिन परमात्मा के प्रति असीम श्रद्धा और भक्ति होने से वह सारे संकटों से सुरक्षित बच निकलता है।



उन्होंने कहा कि महापुरुषों का चमत्कार नहीं होता तो कौन उनके सामने नतमस्तक होता। भक्त को उसके मन की भावना के अनुसार ही फल प्राप्त होता है। जिसकी जैसी भावना होगी, वैसा ही फल मिलेगा। इसलिए परमात्मा के प्रति हमारा विश्वास अटल और अडिग होना चाहिए।

आचार्य रामदयालजी महाराज ने कहा कि परमात्मा के साथ अपने संबंधों को जो जान लेता है, वह भक्त बन जाता है। परमात्मा से प्रीत करने के लिए मन में करुणा का भाव होना चाहिए। उन्होंने कहा कि तुम जैसे हो वैसे ही रहो, लेकिन परमात्मा के प्रति प्रीत में कमी नहीं होने दो। प्रीत उसी से होती है जिसे हम जानते हैं। महापुरुषों और भक्तों ने परमात्मा को जाना, इसीलिए उससे प्रीत करने लगे और इतिहास रच दिया। प्रीत के बिना परमात्मा का साक्षात्कार नहीं हो सकता।

उन्होंने कहा कि परमात्मा निराकार भी है और साकार भी, इस पर तर्क करने की जरूरत नहीं है। जीवन में सब कुछ है, लेकिन भक्ति नहीं है तो वह नीरस होगा। भोजन का स्वाद नमक से और जीवन का आनंद भक्ति से आता है।



आचार्यश्री ने कहा कि परमात्मा का कोई एक नाम नहीं हो सकता। उसे वाणीजी में भी कई नाम से पुकारा गया है। सुख का अभाव और दुःख का प्रभाव परमात्मा की भक्ति का अभिवादन करता है। परमात्मा भक्त से एक क्षण भी दूर नहीं रहता और उसकी कृपा अपने भक्त पर सदा बनी रहती है।

उन्होंने कहा कि अपने पैरों को भगवान की भक्ति के लिए दौड़ाना और अपने नेत्रों से दुनिया बनाने वाले के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त करना ही भक्ति है।

आचार्यश्री के प्रवचन से पूर्व अन्तरराष्ट्रीय रामस्नेही सम्प्रदाय के प्रखर वक्ता संत मनोरथरामजी आलोट ने मानस प्रवचन किया। कुछ श्रद्धालुओं ने भी भजन की प्रस्तुति दी। प्रवचन के विश्राम पर श्रद्धालुओं ने आचार्यश्री रामदयालजी महाराज की आरती की।

सत्संग में भीलवाड़ा सहित विभिन्न स्थानों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। चातुर्मास के दौरान दैनिक सत्संग का समय सुबह 9 से 10 बजे तक है। इसके साथ ही सुबह 8.30 से 9 बजे तक रामधुनी के साथ वाणीजी का पाठ हो रहा है। सूर्यास्त के समय संध्या आरती तथा रामस्नेही सम्प्रदाय के युवा संत रामजस ईडर द्वारा भक्तमाल की कथा में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।

Rajesh Toshniwal, Bhilwara

Rajesh Toshniwal, Bhilwara

नाम: राजेश तोषनीवाल

वर्तमान पद: ब्यूरो चीफ (भीलवाड़ा)

कार्यक्षेत्र: भीलवाड़ा (राजस्थान)

बीट (मुख्य विषय): राजनीति, क्राइम, प्रशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य और बिज़नेस

परिचय 

राजेश तोषनीवाल राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के वरिष्ठ पत्रकार और ब्यूरो चीफ हैं। वह राजनीति, अपराध (क्राइम), स्थानीय प्रशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक गतिविधियों (बिज़नेस) सहित सभी मुख्य विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग करते हैं। मौके पर पहुंचकर सक्रियता से ग्राउंड रिपोर्टिंग करना उनकी मुख्य विशेषता है।

पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)

राजेश तोषनीवाल को पत्रकारिता के क्षेत्र में कुल 44 वर्षों का व्यापक अनुभव है।

  • वह पिछले 35 वर्षों से अधिक समय से 'प्रातःकाल' समाचार पत्र से निरंतर जुड़े हुए हैं।
  • इससे पूर्व उन्होंने 'दैनिक जागरण', 'नवभारत टाइम्स' सहित कई अन्य लोकल एवं राज्यस्तरीय मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं।

शैक्षणिक योग्यता (Education)

  • स्नातक (Graduate)
  • डिप्लोमा इन जर्नलिज्म (Diploma in Journalism)

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