आचार्य रामदयालजी बोले- बेटियों से भेदभाव खत्म होगा, तभी शिक्षक दिवस मनाना सार्थक
माणिक्यनगर रामद्वारा में शिक्षक दिवस पर आचार्य रामदयालजी महाराज ने शिक्षक की भूमिका और बेटियों के प्रति भेदभाव खत्म करने का संदेश दिया। ‘फाइनेंस के लड्डु’ के द्वितीय संस्करण का विमोचन हुआ और 13 सितम्बर से भागवत ज्ञान सप्ताह होगा।

तस्वीर में अंतरराष्ट्रीय रामस्नेही संप्रदाय के पीठाधीश्वर जगतगुरु आचार्य स्वामी श्रीरामदयालजी महाराज माणिक्यनगर रामद्वारा धाम में मंच पर विराजमान होकर सत्संग को संबोधित करते हुए नजर आ रहे हैं।
भीलवाड़ा, 5 सितम्बर। शिक्षक की एक भूल का असर पूरे राष्ट्र पर पड़ सकता है, क्योंकि शिक्षक पर राष्ट्र निर्माण की जिम्मेदारी होती है। शिक्षक ही बच्चे का जीवन संवारने और उसके गुणों को निखारने का कार्य करता है। जो व्यक्ति अपने शिक्षक को परमात्मा का रूप मानकर उनके प्रति श्रद्धाभाव रखता है, उसकी प्रगति को परमात्मा भी नहीं रोक सकते। हमें अपने शिक्षक के प्रति सदैव निष्ठावान रहना चाहिए। यह विचार अन्तरराष्ट्रीय रामस्नेही सम्प्रदाय शाहपुरा के पीठाघीश्वर जगतगुरू आचार्य स्वामी श्रीरामदयालजी महाराज ने ‘‘विश्व शांति कल्याण’’ चातुर्मास के तहत शनिवार को शिक्षक दिवस के अवसर पर माणिक्यनगर रामद्वारा धाम में आयोजित दैनिक सत्संग में समाज में शिक्षक की भूमिका पर चर्चा करते हुए व्यक्त किए।
आचार्यश्री ने कहा कि इंजीनियर, वकील या डॉक्टर की भूल से किसी व्यक्ति को नुकसान पहुंच सकता है या उसकी भरपाई हो सकती है, लेकिन शिक्षक की एक भूल का प्रभाव पूरे राष्ट्र पर पड़ता है। उन्होंने कहा कि मां अपने बच्चे की सबसे बड़ी शिक्षक होती है। मां की शिक्षा से ही वीर शिवाजी और राणा प्रताप जैसे महापुरुष तैयार होते हैं। उन्होंने समय को सबसे बड़ा शिक्षक बताते हुए कहा कि समय प्रभावी रूप से सिखाता है।
आचार्यश्री ने पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का स्मरण करते हुए कहा कि उन्होंने शिक्षा जगत को नई ऊंचाई प्रदान की। उनका चिंतन इतना गहन और गंभीर था कि वे कहते थे कि उन्हें राष्ट्रपति के रूप में नहीं, बल्कि शिक्षक के रूप में पहचाना जाए। ऐसे लोगों के विचारों में दल नहीं, देश जीवित होता है।
उन्होंने कहा कि हमारी वर्तमान राष्ट्राध्यक्षा द्रोपदी मुर्मु में अहंकार शून्य ज्ञानपूर्व जीवन की झलक मिलती है और उन्होंने राष्ट्रपति के रूप में नारी जगत का गौरव बढ़ाया है। आचार्यश्री ने कहा कि हमारा शिक्षक दिवस, जन्माष्टमी आदि पर्व मनाना तभी सार्थक होगा, जब समाज में बेटियों से भेदभाव और कन्या भ्रूण हत्या का कलंक हमेशा के लिए मिट जाएगा।
आचार्य रामदयालजी महाराज ने कहा कि यदि कन्या नहीं होती तो मीराबाई, झांसी की रानी लक्ष्मीबाई, भक्तिमति द्रोपदी, सती अनुसूया, हाड़ा रानी और कल्पना चावला जैसी वीरांगनाएं और प्रतिभाएं कहां से आतीं। भारतीय नारियों जैसा क्रांतिकारी इतिहास विश्व में कहीं की नारियों का नहीं होने के पीछे आधारभूत तत्व शिक्षा था।
आचार्य रामदयाल महाराज ने कहा कि भगवान भी कपिल अवतार में शिक्षक बनकर आए और सारे संसार को शिक्षा प्रदान की। कपिल भगवान और उनकी माता का भगवत भक्ति संवाद भागवत का प्राण है। भागवत नाम का स्मरण करने से हर संकट से मुक्ति प्राप्त की जा सकती है। परमात्मा साधक की साधना को देखते हैं। जीवन में भजन करते रहो, सुख, शांति एवं आनंद की प्राप्ति होगी। भजन करने से व्यक्ति की मानसिकता भी बदलती है। परमात्मा के प्रति हमारा विश्वास ही फल का प्रदाता है।
आचार्यश्री ने किया ‘फाइनेंस के लड्डु’ पुस्तक के द्वितीय संस्करण का विमोचन
सत्संग के दौरान आचार्य रामदयाल महाराज ने मुंबई प्रवासी भीलवाड़ा निवासी कपिल लड्ढ़ा द्वारा लिखित पुस्तक ‘फाइनेंस के लड्डु’ के द्वितीय संस्करण का विमोचन किया। उन्होंने रामस्नेही भक्त बद्रीनारायण लड्ढ़ा के पुत्र पुस्तक लेखक कपिल के प्रति मंगलभावनाएं व्यक्त कीं। विमोचन करने वालों में संतों के साथ चातुर्मास समिति के पदाधिकारी भी शामिल रहे।
पुस्तक में वित्त जैसे विषय को सहज और सरल भाषा में समझाया गया है। इसमें बताया गया है कि सही जानकारी और समझ के साथ पैसे का प्रबंधन किया जाए तो जीवन में पछताना नहीं पड़ेगा। सत्संग में बताया गया कि इस पुस्तक से प्राप्त होने वाला पूरा पैसा सामाजिक कार्यों में समर्पित किया जाएगा। विमोचन समारोह का संचालन रामनारायण लड्ढ़ा ने किया।
आचार्यश्री से पूर्व अन्तरराष्ट्रीय रामस्नेही सम्प्रदाय के प्रखर वक्ता संत मनोरथरामजी आलोट ने मानस प्रवचन किया। प्रवचन के विश्राम पर श्रद्धालुओं ने आचार्यश्री रामदयालजी महाराज की आरती की। सत्संग में भीलवाड़ा सहित विभिन्न स्थानों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
माणिक्यनगर रामद्वारा धाम में प्रतिदिन रामधुनी के साथ सुबह 8.30 से 9 बजे तक वाणीजी का पाठ हो रहा है। सूर्यास्त के समय संध्या आरती और रामस्नेही सम्प्रदाय के युवा संत रामजस ईडर द्वारा भक्तमाल की कथा में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।
13 सितम्बर से होगा श्रीमद् भागवत ज्ञान सप्ताह
आचार्य स्वामी श्रीरामदयालजी महाराज के सानिध्य में माणिक्यनगर रामद्वारा में ‘‘विश्व शांति कल्याण’’ चातुर्मास के तहत विश्व शांति एवं कल्याण की भावना से 13 से 20 सितम्बर तक विराट श्रीमद् भागवत ज्ञान सप्ताह का आयोजन होगा। इस दौरान 108 भागवत मूल पाठ का ऐतिहासिक आयोजन भी होगा।
पुष्कर से आने वाले 108 वेद पाठी विद्वान भागवत का मूल पाठ करेंगे। इन 108 भागवत का पूजन 108 यजमान परिवार करेंगे। सप्ताह के दौरान प्रतिदिन सुबह 8.30 से 10.30 बजे तक एवं दोपहर 2 से 4 बजे तक श्रीमद् भागवत कथा होगी। वहीं सुबह 10.30 बजे से 11.30 बजे तक एवं शाम को 4 से 5 बजे तक श्रीवाणीजी का प्रवचन होगा।
श्रीवाणीजी का प्रवचन आचार्य श्री रामदयालजी महाराज के मुखारबिंद से होगा, जबकि श्रीमद् भागवत कथा का वाचन संत मनोरथराम रामजी राम मचलाना द्वारा किया जाएगा। माणिक्यनगर रामद्वारा में आयोजित यह धार्मिक आयोजन 13 से 20 सितम्बर तक विश्व शांति एवं कल्याण की भावना के साथ चलेगा।

Rajesh Toshniwal, Bhilwara
नाम: राजेश तोषनीवाल
वर्तमान पद: ब्यूरो चीफ (भीलवाड़ा)
कार्यक्षेत्र: भीलवाड़ा (राजस्थान)
बीट (मुख्य विषय): राजनीति, क्राइम, प्रशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य और बिज़नेस
परिचय
राजेश तोषनीवाल राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के वरिष्ठ पत्रकार और ब्यूरो चीफ हैं। वह राजनीति, अपराध (क्राइम), स्थानीय प्रशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक गतिविधियों (बिज़नेस) सहित सभी मुख्य विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग करते हैं। मौके पर पहुंचकर सक्रियता से ग्राउंड रिपोर्टिंग करना उनकी मुख्य विशेषता है।
पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)
राजेश तोषनीवाल को पत्रकारिता के क्षेत्र में कुल 44 वर्षों का व्यापक अनुभव है।
- वह पिछले 35 वर्षों से अधिक समय से 'प्रातःकाल' समाचार पत्र से निरंतर जुड़े हुए हैं।
- इससे पूर्व उन्होंने 'दैनिक जागरण', 'नवभारत टाइम्स' सहित कई अन्य लोकल एवं राज्यस्तरीय मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं।
शैक्षणिक योग्यता (Education)
- स्नातक (Graduate)
- डिप्लोमा इन जर्नलिज्म (Diploma in Journalism)
