भीलवाड़ा: 17 वर्षों की सेवा का सिला 'अनदेखी', 108-104 एंबुलेंस कर्मियों ने सरकार के खिलाफ फूंका बिगुल
भीलवाड़ा में 108-104 एंबुलेंस कर्मियों ने 17 साल की सेवा के बाद भी नियमितीकरण न होने पर मोर्चा खोल दिया है। हाईकोर्ट के आदेश और वित्त मंत्री दीया कुमारी के पास फाइल लंबित होने के बावजूद स्कैनिंग प्रक्रिया से बाहर रखे जाने पर कर्मचारियों ने उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है। जानिए इन एंबुलेंस वॉरियर्स के संघर्ष की पूरी कहानी।

भीलवाड़ा। राजस्थान की चिकित्सा व्यवस्था की रीढ़ और संकट के समय 'जीवनरेखा' कहलाने वाली 108 व 104 एंबुलेंस सेवाओं के पहिए अब आक्रोश की कगार पर हैं। प्रदेश के हजारों मरीजों को अस्पताल पहुंचाकर नया जीवन देने वाले इन एंबुलेंस वॉरियर्स ने अब अपने ही अस्तित्व और हक की रक्षा के लिए आर-पार की जंग का ऐलान कर दिया है। बीते 17 वर्षों से दिन-रात आपातकालीन सेवाएं देने वाले इन कर्मचारियों ने जिला कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर व्यवस्था में व्याप्त गंभीर भेदभाव को उजागर किया है।
इस संघर्ष की जड़ें राजस्थान उच्च न्यायालय के उस फैसले से जुड़ी हैं, जिसे न्याय की उम्मीद माना गया था। कर्मचारियों का कहना है कि वर्ष 2022 में माननीय राजस्थान उच्च न्यायालय, जोधपुर ने उनके पक्ष में एक ऐतिहासिक और स्पष्ट निर्णय सुनाया था। इस आदेश की प्रमाणित प्रति दिसंबर 2025 में ही मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को सुपुर्द कर दी गई थी, लेकिन प्रशासनिक शिथिलता का आलम यह है कि महीनों बीत जाने के बाद भी उन्हें 'राजस्थान कॉन्ट्रैक्चुअल हायरिंग टू सिविल पोस्ट रूल्स, 2022' के दायरे में शामिल नहीं किया गया है।
सरकार की वर्तमान नीतियों पर सवाल उठाते हुए कर्मचारियों ने आरोप लगाया है कि वर्तमान में 5 से 10 वर्ष का अनुभव रखने वाले संविदा व प्लेसमेंट एजेंसी कर्मियों की स्कैनिंग और सत्यापन की प्रक्रिया तेजी से चल रही है, किंतु 17 वर्षों के लंबे अनुभव वाले इन अनुभवी योद्धाओं को जानबूझकर इस प्रक्रिया से वंचित रखा गया है। कर्मचारियों ने इस दोहरे मापदंड को अपनी निष्ठा और मेहनत का अपमान करार दिया है। इस पूरे प्रकरण की फाइल वर्तमान में प्रदेश की उपमुख्यमंत्री और वित्त मंत्री श्रीमती दीया कुमारी के विभाग में विचाराधीन है। कर्मचारी प्रतिनिधियों का कहना है कि वे बार-बार इस संदर्भ में मुलाकात कर चुके हैं, लेकिन आश्वासन के सिवा अब तक कुछ भी हासिल नहीं हुआ है।
अपनी मांगों को पुरजोर तरीके से रखते हुए कर्मचारियों ने स्पष्ट किया है कि एनएचएम स्तर से उनके नाम तत्काल जारी कर उन्हें वर्तमान स्कैनिंग प्रक्रिया का हिस्सा बनाया जाए। वे चाहते हैं कि उच्च न्यायालय के आदेशों की अक्षरशः पालना हो और वर्षों की अनिश्चितता के बाद अब उन्हें सेवा सुरक्षा का अधिकार मिले। कोरोना जैसी वैश्विक महामारी में जब दुनिया घरों में कैद थी, तब अपनी जान हथेली पर रखकर मरीजों की सेवा करने वाले इन योद्धाओं ने चेतावनी दी है कि यदि उनके विनियमितीकरण पर शीघ्र ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो यह शांतिपूर्ण प्रदर्शन आने वाले समय में एक उग्र आंदोलन का रूप ले लेगा, जिसकी समस्त जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।

Rajesh Toshniwal, Bhilwara
नाम: राजेश तोषनीवाल
वर्तमान पद: ब्यूरो चीफ (भीलवाड़ा)
कार्यक्षेत्र: भीलवाड़ा (राजस्थान)
बीट (मुख्य विषय): राजनीति, क्राइम, प्रशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य और बिज़नेस
परिचय
राजेश तोषनीवाल राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के वरिष्ठ पत्रकार और ब्यूरो चीफ हैं। वह राजनीति, अपराध (क्राइम), स्थानीय प्रशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक गतिविधियों (बिज़नेस) सहित सभी मुख्य विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग करते हैं। मौके पर पहुंचकर सक्रियता से ग्राउंड रिपोर्टिंग करना उनकी मुख्य विशेषता है।
पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)
राजेश तोषनीवाल को पत्रकारिता के क्षेत्र में कुल 44 वर्षों का व्यापक अनुभव है।
- वह पिछले 35 वर्षों से अधिक समय से 'प्रातःकाल' समाचार पत्र से निरंतर जुड़े हुए हैं।
- इससे पूर्व उन्होंने 'दैनिक जागरण', 'नवभारत टाइम्स' सहित कई अन्य लोकल एवं राज्यस्तरीय मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं।
शैक्षणिक योग्यता (Education)
- स्नातक (Graduate)
- डिप्लोमा इन जर्नलिज्म (Diploma in Journalism)
