भीलवाड़ा। वस्त्र नगरी भीलवाड़ा के हृदय स्थल कहे जाने वाले जिला कलेक्ट्रेट के ठीक पीछे रेलवे ट्रैक के समीप गुरुवार रात उस वक्त हड़कंप मच गया, जब वहां एक अज्ञात महिला का सड़ा-गला शव बरामद हुआ। रेलवे बाउंड्री की सीमा के भीतर पड़े इस शव से उठती तीखी दुर्गंध ने आसपास के क्षेत्र में सनसनी फैला दी। शव की स्थिति इतनी भयावह है कि प्रथम दृष्टया यह अनुमान लगाया जा रहा है कि मृत्यु लगभग एक माह पूर्व हो चुकी है। इस रहस्यमयी मौत ने शहर की सुरक्षा व्यवस्था और कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

घटनाक्रम के अनुसार, गुरुवार को स्थानीय राहगीरों और निवासियों को कलेक्ट्रेट के पीछे रेलवे ट्रैक के पास से भारी दुर्गंध महसूस हुई। संदेह होने पर जब लोगों ने समीप जाकर देखा तो वहां एक महिला का क्षत-विक्षत शव पड़ा था। इसकी सूचना तत्काल स्थानीय प्रशासन को दी गई, जिसके बाद कोतवाली थाना पुलिस और जीआरपी (राजकीय रेलवे पुलिस) की टीमें आनन-फानन में मौके पर पहुंचीं। पुलिस ने घटनास्थल का घेराव कर साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया शुरू की और शव को अपने कब्जे में लिया।

शव की हालत अत्यंत जर्जर होने के कारण अभी तक मृतका की शिनाख्त नहीं हो पाई है। तलाशी के दौरान महिला के पास से ऐसा कोई भी दस्तावेज या पहचान पत्र बरामद नहीं हुआ है जिससे उसकी पहचान स्पष्ट हो सके। वर्तमान में जीआरपी पुलिस इस गुत्थी को सुलझाने के लिए दोहरे मोर्चे पर काम कर रही है। पुलिस के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती यह पता लगाना है कि यह मामला एक दुर्भाग्यपूर्ण हादसा है या फिर किसी सोची-समझी साजिश के तहत की गई हत्या। जांच अधिकारी इस पहलू पर भी गौर कर रहे हैं कि क्या महिला की मृत्यु इसी स्थान पर हुई थी या फिर कहीं और हत्या कर शव को साक्ष्य मिटाने के उद्देश्य से रेलवे बाउंड्री के भीतर फेंका गया है।

प्रशासनिक सक्रियता दिखाते हुए पुलिस ने आसपास के क्षेत्रों में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू कर दी है ताकि पिछले कुछ हफ्तों की संदिग्ध गतिविधियों का पता लगाया जा सके। फिलहाल शव को जिला अस्पताल की मोर्चरी में सुरक्षित रखवाया गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और मृतका की पहचान होने के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा हो सकेगा। कलेक्ट्रेट जैसे अति-संवेदनशील और व्यस्त क्षेत्र के पीछे हफ्तों तक शव का पड़ा रहना स्थानीय सुरक्षा तंत्र की मुस्तैदी पर भी एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगाता है। जीआरपी अब गुमशुदगी की पुरानी रिपोर्टों के आधार पर मृतका के तार जोड़ने का प्रयास कर रही है।

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Pratahkal Bureau

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