डॉ. अंजली शर्मा के नेतृत्व में 50 ब्रिटिश-भारतीय गायकों की गांधी को श्रद्धांजलि
भीलवाड़ा की डॉ. अंजली शर्मा और गीतांजलि अकादमी ने 50 कलाकारों के साथ 'वैष्णव जन तो' भजन के माध्यम से महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर वैश्विक संदेश साझा किया।

महात्मा गांधी की पुण्यतिथि के अवसर पर गीतांजलि ललित कला अकादमी के बैनर तले डॉ. अंजली शर्मा तिवारी के निर्देशन में "वैष्णव जन तो" की प्रस्तुति देते ब्रिटिश-भारतीय कलाकार।
भीलवाड़ा, मूलचन्द पेसवानी
भारतीय संस्कृति और गांधीवादी मूल्यों का वैश्विक संदेश
भारतीय संस्कृति ने सदैव विश्व को अच्छे संस्कारों और मानवीय मूल्यों का पाठ पढ़ाया है। इन्हीं आदर्शों के कारण भारत को ‘जगद्गुरु’ कहा जाता है। सत्य, अहिंसा, करुणा और सेवा जैसे मूल्यों को महात्मा गांधी ने अपने जीवन और कार्यों के माध्यम से न केवल भारत में, बल्कि पूरी दुनिया में स्थापित किया। उनके इन्हीं विचारों को संगीत के माध्यम से जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास गीतांजलि ललित कला अकादमी यूनाइटेड किंगडम द्वारा किया गया है।
50 कलाकारों की सामूहिक प्रस्तुति और उद्देश्य
भीलवाड़ा जिले के गुलाबपुरा मूल की डॉ. अंजली शर्मा तिवारी के निर्देशन में गांधीजी के प्रिय भजन “वैष्णव जन तो” को आधार बनाकर 50 ब्रिटिश-जनित और ब्रिटिश-भारतीय विद्यार्थियों एवं कलाकारों ने सामूहिक रूप से एक संगीतमय प्रस्तुति दी है। यह प्रस्तुति 30 जनवरी को, महात्मा गांधी की पुण्यतिथि के अवसर पर जारी की गई। इसका उद्देश्य नई पीढ़ी को गांधीजी के विचारों से जोड़ना तथा संगीत के माध्यम से मानवता, नैतिकता और सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश देना है।
भजन का भावार्थ और निर्देशक की प्रेरणा
निर्देशक डॉ. अंजली शर्मा तिवारी ने बताया कि:
"“वैष्णव जन तो” भजन का भावार्थ दूसरों के दुख को अपना समझने और सेवा भाव से जीवन जीने की प्रेरणा देता है। यही कारण था कि यह भजन गांधीजी को अत्यंत प्रिय था। इसी भावना को केंद्र में रखकर गीतांजलि अकादमी ने इस परियोजना को साकार किया।"
गीतांजलि अकादमी और रचनात्मक टीम का नेतृत्व
अकादमी की निदेशक जयिता घोष ने इस कार्य का नेतृत्व करते हुए अकादमी के 50 प्रख्यात गायकों को एक मंच पर एकत्र किया। यह अकादमी न केवल भारतीय कला का संवर्धन कर रही है, बल्कि भारत के बाहर भी भारतीय संस्कृति और मूल्यों का प्रचार-प्रसार कर रही है।
इस परियोजना का रचनात्मक निर्देशन डॉ. अंजली शर्मा तिवारी और सुनील जाधव ने किया। उन्होंने संगीत और भावनाओं का ऐसा संतुलन स्थापित किया कि भजन की आत्मा और गांधीजी का संदेश दोनों समान रूप से उभरकर सामने आए। इसकी रिकॉर्डिंग और संगीत संयोजन कौशिक शुक्ला द्वारा मिल हिल स्टूडियो, लंदन में किया गया, जिससे प्रस्तुति को अंतरराष्ट्रीय स्तर की तकनीकी गुणवत्ता प्राप्त हुई।
सांस्कृतिक सेतु और शाश्वत संदेश
इस प्रस्तुति को “वैष्णव जन तो महात्मा गांधी को 50 ब्रिटिश-भारतीय आवाज़ों की संगीतमय श्रद्धांजलि” नाम दिया गया है। इसे “नई पीढ़ी की आवाज़ में शाश्वत संदेश” भी कहा जा सकता है, क्योंकि इसमें युवा कलाकारों ने सदियों पुराने मूल्यों को आधुनिक संदर्भ में प्रस्तुत किया है।
निर्देशक डॉ. अंजली शर्मा तिवारी ने बताया कि:
"इस सामूहिक गायन ने यह सिद्ध कर दिया कि संगीत सीमाओं में बंधा नहीं होता। यह प्रयास केवल एक गीत नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक सेतु है, जो पीढ़ियों और देशों को जोड़ता है।"
गीतांजलि अकादमी की यह पहल यह संदेश देती है कि भारतीय संस्कृति आज भी विश्व को दिशा दिखाने में सक्षम है। गांधीजी के विचारों को सुरों में पिरोकर प्रस्तुत किया गया यह प्रयास आने वाली पीढ़ियों को यह याद दिलाता है कि सच्ची सभ्यता वही है, जो मानवता को सर्वोपरि मानती है और सेवा को जीवन का आधार बनाती है।

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