भीलवाड़ा। समाज सेवा की राह कांटों भरी होती है, लेकिन जब कोई व्यक्ति दो दशकों तक बिना किसी स्वार्थ के अपना सर्वस्व न्योछावर कर दे और प्रशासन उसे एक अदद प्रशस्ति पत्र के काबिल भी न समझे, तो व्यवस्था पर सवाल उठना लाजिमी है। भीलवाड़ा जिले के बनेड़ा उपखंड अंतर्गत उपरेड़ा निवासी मुबारक हुसैन मंसूरी आज एक ऐसी ही उपेक्षा की मिसाल बन गए हैं। बीते 20 वर्षों से अधिक समय से शिक्षा, स्वास्थ्य और पर्यावरण की अलख जगाने वाले इस 'मसीहा' की झोली आज भी सरकारी सम्मान से खाली है, जबकि उनकी कलम और संघर्ष ने हजारों चेहरों पर मुस्कान बिखेरी है।

मुबारक हुसैन मंसूरी की समाज सेवा का फलक इतना व्यापक है कि इसमें सड़क, पेयजल, कृषि और पशुपालन से लेकर रेलवे तक की बुनियादी समस्याएं समाहित हैं। उन्होंने महज शिकायतें नहीं कीं, बल्कि जनसंपर्क पोर्टल, मुख्यमंत्री पोर्टल और 181 सेवा जैसे माध्यमों का उपयोग कर शासन-प्रशासन की नींद उड़ाई। उनके द्वारा भेजे गए हजारों पत्राचार और सुझावों का ही परिणाम है कि आज क्षेत्र की कई जटिल समस्याओं का समाधान हो चुका है। सर्वधर्म समभाव के प्रतीक मंसूरी ने न केवल वंचित वर्गों की आवाज बुलंद की, बल्कि मंसूरी समाज के उत्थान और शिक्षा के प्रसार के लिए भी अपना जीवन समर्पित कर दिया।

उनके संघर्ष की पराकाष्ठा वर्ष 2023 में देखने को मिली, जब उन्होंने भीषण गर्मी की परवाह किए बिना मंसूरी विकास बोर्ड के गठन की मांग को लेकर भीलवाड़ा से जयपुर तक की पैदल यात्रा कर सत्ता के गलियारों को हिला दिया था। सिर्फ सामाजिक सुधार ही नहीं, बल्कि मानवता की रक्षा के लिए वे वर्ष 1998 से 2025 तक कुल 34 बार रक्तदान कर चुके हैं। पर्यावरण के प्रति उनकी अटूट श्रद्धा ने उन्हें वन्यजीव सुरक्षा और सघन वृक्षारोपण अभियानों का अग्रदूत बना दिया है। इसके साथ ही, वे मृत्यु भोज जैसी कुप्रथाओं के खिलाफ समाज में एक मौन क्रांति का नेतृत्व कर रहे हैं।

हैरानी की बात यह है कि अलग-अलग राजनीतिक दलों की सरकारें आईं और गईं, लेकिन किसी ने भी इस निस्वार्थ साधक की सुध नहीं ली। न तो 15 अगस्त के स्वतंत्रता दिवस समारोह में और न ही 26 जनवरी के गणतंत्र दिवस पर कभी प्रशासन ने उन्हें मंच पर बुलाकर सम्मानित करना उचित समझा। आज क्षेत्रवासियों और समाज के प्रबुद्ध जनों में इस अनदेखी को लेकर गहरा असंतोष है। लोगों की मांग है कि उपखंड एवं जिला प्रशासन को मुबारक हुसैन मंसूरी की समाज सेवा की एक विस्तृत पत्रावली तैयार कर राज्य और राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कारों के लिए भेजनी चाहिए। यह सम्मान केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि उन हजारों कार्यकर्ताओं के मनोबल की जीत होगी जो बिना किसी लोभ के समाज को बदलने का सपना देखते हैं।

Rajesh Toshniwal, Bhilwara

Rajesh Toshniwal, Bhilwara

नाम: राजेश तोषनीवाल

वर्तमान पद: ब्यूरो चीफ (भीलवाड़ा)

कार्यक्षेत्र: भीलवाड़ा (राजस्थान)

बीट (मुख्य विषय): राजनीति, क्राइम, प्रशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य और बिज़नेस

परिचय 

राजेश तोषनीवाल राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के वरिष्ठ पत्रकार और ब्यूरो चीफ हैं। वह राजनीति, अपराध (क्राइम), स्थानीय प्रशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक गतिविधियों (बिज़नेस) सहित सभी मुख्य विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग करते हैं। मौके पर पहुंचकर सक्रियता से ग्राउंड रिपोर्टिंग करना उनकी मुख्य विशेषता है।

पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)

राजेश तोषनीवाल को पत्रकारिता के क्षेत्र में कुल 44 वर्षों का व्यापक अनुभव है।

  • वह पिछले 35 वर्षों से अधिक समय से 'प्रातःकाल' समाचार पत्र से निरंतर जुड़े हुए हैं।
  • इससे पूर्व उन्होंने 'दैनिक जागरण', 'नवभारत टाइम्स' सहित कई अन्य लोकल एवं राज्यस्तरीय मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं।

शैक्षणिक योग्यता (Education)

  • स्नातक (Graduate)
  • डिप्लोमा इन जर्नलिज्म (Diploma in Journalism)

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