भीलवाड़ा में उमड़ा आस्था का महासागर: दक्षिण भारतीय वैभव के बीच तिरुपति बालाजी का ऐतिहासिक पाटोत्सव संपन्न, पहली बार लगा छप्पन भोग
भीलवाड़ा के तिरुपति बालाजी मंदिर में 15वें पाटोत्सव पर दिखा दक्षिण भारतीय संस्कृति का अद्भुत वैभव। बसंत पंचमी पर पहली बार भगवान को अर्पित हुआ छप्पन भोग और अलौकिक श्रृंगार ने भक्तों को किया मंत्रमुग्ध। पूर्व सांसद सुभाष बहेड़िया सहित शहर के गणमान्य नागरिकों की मौजूदगी में संपन्न हुआ यह ऐतिहासिक धार्मिक आयोजन।

भीलवाड़ा। राजस्थान के वस्त्र नगरी भीलवाड़ा में स्थित तिरुपति बालाजी मंदिर में इस वर्ष बसंत पंचमी के पावन अवसर पर भक्ति और दिव्यता का एक ऐसा अनूठा संगम देखने को मिला, जिसने श्रद्धालुओं को दक्षिण भारत की पावन भूमि का साक्षात अनुभव करा दिया। स्थापना के 15 गौरवशाली वर्षों की अनवरत परंपरा को जीवंत रखते हुए इस वर्ष का पाटोत्सव न केवल भव्य था, बल्कि ऐतिहासिक भी बन गया। पहली बार भगवान तिरुपति बालाजी को छप्पन भोग अर्पित किया गया, जिसकी अलौकिक झांकी ने हर भक्त के हृदय को मंत्रमुग्ध कर दिया।
उत्सव का शुभारंभ प्रातःकाल वेदों की ऋचाओं और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधिवत अभिषेक के साथ हुआ। मंदिर परिसर को दक्षिण भारतीय शैली, विशेष पुष्प सज्जा और सांस्कृतिक प्रतीकों से इस प्रकार सजाया गया था कि संपूर्ण वातावरण तिरुमाला की पहाड़ियों जैसी दिव्यता बिखेर रहा था। अभिषेक के पश्चात भगवान का अलौकिक श्रृंगार किया गया, जिसमें स्वर्ण और पुष्पों की आभा देखते ही बनती थी। दोपहर सवा बारह बजे जब महाआरती का शंखनाद हुआ, तो उपस्थित जनसमूह की श्रद्धा अपने चरम पर थी। सामूहिक रूप से की गई इस आरती के बाद भक्तों में महाप्रसाद का वितरण किया गया।
इस आयोजन की सफलता में समाज के विभिन्न वर्गों का समर्पित सहयोग रहा। आयोजन को सफल बनाने में महेश पुरी, सुरेश तोषनीवाल, मुकेश गुर्जर, राधेश्याम तोषनीवाल, अशोक जोशी, अनिल बांगड़, प्रवीण अग्रवाल, संजय डाड और नीरव राठी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वहीं, महिला शक्ति के रूप में विनीता तोषनीवाल, अनीता गुर्जर, सुनीला जोशी, नीना अग्रवाल, तारा बांगड़, लीला गोस्वामी और रीना डाड ने पूर्ण समर्पण के साथ मोर्चा संभाला।
इस पावन अवसर पर शहर के कई गणमान्य व्यक्तियों की गरिमामयी उपस्थिति रही, जिनमें पूर्व सांसद सुभाष बहेड़िया, कैलाश कोठारी, अशोक बाहेती, रमेश राठी, सुशील मरोटिया, भैरूलाल काबरा, सत्यनारायण डाड, रमेश बाल्दी, मनोज तोषनीवाल, आशिष तोषनीवाल, भारती बाहेती, सुमन सोनी और सोनल माहेश्वरी शामिल थे। यह मंदिर वर्षों से लाखों भक्तों की अटूट आस्था का केंद्र बना हुआ है, और माना जाता है कि यहाँ सच्चे मन से की गई प्रार्थना जीवन के समस्त क्लेशों को हर लेती है। दक्षिण भारतीय पद्धति से संपन्न हुआ यह 15वां पाटोत्सव भीलवाड़ा की सांस्कृतिक विरासत में एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज हो गया है।

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