भीलवाड़ा। राजस्थान की धर्मनगरी भीलवाड़ा रविवार की रात उस समय पूर्णतः भक्ति के रंग में सराबोर हो गई, जब सर्व कष्टनिवारक महामंगलकारी श्री नाकोड़ा पार्श्वनाथ भगवान एवं श्री नाकोड़ा भैरव देव की चल प्रतिमाओं के नगर आगमन पर आयोजित 'महाभक्ति' संध्या ने श्रद्धा की गंगा प्रवाहित कर दी। बापू नगर स्थित श्री संभवनाथ जैन श्वेताम्बर मंदिर के प्रांगण में आयोजित इस अलौकिक आयोजन ने न केवल भक्ति की पराकाष्ठा को छुआ, बल्कि नववर्ष की प्रथम महाभक्ति के रूप में एक नया इतिहास रच दिया। भक्ति का सैलाब इस कदर उमड़ा कि विशाल पांडाल छोटा पड़ गया और हजारों की संख्या में मौजूद श्रद्धालुओं को जहां स्थान मिला, वहीं बैठकर वे प्रभु भक्ति की इस रसधारा में डूबने को आतुर दिखाई दिए।

कार्यक्रम का शुभारंभ नाकोड़ा दरबार में विराजित चल प्रतिमाओं के समक्ष श्री नाकोड़ा पारस एकतीसा, पावन जोत प्रज्वलन और श्री भैरव चालीसा के पाठ के साथ हुआ। गोविंद गुरावा द्वारा उच्चारित नमस्कार महामंत्र की गूंज ने वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार किया। इस भव्य आयोजन की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि शहर के विख्यात भजन गायक मनीष सोनी, गणेश सुराना 'लंकेश', निशा हिंगड़ और नाहर सिस्टर्स (चुनौती एवं आकांक्षा नाहर) पहली बार एक साथ एक मंच पर नजर आए। जैसे ही गणेश सुराना ने 'ओ तारणहारे नाकोड़ा वाले तुम बिन हमरा कौन यहां' भजन के साथ आगाज किया, पूरा पांडाल करतल ध्वनि से गूंज उठा।

भक्ति का यह सिलसिला तीन घंटे से भी अधिक समय तक अनवरत चलता रहा। निशा हिंगड़ ने 'म्हाने नाकोड़ा रा नाथ ने खम्मा ही खम्मा' और 'भैरू बाबा का प्यारा डमरू' जैसे भजनों से भक्तों को मंत्रमुग्ध कर दिया, वहीं नाहर सिस्टर्स ने 'मेरी झोपड़ी के भाग्य आज खुल जाएंगे दादा आएंगे' और 'हीरे मोतियां सू नजर उतार दो' के माध्यम से भक्ति का ऐसा समां बांधा कि भक्तगण भाव-विभोर हो उठे। गायक मनीष सोनी ने 'दरबार तेरा दादा जन्नत का नजारा है' और 'देना हो तो दीजिए जन्म जन्म का साथ' जैसे कर्णप्रिय भजनों से श्रोताओं को झूमने पर मजबूर कर दिया। कार्यक्रम के अंत में राष्ट्रभक्ति का अनूठा संगम देखने को मिला, जब 'संदेशे आते हैं' गीत के दौरान हजारों मोबाइल की टॉर्च जलाई गई, जिससे पूरा परिसर दीपों की माला की भांति चमक उठा।

इस दिव्य आयोजन में प्रतिमाओं की अंगरचना देशभक्ति की थीम पर की गई, जिसे वैदिक खजांची, अमन जैन, लक्षिता और जमुना विहार निवासी चेल्सी मेहता ने बड़ी निपुणता से सजाया था। संगीत की कमान नीमच के महावीर जैन, भोलू गन्धर्व की टीम और श्री कृष्णा साउंड ने संभाली। समारोह के समापन पर श्री नाकोड़ा पार्श्वनाथ भगवान की आरती का लाभ अंकित सुराणा व मोंटूजी ने लिया, जबकि श्री नाकोड़ा भैरव देव की आरती का सौभाग्य हर्षित चपलोत व अमन जैन को प्राप्त हुआ। इस सफल आयोजन में नीमच, निम्बाहेड़ा और बड़ी सादड़ी सहित आसपास के क्षेत्रों से भी श्रद्धालु पहुंचे।

मंच संचालन कुलदीप गुगलिया ने अपनी ओजस्वी शैली में किया। आयोजन समिति ने नई पीढ़ी के उत्साह को भी सराहा, जिसमें सोशल मीडिया प्रमोशन के लिए संयम कर्णावट, युग कावड़िया, नमन गोलेछा और कनिका गुगलिया को सम्मानित किया गया। साथ ही मंदिर पुजारी और वार्ड पार्षद इंदु टांक का भी अभिनंदन किया गया। इस भव्य भक्ति संध्या को सफल बनाने में बलवंत मेहता, मनीष बाफना, गुणवंत जैन, दिनेश गोलेछा, अनिल बिसलोत, दिलीप जैन, दर्शन तातेड़, गौरव डागा, विजय संचेती, संजय सिंघवी, रतन संचेती, संजय लोढ़ा, रतन रांका, सुनील कर्णावट, लक्ष्मण मेहता, विवेक खाब्या, जम्बू कोठारी, पंकज कोठारी, सचिन चपलोत, पवन लोढ़ा, जितेन्द्र आंचलिया, संदीप खमेसरा, नवीन नाहर, अग्रज बिराणी, लोकेश कर्णावट, मोनू सिंघवी, रोहित कर्णावट और ऋषभ जैन जैसे समर्पित भक्तों का अतुलनीय योगदान रहा। यह आयोजन भीलवाड़ा के इतिहास में श्रद्धा और सामूहिकता का एक अनुपम उदाहरण बनकर दर्ज हो गया।

Pratahkal Bureau

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