संत दिग्विजयरामजी का संदेश: जीवन में कष्टों के बावजूद न छूटें भक्ति और भजन
भीलवाड़ा के अग्रवाल उत्सव भवन में श्रीमद् भागवत कथा के दूसरे दिन संत दिग्विजयरामजी ने प्रारब्ध, भक्ति मार्ग और प्रभु कृपा पर आध्यात्मिक मार्गदर्शन दिया।

भीलवाड़ा के अग्रवाल उत्सव भवन में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के दूसरे दिन व्यास पीठ से श्रद्धालुओं को संबोधित करते रामस्नेही संत दिग्विजयरामजी महाराज।
भीलवाड़ा, 3 फरवरी। "जीवन में कितने भी कष्ट आ जाए भक्ति ओर भजन छूटने नहीं चाहिए।" भगवान हमारी परीक्षा लेते है ओर उस दिन भक्ति ओर भजन छूट जाए तो प्रभु कृपा से वंचित हो जाते है। भक्ति के मार्ग में बहुत कष्ट आते है पर अडिग रहते है तो परमात्मा की कृपा हो जाती है।
भक्ति और समर्पण का मूल मंत्र
- "जिस दिन आप प्रभु से याचना बंद कर उसे अपना मानने लगेंगे उस दिन से परमात्मा भी आपको अपना मान लेगा।"
- "मंदिर में प्रभु से संसार की तुच्छ वस्तुएं मांगने नहीं उससे अपने ह्दय में विराजित होने की प्रार्थना करने जाओ।"
ये विचार शहर के रोडवेज बस स्टेण्ड के पास अग्रवाल उत्सव भवन में मंगलवार को स्व. श्रीमती गीतादेवी तोषनीवाल चैरिटेबल ट्रस्ट के तत्वावधान में सात दिवसीय संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान सप्ताह के दूसरे दिन व्यास पीठ से कथा वाचन करते हुए रामद्वारा चित्तौड़गढ़ के रामस्नेही संत ओजस्वी प्रखर वक्ता श्री दिग्विजय रामजी महाराज ने व्यक्त किए।
कथा प्रसंग और आध्यात्मिक दर्शन
दूसरे दिन कपिल देवहुति संवाद, सती चरित्र व धु्रव चरित्र प्रसंग का वाचन किया गया। कथा में संत दिग्विजयरामजी महाराज ने कहा कि:
- जीवन में हमेशा परमात्मा के प्रति भरोसा रखे। दुःख, सुख, संपति, विपदा, आपदा ये सब प्रारब्ध के अनुसार प्राप्त होती है।
- संसार में रहते हुए भगवान का नाम लेने के लिए प्रतीक्षा नहीं करे क्योंकि समय कब पूरा हो जाएगा कोई नहीं जानता।
- दुनिया की भागादौड़ी के बीच काम करते हुए राम को याद कर लिया तो इस लोक के साथ परलोक भी सुधर जाएगा।
- "जो बीत गया उसका शोक मत करो क्योंकि परिस्थितियां दुःख नहीं देती उसका ठहराव पीड़ा देता है।"
- वर्तमान पर ध्यान दिया तो भविष्य स्वत ही सुधर जाएगा। जीवन में धर्म का आचरण श्रेष्ठ है क्योेंकि धर्म ही जीवन में आध्यात्म का मार्ग प्रशस्त करता है।
- जीवन में अनुकूलता ओर सुख मिले तो उसे हरि कृपा माने ओर जीवन में कष्ट आपदा आ जाए तो उसे हरि इच्छा मान स्वीकार करे।
- प्रभु भक्ति करते हुए मीरा की तरह सुख दुःख दोनों में प्रसन्न रहना सीख ले।
हरिकथा श्रवण के साथ संत दर्शन का सौभाग्य
श्रीमद् भागवत कथा के दूसरे दिन श्रद्धालुओं को कई संतों का सानिध्य प्राप्त हुआ:
- बड़ा रामद्वारा सूरसागर जोधपुर के संत रामप्रसाद महाराज।
- खेड़ापा पीठ के युवाचार्य गोविन्द शास्त्री।
- भीलवाड़ा के सिद्धबलि हनुमान मंदिर के महंत जोगेश्वरदास।
- हमीरगढ़ के महंत सागरदास महाराज।
- मुंगानाधाम के अनुजदास महाराज।
संतों ने व्यास पीठ का अभिनंदन किया और संत दिग्विजयरामजी ने उनका स्वागत करते हुए कहा कि कथा श्रवण से जीवन में भक्ति का प्रवेश होता है। संत विप्र सेवा ओर तीर्थाटन करने से भक्ति की प्राप्ति होती है। संतों का जहां प्राकट्य होता है वहीं तीर्थधाम होता है।
भजन और भक्ति रस की धारा
व्यास पीठ से जैसे ही भजन प्रारंभ होता, श्रद्धालुओं के कदम थिरकने लगते। संत दिग्विजयरामजी ने जब "मेरी झोपड़ी के भाग्य आज खुल जाएंगे राम आएंगे" भजन गाया तो सैकड़ों श्रद्धालु भाव विभोर होकर नृत्य करने लगे। कथा के दौरान अन्य प्रमुख भजन रहे:
- मोहन आओ तो सही गिरधर आओ तो सही।
- एकली खड़ी रे मीरा एकली खड़ी।
- भज ले मन नारायण नारायण हरि हरि।
- स्वामी रामचरणजी के चरणों की रज छूकर शाहपुरा जगत में पुण्यधाम हो गया।
- मंदिर में रहते हो भगवंत कभी बाहर भी आया जाया करो।
आगामी कार्यक्रम और व्यवस्था
दूसरे दिन की कथा विश्राम पर व्यास पीठ की आरती तोषनीवाल परिवार के सदस्यों एवं श्रद्धालुओं ने की। मंच संचालन पंडित अशोक व्यास ने किया।
- समय: प्रतिदिन दोपहर दो से शाम 6 बजे तक।
- बुधवार (तीसरा दिन): जड़भरत संवाद, नृसिंह अवतार और प्रहलाद चरित्र प्रसंग।
- गुरुवार: रात 8 बजे से कथा स्थल पर भव्य नंद महोत्सव।
पंच कुण्डीय श्री विष्णु महायज्ञ
महोत्सव परिसर में सात दिवसीय महामंगलकारी पंच कुण्डीय श्री विष्णु महायज्ञ दूसरे दिन भी जारी रहा। यह यज्ञ सुबह 8 से दोपहर 12.30 बजे तक ज्ञायिक रत्न आचार्य पंडित गौरीशंकर शास्त्री एवं वैदिक विद्धानों के तत्वावधान में हो रहा है।
यज्ञ में आहुति देने वाले मुख्य यजमान:
दीपक राधिका तोषनीवाल, संजय अनिता लड्ढ़ा, शुभम पारूल तोषनीवाल, तपन आरती झंवर, शिवकुमार संगीता काकानी, निलेश किरण काकानी, सुनील पूजा बांगड़ सहित तोषनीवाल परिवार के कई सदस्यों एवं श्रद्धालुओं ने सजोड़ा आहुति देकर सर्व मंगल एवं सुख शांति की कामना की।

Pratahkal Bureau
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