भीलवाड़ा: लकवे के दर्द से हारा जीवन, पचानपुरा में अधेड़ ने टीनशेड के फंदे पर झूलकर दी जान; गांव में पसरा मातम
भीलवाड़ा के पचानपुरा गांव में लकवे से पीड़ित 50 वर्षीय मदन लाल रैगर ने टीनशेड में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। बीमारी के तनाव के चलते उठाए गए इस कदम से गांव में सनसनी फैल गई है। बिजौलियां थाना पुलिस मामले की जांच कर रही है। पूरी रिपोर्ट पढ़ें कि कैसे एक गंभीर बीमारी ने एक अधेड़ को मौत के रास्ते पर धकेल दिया।

भीलवाड़ा। राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के पचानपुरा गांव से एक हृदयविदारक खबर सामने आई है, जिसने मानवीय संवेदनाओं को झकझोर कर रख दिया है। लंबे समय से लकवे की गंभीर बीमारी से जूझ रहे 50 वर्षीय मदन लाल रैगर ने बुधवार को अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। बीमारी की पीड़ा और मानसिक अवसाद के आगे घुटने टेकते हुए मदन लाल ने अपने ही बाड़े में बने टीनशेड के एंगल से फंदा लगाकर खुदकुशी कर ली। इस आत्मघाती कदम के बाद पूरे गांव में सन्नाटा पसरा हुआ है और हर कोई इस दुखद अंत से स्तब्ध है।
घटना के समय घर के अन्य सदस्य अपने दैनिक कार्यों में व्यस्त थे। बिजौलियां थाना के अधिकारी रामसिंह ने जानकारी दी कि बुधवार को मदन लाल घर पर अकेला था। परिवार के अन्य सदस्य खेतों में फसल की पिलाई (सिंचाई) करने गए हुए थे। इसी एकांत का लाभ उठाकर शारीरिक और मानसिक रूप से टूट चुके मदन लाल ने बाड़े की ओर रुख किया और मौत को गले लगा लिया। शाम को जब मृतक की पत्नी और भाभी थकी-हारी खेत से घर लौटीं, तो उनकी नजर बाड़े में लटके मदन लाल के शव पर पड़ी। उस भयावह दृश्य को देखते ही उनकी चीख निकल गई, जिसे सुनकर आसपास के ग्रामीण तुरंत मौके पर एकत्रित हो गए।
परिजनों ने आनन-फानन में मदन के शव को फंदे से नीचे उतारा और स्थानीय पुलिस को सूचित किया। सूचना मिलते ही रामसिंह के नेतृत्व में पुलिस टीम पचानपुरा पहुंची और घटनास्थल का मुआयना करने के बाद शव को कब्जे में लिया। पुलिस ने शव को बिजौलियां अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया है, जहां गुरुवार सुबह पोस्टमार्टम की प्रक्रिया संपन्न की जाएगी।
प्राथमिक जांच में सामने आया है कि मदन लाल पिछले काफी समय से लकवे (पैरालिसिस) की समस्या से जूझ रहा था। बीमारी के कारण शरीर की लाचारी और भविष्य की चिंता ने उसे गहरे तनाव में धकेल दिया था। हालांकि, पुलिस का कहना है कि आत्महत्या के सटीक कारणों का खुलासा विस्तृत जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही हो पाएगा। फिलहाल, इस घटना ने एक हंसते-खेलते परिवार को कभी न भरने वाला जख्म दे दिया है और पचानपुरा गांव में शोक की लहर दौड़ गई है।

Pratahkal Bureau
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