जीवन में परमात्मा के अलावा कोई सच्चा मित्र नहीं हो सकता। अविनाशी परमात्मा के साथ दृढ़ मित्रता और स्नेह होना चाहिए, जबकि स्वार्थ पर आधारित मित्रता कभी टिकती नहीं। विश्वासघात को संसार का सबसे भयंकर पाप बताते हुए अन्तरराष्ट्रीय रामस्नेही सम्प्रदाय शाहपुरा के पीठाघीश्वर जगतगुरू आचार्य स्वामी श्रीरामदयालजी महाराज ने कहा कि विश्वासघाती व्यक्ति को दुनिया में कोई क्षमा नहीं करता और ऐसा व्यक्ति कभी शांति प्राप्त नहीं कर सकता।

भीलवाड़ा, 21 अगस्त। माणिक्यनगर रामद्वारा धाम में ‘‘विश्व शांति कल्याण’’ चातुर्मास के तहत शुक्रवार को आयोजित दैनिक सत्संग में आचार्य रामदयालजी महाराज ने सखा भक्ति पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि जीवन में सखा वही होता है जो खास होता है। जिसका विनाश तय है, उसके साथ मित्रता नहीं हो सकती। अजर-अमर-अविनाशी परमात्मा के अलावा हमारा दूसरा कोई मित्र नहीं हो सकता। अविनाशी परमात्मा के साथ हमारी दृढ़ मित्रता और स्नेह होना चाहिए। सखा भाव समान रहे तो उसमें कभी विषमता नहीं आती। सखा भक्ति सर्वोच्च भक्ति होती है।

आचार्यश्री ने कहा कि परमात्मा और हमारा संबंध जन्म-जन्म का है, जबकि बाकी सभी संबंध पीछे छूट जाते हैं। स्वार्थ वाली मित्रता कभी टिकती नहीं है। परमात्मा से मित्रता करो, क्योंकि न वह मरता है, न बिछुड़ता है और न आगे होकर मित्रता तोड़ता है। महात्मा परमात्मा कभी पकड़ते नहीं हैं और पकड़ लेते हैं तो जन्मों-जन्म तक अपना बनाकर रखते हैं, कभी छोड़ते नहीं हैं।]








उन्होंने कहा कि स्वामी रामचरण महाराज ने सखा भक्ति के बारे में बताया है कि हमारा मन और विचार ही हमारा मित्र व शत्रु है और वही किसी को शत्रु तथा किसी को मित्र बनाता है। इसलिए सबसे पहले अपने मन और विचार को मित्र बनाना चाहिए। परमात्मा से श्रेष्ठ मित्र जगत में नहीं हो सकता। अर्जुन भगवान कृष्ण का सखा और भक्त दोनों था। भगवान ने तत्वज्ञान में बताया कि भक्त से भी सखा श्रेष्ठ होता है। परमात्मा ने अर्जुन को मित्र बनाकर दिव्य ज्ञान प्रदान किया।

आचार्य रामदयालजी महाराज ने कहा कि वे भाग्यशाली होते हैं जिन्हें परमात्मा की मित्रता प्राप्त होती है। हम परमात्मा को मित्र बनाएं, यह ठीक है, लेकिन परमात्मा हमें मित्र स्वीकार करे तो यह भाग्यशाली होने की बात है। गोकुल के ग्वाले इसलिए भाग्यशाली थे कि कृष्ण ने उन्हें अपना मित्र बनाया था। उन्होंने कहा कि बुद्धिमान व्यक्ति वही है जो वेदाभ्यास, शास्त्राभ्यास और स्वाध्याय करता है। वाणीजी का वाणी में स्वाध्याय करेंगे तो उसे आत्मसात कर पाएंगे।

आचार्यश्री ने कहा कि संसार को मित्रता की दृष्टि से देखना चाहिए। नकारात्मक सोचेंगे तो शत्रुता और सकारात्मक सोचेंगे तो मित्रता नजर आएगी। हम परमात्मा में माता-पिता, गुरु और मित्र को देखते हैं तो माता-पिता, गुरु और मित्र में भी परमात्मा को देखें और कभी इनके साथ विश्वासघात न करें।

उन्होंने कहा कि विश्वासघाती जैसे पापी को धरती मां कभी सहन नहीं करती और ऐसा व्यक्ति कभी शांति को प्राप्त नहीं कर सकता। विश्वासघाती को दुनिया में कोई क्षमा नहीं करता। संसार में सबसे भयंकर पाप विश्वासघात होता है। मित्र और परमात्मा के साथ छल-कपट कभी नहीं करना चाहिए। मित्र भक्ति में ज्ञान और ज्ञान में भगवान है। सच्चा मित्र वही है जो अपने साथ को कुमार्ग से सुमार्ग पर ले आए और पतित को पावन बना दे।

आचार्यश्री ने कहा कि धैर्य, धर्म, मित्र और नारी की परीक्षा विपत्तिकाल में ही होती है। संकट में ही पता चलता है कि कौन कितना धैर्यवान और धर्मात्मा है। आचार्यश्री से पूर्व अन्तरराष्ट्रीय रामस्नेही सम्प्रदाय के प्रखर वक्ता संत मनोरथरामजी आलोट ने मानस प्रवचन किया।

प्रवचन के विश्राम पर श्रद्धालुओं द्वारा आचार्यश्री रामदयालजी महाराज की आरती की गई। सत्संग में भीलवाड़ा सहित विभिन्न स्थानों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। चातुर्मास में दैनिक सत्संग का समय सुबह 9 से 10 बजे तक है। रामधुनी के साथ सुबह 8.30 से 9 बजे तक वाणीजी का पाठ हो रहा है। सूर्यास्त के समय संध्या आरती और रामस्नेही सम्प्रदाय के युवा संत रामजस ईडर द्वारा भक्तमाल की कथा में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।

Rajesh Toshniwal, Bhilwara

Rajesh Toshniwal, Bhilwara

नाम: राजेश तोषनीवाल

वर्तमान पद: ब्यूरो चीफ (भीलवाड़ा)

कार्यक्षेत्र: भीलवाड़ा (राजस्थान)

बीट (मुख्य विषय): राजनीति, क्राइम, प्रशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य और बिज़नेस

परिचय 

राजेश तोषनीवाल राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के वरिष्ठ पत्रकार और ब्यूरो चीफ हैं। वह राजनीति, अपराध (क्राइम), स्थानीय प्रशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक गतिविधियों (बिज़नेस) सहित सभी मुख्य विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग करते हैं। मौके पर पहुंचकर सक्रियता से ग्राउंड रिपोर्टिंग करना उनकी मुख्य विशेषता है।

पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)

राजेश तोषनीवाल को पत्रकारिता के क्षेत्र में कुल 44 वर्षों का व्यापक अनुभव है।

  • वह पिछले 35 वर्षों से अधिक समय से 'प्रातःकाल' समाचार पत्र से निरंतर जुड़े हुए हैं।
  • इससे पूर्व उन्होंने 'दैनिक जागरण', 'नवभारत टाइम्स' सहित कई अन्य लोकल एवं राज्यस्तरीय मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं।

शैक्षणिक योग्यता (Education)

  • स्नातक (Graduate)
  • डिप्लोमा इन जर्नलिज्म (Diploma in Journalism)

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