भीलवाड़ा, 5 सितम्बर। जैन कुल में जन्म लेने के बावजूद तीर्थंकरों के जीवन और उनके स्वरूप को जाने बिना उनके प्रति दृढ़ श्रद्धा और आस्था विकसित नहीं हो सकती। जब तक तीर्थंकरों को सही रूप से नहीं जाना जाएगा, तब तक मिथ्यात्व और भटकाव समाप्त नहीं होगा। ये विचार श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर ट्रस्ट, मैन सेक्टर शास्त्रीनगर के तत्वावधान में सकल दिगम्बर जैन समाज की ओर से भीलवाड़ा में पहली बार चातुर्मास कर रहे राष्ट्र संत मनोज्ञाचार्य पुलकसागरजी महाराज ने शनिवार को शास्त्रीनगर स्थित सूर्यमहल में चातुर्मासिक प्रवचन के दौरान व्यक्त किए।

आचार्य पुलकसागर महाराज ने कहा कि हम जैन कुल में जन्म लेने के कारण अपने भगवान तीर्थंकरों को मानते तो हैं, लेकिन उनके बारे में बहुत कम जानते हैं। जब तक उनके बारे में जानकारी नहीं होगी, तब तक उनके प्रति दृढ़ श्रद्धा और आस्था कैसे उत्पन्न होगी। उन्होंने कहा कि जिनके बारे में हम जानते नहीं हैं, उनके प्रति विश्वास कम और डाउट व संशय अधिक रहता है। शास्त्रों में इसी संशय को मिथ्यात्व कहा गया है।



उन्होंने कहा कि हम पूजा, आराधना और भक्ति के कार्य तो करते हैं, लेकिन मन में विश्वास कम और संशय अधिक रहता है कि इसका फल प्राप्त होगा या नहीं। हम तीर्थंकरों की पूजा तो करते हैं, लेकिन उनके बारे में जानते नहीं हैं। स्वाध्याय नहीं करने से ऐसी स्थिति उत्पन्न होती है। आचार्यश्री ने कहा कि जो स्वाध्याय में विश्वास नहीं रखता, उसे कोई भी मूर्ख बना सकता है।

आचार्य पुलकसागर महाराज ने कहा कि जीवन में कुछ चीजें श्रद्धा और विश्वास की होती हैं, कुछ अनुभूति की और कुछ दृश्यवान होती हैं। हमारा शरीर दृश्यवान है, आत्मा अनुभूति का विषय है और सिद्ध भगवान श्रद्धा का विषय हैं। इन तीनों पर जिस व्यक्ति को विश्वास हो जाए, उसे सम्यक दृष्टि कहा जाता है। सुख और दुःख अनुभूति मात्र हैं, जिन्हें देखा नहीं जा सकता, लेकिन महसूस किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि भगवान के प्रति हमारी श्रद्धा और विश्वास होता है। उनकी अनुभूति नहीं होती और उन्हें देखा भी नहीं जा सकता, लेकिन उनके अस्तित्व का भाव प्रबल होता है। सम्यक दर्शन जिसे प्राप्त हो जाता है, वह दृश्यवान और अदृश्यवान दोनों के बारे में जानता है।



आचार्य पुलकसागर महाराज ने कहा कि तीर्थंकरों के प्रति हमारी श्रद्धा अटूट और दृढ़ होनी चाहिए। तीनों लोकों की संपदा होने पर भी उनके भीतर राग, द्वेष, मोह और माया का भाव नहीं आता। तीर्थंकरों को न कोई हर्ष होता है और न कोई विषाद। उन्होंने कहा कि हमारे जीवन में पाखंड भरा होने और संशय नामक मिथ्यात्व गहरा होने के कारण तीर्थंकरों और धर्म के प्रति भी मन में डाउट बना रहता है।

उन्होंने कहा कि हम राम, सीता, चंदनबाला और मैनासुंदरी के जयकारे तो लगाते हैं, लेकिन उनके जैसा बनने और वैसा जीवन जीने की इच्छा नहीं रखते। शरीर का बनना और मिटना उसका स्वभाव है, जिसे पुद्गल कहा जाता है, जबकि आत्मा अजर-अमर होती है। पुद्गल दो प्रकार के होते हैं, शुभ और अशुभ। शुभ पुद्गल होने पर शरीर सुंदर दिखाई देता है और अशुभ पुद्गल होने पर शरीर बदसूरत दिखाई देता है। किसी से प्रेम और किसी से नफरत भी उसके पुद्गलों का परिणाम है।

उन्होंने कहा कि तीर्थंकरों के जीवन में पुण्य ही पुण्य होने के कारण उन्हें सुंदर शरीर और मीठी वाणी प्राप्त होती है। तीर्थंकर के गर्भ में आते ही माता को अवधि ज्ञान हो जाता है और उसके सारे कष्ट व कषाय दूर हो जाते हैं।

श्री पुलकसागर चातुर्मास समिति के अध्यक्ष प्रवीण चौधरी ने बताया कि आचार्य पुलकसागर महाराज के सानिध्य में पर्युषण (दशलक्षण) पर्व की साधना 16 से 25 सितम्बर तक सूर्यमहल में होगी। इस अवधि में दस दिवसीय पाप नाशनम शिविर का भी आयोजन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस शिविर के लिए अब तक सैकड़ों श्रावक-श्राविकाएं पंजीयन करा चुके हैं।

प्रवचन के शुरू में दीप प्रज्वलन, पाद प्रक्षालन एवं शास्त्र भेंट का सौभाग्य नरेश, नितिन और पीयूष गोधा परिवार ने प्राप्त किया। चातुर्मास समिति के संयोजक मनीष शाह एवं सह संयोजक लोकेश अजमेरा ने बताया कि प्रतिदिन चातुर्मासिक प्रवचन सुबह 8.30 से 10 बजे तक सूर्यमहल में हो रहे हैं। वहीं शाम 7 से 8 बजे तक आनंद यात्रा एवं आरती का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें शहर के विभिन्न क्षेत्रों से श्रद्धालु शामिल होकर लाभ प्राप्त कर रहे हैं।

Rajesh Toshniwal, Bhilwara

Rajesh Toshniwal, Bhilwara

नाम: राजेश तोषनीवाल

वर्तमान पद: ब्यूरो चीफ (भीलवाड़ा)

कार्यक्षेत्र: भीलवाड़ा (राजस्थान)

बीट (मुख्य विषय): राजनीति, क्राइम, प्रशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य और बिज़नेस

परिचय 

राजेश तोषनीवाल राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के वरिष्ठ पत्रकार और ब्यूरो चीफ हैं। वह राजनीति, अपराध (क्राइम), स्थानीय प्रशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक गतिविधियों (बिज़नेस) सहित सभी मुख्य विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग करते हैं। मौके पर पहुंचकर सक्रियता से ग्राउंड रिपोर्टिंग करना उनकी मुख्य विशेषता है।

पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)

राजेश तोषनीवाल को पत्रकारिता के क्षेत्र में कुल 44 वर्षों का व्यापक अनुभव है।

  • वह पिछले 35 वर्षों से अधिक समय से 'प्रातःकाल' समाचार पत्र से निरंतर जुड़े हुए हैं।
  • इससे पूर्व उन्होंने 'दैनिक जागरण', 'नवभारत टाइम्स' सहित कई अन्य लोकल एवं राज्यस्तरीय मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं।

शैक्षणिक योग्यता (Education)

  • स्नातक (Graduate)
  • डिप्लोमा इन जर्नलिज्म (Diploma in Journalism)

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