भीलवाड़ा: मजदूरी के बहाने विवाहिता से दरिंदगी करने वाले 'हैवान' को 20 साल की कैद, मरा समझकर जंगल में छोड़ गए थे आरोपी

भीलवाड़ा। इंसानियत को शर्मसार और रूह को कंपा देने वाले एक जघन्य मामले में भीलवाड़ा की विशेष अदालत ने शनिवार को ऐतिहासिक न्याय सुनाया है। मजदूरी दिलाने के नाम पर एक असहाय विवाहिता को झांसा देकर जंगल में ले जाने और वहां उसके साथ सामूहिक बलात्कार, बर्बर मारपीट व लूटपाट करने वाले मुख्य आरोपी देवा उर्फ धोलिया माली को अदालत ने उसके पापों की सजा सुना दी है। विशिष्ट न्यायाधीश (अजा-जजा अत्याचार निवारण प्रकरण न्यायालय) ने इस नरपिशाच को 20 साल के कठोर कारावास की सजा के साथ 81 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। यह फैसला समाज में उन अपराधियों के लिए एक कड़ा संदेश है जो महिलाओं की लाचारी का फायदा उठाकर उनकी अस्मत से खिलवाड़ करते हैं।

इस रोंगटे खड़े कर देने वाली वारदात की शुरुआत 21 जुलाई 2021 को हुई थी। गुलाबपुरा थाना सर्किल के एक चौराहे पर 30 वर्षीय पीड़ित महिला अपने परिवार के भरण-पोषण के लिए मजदूरी की तलाश में खड़ी थी। तभी मोटरसाइकिल पर सवार होकर दो शिकारी, तेजू नायक और देवा उर्फ धोलिया माली वहां पहुंचे। उन्होंने टेलीफोन एक्सचेंज के पास काम दिलाने का झांसा देकर महिला का विश्वास जीता। भोली-भाली महिला उनकी बातों में आ गई और उनके साथ मोटरसाइकिल पर बैठ गई। आरोपी उसे 29 मील चौराहे से होते हुए भीलवाड़ा-आसींद मार्ग की ओर सुनसान रास्तों पर ले गए।

दरिंदगी का यह मंजर तब और खौफनाक हो गया जब आरोपी महिला को कच्चे रास्तों से होते हुए घने खेतों और जंगल की ओर ले गए। वहां एक आरोपी मोटरसाइकिल लेकर निगरानी के लिए सड़क की तरफ लौट गया, जबकि देवा उर्फ धोलिया माली ने महिला को एकांत में पाकर अपनी हवस का शिकार बनाने की कोशिश की। जब महिला ने दूसरी मजदूर महिला के बारे में पूछा, तो आरोपी ने अपना मुखौटा उतार फेंका। उसने महिला को जमीन पर पटककर बेरहमी से पीटा, उसका गला दबाया और उसके कपड़े फाड़कर उसके साथ सामूहिक बलात्कार जैसी घिनौनी वारदात को अंजाम दिया।

हैवानियत यहीं नहीं रुकी; आरोपियों ने महिला के मुंह में कपड़ा ठूंस दिया ताकि उसकी चीखें बाहर न जा सकें। दरिंदों ने उसके कान के टॉप्स, गले की चांदी की चैन, पर्स में रखे 430 रुपये, टिफिन और ओढ़नी तक लूट ली। वारदात के बाद आरोपियों ने महिला को मृत समझ लिया और साक्ष्य मिटाने या उसे पूरी तरह लाचार करने के लिए उसके हाथों पर भारी पत्थर रख दिए और मौके से फरार हो गए। करीब डेढ़ घंटे बाद जब बारिश की बूंदें महिला के चेहरे पर पड़ीं, तब उसे होश आया। उसने खुद को लहूलुहान और खून से लथपथ हालत में एक गड्ढे में पाया।

मौत के मुंह से बाहर निकलकर पीड़िता ने अदम्य साहस का परिचय दिया। वह किसी तरह रेंगते हुए गड्ढे से बाहर निकली और वहां से गुजर रहे एक बुजुर्ग व्यक्ति व महिला की मदद से अपने समाज के लोगों तक पहुंची। गंभीर हालत में उसे गुलाबपुरा अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसकी जान बच सकी। महिला थाने में दर्ज बयानों के बाद पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए सीसीटीवी फुटेज और मोटरसाइकिल के नंबरों के आधार पर जांच शुरू की। पुलिस की तफ्तीश में सामने आया कि मोटरसाइकिल तेजू पुत्र काना नायक की थी।

न्यायालय में मामले की पैरवी विशिष्ट लोक अभियोजक दिनेश कुमार जोशी ने की। उन्होंने अभियोजन पक्ष की ओर से 31 गवाहों और 51 महत्वपूर्ण दस्तावेजों को पेश कर आरोपी के खिलाफ आरोपों को पुख्ता तरीके से सिद्ध किया। तमाम साक्ष्यों और पीड़िता के बयानों को आधार मानते हुए अदालत ने गणेशपुरा निवासी देवा उर्फ धोलिया पुत्र शंकर माली को दोषी करार देते हुए जेल भेज दिया। हालांकि, इस जघन्य कांड का दूसरा आरोपी तेजू पुत्र काना नायक, जो मूल रूप से तहनाल और वर्तमान में आसन्न (बिजय नगर) का निवासी है, अभी भी पुलिस की पकड़ से दूर है। अदालत के इस सख्त फैसले ने पीड़ित परिवार को न्याय की उम्मीद दी है, वहीं फरार आरोपी की तलाश में पुलिस अब भी दबिश दे रही है।

Pratahkal Bureau

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