कृष्ण-सुदामा मित्रता दुर्लभ, संत दिग्विजयराम ने किया भागवत कथा का विश्राम
भीलवाड़ा में सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा का सुदामा चरित्र और परीक्षित मोक्ष प्रसंग के साथ समापन हुआ, जहाँ संत ने सच्ची मित्रता और भक्ति का महत्व समझाया।

भीलवाड़ा के अग्रवाल उत्सव भवन में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के अंतिम दिन रविवार को व्यास पीठ से कथा वाचन करते हुए रामस्नेही संत श्री दिग्विजय रामजी महाराज।
भीलवाड़ा, 8 फरवरी। वर्तमान में सच्चे मित्र मिलना दुर्लभ है, जग में मित्रता हो तो कृष्ण-सुदामा जैसी। शहर के रोडवेज बस स्टेण्ड के पास अग्रवाल उत्सव भवन में रविवार को स्व. श्रीमती गीतादेवी तोषनीवाल चेरिटेबल ट्रस्ट भीलवाड़ा की ओर से आयोजित सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान सप्ताह के अंतिम दिन व्यास पीठ से चित्तौड़गढ़ रामद्वारा के रामस्नेही संत प्रखर वक्ता श्री दिग्विजय रामजी महाराज ने सुदामा चरित्र एवं परीक्षित मोक्ष प्रसंग का वाचन किया। महाआरती के साथ कथा का विश्राम हुआ।
मित्रता की परिभाषा और सुदामा चरित्र
संत श्री दिग्विजयरामजी महाराज ने सुदाम चरित्र प्रसंग सुनाते हुए मित्रता की परिभाषा समझाई और कहा:
- "सच्चा मित्र वहीं है जो हर दुःख-सुख में साथ रहे।"
- "सुदामा के चरणों का कांटा भगवान ने अपने मुख से निकाला। वर्तमान युग में ऐसा कौन है जो मित्र के दुःख को बांटने के लिए अपने सुख छोड़ दे।"
- "संसार वाले तो मित्रता की आड़ में कांटे चुभाते है लेकिन कांटे निकालने का कार्य भगवान गोविन्द करता है। मित्र उसी को बनाना चाहिए जिसका मन पवित्र हो।"
- "दरिद्र वहीं है जिसके पास भगवान रूपी धन नहीं है। कृष्ण जैसा मित्र जिसके पास हो वह सुदामा कभी दरिद्र नहीं हो सकता।"
कथा में सजीव झांकियों के माध्यम से दरिद्र सुदामा के द्वारिकाधीश भगवान कृष्ण से मिलने आने, भगवान के स्वयं उसे लेने द्वार पर जाने और भगवान कृष्ण द्वारा जल की बजाय आसूंओं से सुदामा के चरण धोने का प्रसंग साकार हुआ। इस दौरान माहौल भावनापूर्ण हो गया और "अरे द्वारपालों कन्हैया से कह दो दर पर सुदामा गरीब आ गया है", "चावल की पोटली लेकर आए मोहन के द्वार" जैसे भजनों ने माहौल भावमय कर दिया।
भस्मासूर वध एवं परीक्षित मोक्ष प्रसंग
महाराज ने भस्मासूर वध के संदर्भ में कहा कि भगवान शिव से वरदान प्राप्त कर जब भस्मासूर उन्हें ही भस्म करने का जतन करने लगा तो नारायण ने मोहिनी रूप धारण कर नृत्य करते हुए भस्मासूर का हाथ खूद के ही सिर पर ले जाने पर वह स्वयं ही भस्मीभूत हो गया। संत श्री ने कहा कि:
"अन्तर्मन से प्रभु का स्मरण करने से ही लोक और परलोक सुधर जाता हैं।"
उन्होंने बताया कि राजा शुकदेव मुनि ने भागवत के सप्तम दिवस राजा परिक्षित के मोक्ष का वर्णन किया।
आयोजन एवं आभार
- व्यास पीठ से कथा आयोजक तोषनीवाल परिवार के प्रति मंगल भावनाएं व्यक्त की गई।
- प्रारम्भ में तोषनीवाल परिवार द्वारा व्यासपीठ का पूजा अर्चना की गई। परिवार के सदस्यों व अन्य अतिथियों ने युवा संत का आशीर्वाद लिया।
- कृष्ण सुदामा की झांकी विशेष आकर्षण रही। वेदपीठ पर विराजित ठाकुर श्री चारभुजा का मनभावन श्रृंगार किया गया।
- आयोजक परिवार के रामस्वरूप तोषनीवाल, दीपक तोषनीवाल एवं शुभम तोषनीवाल ने आभार जताया।
- मंच संचालन पंडित अशोक व्यास ने किया।
पंच कुण्डीय श्री विष्णु महायज्ञ सम्पन्न
श्रीमद भागवत कथा ज्ञान सप्ताह के साथ प्रारंभ सात दिवसीय महामंगलकारी पंच कुण्डीय श्री विष्णु महायज्ञ की पूर्णाहुति रविवार को संत दिग्विजय रामजी महाराज के सानिध्य में हुई।
- महायज्ञ का संचालन: ज्ञायिक रत्न आचार्य पंडित गौरीशंकर शास्त्री एवं वैदिक विद्धान।
- यजमान: पहले दिन दीपक तोषनीवाल एवं तपन झंवर ने प्रधान कुंड में सजोड़ा आहुति दी।
- आहुतियां: पांच कुंडो पर प्रतिदिन 25 सजोड़ा श्रद्धालुओं ने 31 हजार आहुतियां दी। सात दिवसीय यज्ञ में करीब एक लाख 60 हजार आहुति दी गई।
डॉ. मिथिलेश नागर द्वारा संगीतमय सुंदरकांड
शनिवार रात कथा स्थल पर राष्ट्रीय संत नैनौराधाम के डॉ. मिथिलेश नागर के मुखारबिंद से संगीतमय सुंदरकांड पाठ का भव्य आयोजन किया गया। सुंदरकांड के माध्यम से संकटमोचन हनुमानजी महाराज की भक्ति के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे और सर्व सुख शांति एवं कष्ट दूर होने की मंगलकामना की गई। इस दौरान संत दिग्विजयरामजी महाराज का भी सानिध्य प्राप्त हुआ।

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