अशोक कोठारी ने विधानसभा में 'दीनदयाल चरागाह विकास योजना' की मांग रखी
भीलवाड़ा विधायक ने 10 हजार गांवों में चरागाह संरक्षण और जल संचयन के लिए राज्य स्तरीय अभियान चलाने और 'मरुधरा राजभूमि डिजिटल एटलस' का प्रस्ताव प्रस्तुत किया।

भीलवाड़ा 26 फरवरी। राजस्थान विधानसभा में पंचायतीराज एवं ग्रामीण विकास विषय पर चर्चा के दौरान भीलवाड़ा विधायक अशोक कोठारी ने राज्य में चरागाह एवं शमलात भूमि के संरक्षण, पुनर्जीवन और समग्र विकास को लेकर विस्तृत प्रस्ताव प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि राजस्थान तभी प्रगतिशील बनेगा जब किसान और पशुधन समृद्ध होंगे, और इसकी आधारशिला मजबूत चरागाह व्यवस्था है।
ऐतिहासिक गोचर भूमि की वर्तमान चुनौतियां
विधायक कोठारी ने कहा कि "रियासत काल में गोचर भूमि गौवंश संरक्षण के उद्देश्य से आरक्षित की गई थी, ताकि प्रत्येक गांव का पशुधन चारे और पानी की उपलब्धता से सुरक्षित रह सके। किंतु वर्तमान में अनेक स्थानों पर अतिक्रमण, जल संकट तथा अंग्रेजी बबूल और लेन्टाना जैसी विदेशी प्रजातियों के फैलाव के कारण चरागाह भूमि बंजर होती जा रही है, जिससे पशुपालकों और किसानों की आय पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।"
बजट घोषणाओं का स्वागत और डिजिटल नवाचार
उन्होंने राज्य सरकार द्वारा बजट में की गई घोषणाओं का स्वागत करते हुए कहा कि चरागाह, बंजर, बीहड़, श्मशान एवं अन्य सरकारी भूमि के सीमांकन और अतिक्रमण मुक्ति हेतु जीआईएस (GIS) आधारित डिजिटल रिकॉर्ड तैयार कर “मरुधरा राजभूमि डिजिटल एटलस” बनाने की घोषणा सराहनीय कदम है। साथ ही लगभग 5 हजार करोड़ रुपये की राशि से पर्यावरण संरक्षण, वर्षा जल संचयन एवं चरागाह विकास जैसे कार्यों को बढ़ावा देने की योजना ग्रामीण विकास की दिशा में महत्वपूर्ण सिद्ध होगी।
शमलात भूमि की स्थिति और सामुदायिक प्रयास
विधायक कोठारी ने सदन को अवगत कराया कि प्रदेश में 20 लाख हेक्टेयर से अधिक शमलात भूमि उपलब्ध है, जिसमें गोचर, नाड़ी, तालाबों की पाल, ओरण, देवबनी, चारणोट आदि क्षेत्र शामिल हैं। लंबे समय से उपेक्षा और अतिक्रमण के कारण इन क्षेत्रों की उत्पादकता घटती गई है, जिसका सीधा प्रभाव पशुधन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ा है। उन्होंने बताया कि अब सरकार के प्रयासों से सकारात्मक परिवर्तन दिखाई देने लगे हैं। बीज बैंक की पहल के माध्यम से गांव-गांव में देशी घास एवं पौधों के बीज एकत्र कर वर्षा ऋतु में चरागाहों और जल स्रोतों के आसपास रोपण किया जा रहा है। ग्राम पंचायतों, स्थानीय समुदायों और युवाओं की सक्रिय भागीदारी से कई स्थानों पर हरियाली लौटने लगी है।
भीलवाड़ा का सफल मॉडल: अमरतिया गांव की मिसाल
उन्होंने कहा कि भीलवाडा में लगभग 200 चरागाह विकास कार्य पंचायतों और सामाजिक संस्थाओं के सहयोग से प्रगति पर हैं। जिले के मांडलगढ़ तहसील के अमरतिया गांव का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा की "वहा पर भूमिगत जलस्तर, जो पहले 100 फीट से नीचे चला गया था, अब 20-25 फीट पर स्थिर है। पिछले 25 वर्षों से गांव में नई बोरिंग की आवश्यकता नहीं पड़ी है। इससे न केवल जल संकट कम हुआ है, बल्कि पशुपालकों की आय और दुग्ध उत्पादन में भी वृद्धि हुई है।"
"दीनदयाल चरागाह विकास योजना" का प्रस्ताव
विधायक कोठारी ने मांग की कि चरागाह विकास एवं जल संरक्षण कार्यों को ग्रामीण पारिस्थितिकी आधारभूत संरचना के रूप में मान्यता दी जाए तथा इन्हें राज्य स्तरीय अभियान का रूप दिया जाए। इसी संदर्भ में उन्होंने “दीनदयाल चरागाह विकास योजना” प्रारंभ करने का प्रस्ताव रखा। योजना के अंतर्गत गोचर एवं शमलात भूमि का संरक्षण, देशी चारा प्रजातियों का संवर्धन, नाड़ी-तालाब-बावड़ी संरक्षण, वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण तथा ग्रामीण समुदाय की भागीदारी सुनिश्चित करने का सुझाव दिया गया। प्रथम चरण में राज्य के 10 हजार गांवों का चयन कर चरणबद्ध कार्ययोजना लागू करने की मांग की गई।
सशक्त ग्रामीण अर्थव्यवस्था का संकल्प
उन्होंने कहा कि यह पहल केवल भूमि सुधार का विषय नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ पर्यावरण, सुरक्षित जल स्रोत और सशक्त ग्रामीण अर्थव्यवस्था का संकल्प है। यदि संगठित और निरंतर प्रयास किए जाएं तो राजस्थान की भूमि पुनः हरी-भरी हो सकती है और किसान-पशुपालकों की आय में स्थायी वृद्धि की जा सकती है।

Rajesh Toshniwal, Bhilwara
नाम: राजेश तोषनीवाल
वर्तमान पद: ब्यूरो चीफ (भीलवाड़ा)
कार्यक्षेत्र: भीलवाड़ा (राजस्थान)
बीट (मुख्य विषय): राजनीति, क्राइम, प्रशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य और बिज़नेस
परिचय
राजेश तोषनीवाल राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के वरिष्ठ पत्रकार और ब्यूरो चीफ हैं। वह राजनीति, अपराध (क्राइम), स्थानीय प्रशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक गतिविधियों (बिज़नेस) सहित सभी मुख्य विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग करते हैं। मौके पर पहुंचकर सक्रियता से ग्राउंड रिपोर्टिंग करना उनकी मुख्य विशेषता है।
पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)
राजेश तोषनीवाल को पत्रकारिता के क्षेत्र में कुल 44 वर्षों का व्यापक अनुभव है।
- वह पिछले 35 वर्षों से अधिक समय से 'प्रातःकाल' समाचार पत्र से निरंतर जुड़े हुए हैं।
- इससे पूर्व उन्होंने 'दैनिक जागरण', 'नवभारत टाइम्स' सहित कई अन्य लोकल एवं राज्यस्तरीय मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं।
शैक्षणिक योग्यता (Education)
- स्नातक (Graduate)
- डिप्लोमा इन जर्नलिज्म (Diploma in Journalism)
