जो व्यवहार खुद को पसंद नहीं, वह दूसरों से न करें: आचार्य रामदयालजी महाराज
आचार्य रामदयालजी महाराज ने सद्व्यवहार, अहिंसा और जीव दया का संदेश दिया। अवतरण दिवस पर 26 सितम्बर से विशेष आयोजन होंगे।

तस्वीर में रामस्नेही संप्रदाय के आचार्य श्रीरामदयालजी महाराज प्रवचन दे रहे हैं।
जो व्यवहार हमें अपने लिए पसंद नहीं, उसे दूसरों के साथ कभी नहीं करें। सम्मान का अमृत अच्छा लगता है तो दूसरों को जहर का प्याला नहीं दें। आंसू नहीं पोंछ सकते तो किसी को रुलाना भी नहीं चाहिए।” अन्तरराष्ट्रीय रामस्नेही सम्प्रदाय शाहपुरा के पीठाघीश्वर जगतगुरू आचार्य स्वामी श्रीरामदयालजी महाराज ने बुधवार को ‘‘विश्व शांति कल्याण’’ चातुर्मास के तहत नियमित चातुर्मासिक प्रवचन में जीवन में सद्व्यवहार और मानवीय संवेदनाओं का संदेश दिया।
आचार्य रामदयालजी महाराज ने कहा कि जीवन में परमात्मा से कुछ भी छुपा नहीं है, इसलिए ऐसा कोई कार्य नहीं करना चाहिए जिसके लिए बाद में पछताना पड़े। उन्होंने कहा कि सत्ता, संपत्ति और शक्ति प्राप्त हो तो कभी उसका दुरुपयोग नहीं करना चाहिए। सत्ता का सदुपयोग करने वाला जन-जन में लोकप्रिय हो जाता है, जबकि उसका दुरुपयोग करने वाला धिक्कारा जाता है।
आचार्य रामदयाल महाराज ने कहा कि महाप्रभु स्वामी रामचरण महाराज ने “अहिंसा परमो धर्म” का संदेश दिया है। हमारी वाणी से भी किसी की हिंसा नहीं होनी चाहिए। ऐसी कोई बात नहीं बोलनी चाहिए जो अनर्थ का कारण बन जाए। उन्होंने कहा कि हमेशा याद रखना चाहिए कि मारने वाले से बचाने वाला बड़ा होता है। बचाने वाला राम होता है। राम गुरु जब तक हमारे हृदय में है, कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता।
उन्होंने कहा कि हमारा आचरण ऐसा होना चाहिए कि हमारे शब्दों और व्यवहार से किसी को आघात नहीं पहुंचे। बचाना और मारना तो परमात्मा के हाथ में है, इसलिए हमेशा उसकी भक्ति में समर्पित रहना चाहिए।
आचार्यश्री ने जीव दया की प्रेरणा देते हुए कहा कि प्रत्येक जीव में परमात्मा का अंश है, इसलिए किसी भी प्राणी को नहीं सताना चाहिए। मानवता के भाव हमेशा हमारे अंदर होने चाहिए।
आचार्यश्री से पूर्व अन्तरराष्ट्रीय रामस्नेही सम्प्रदाय के प्रखर वक्ता संत मनोरथरामजी आलोट ने मानस प्रवचन किया। प्रवचन के विश्राम पर श्रद्धालुओं द्वारा आचार्यश्री रामदयालजी महाराज की आरती की गई।
‘‘विश्व शांति कल्याण’’ चातुर्मास के तहत आचार्य रामदयाल महाराज के अवतरण दिवस के उपलक्ष्य में शुक्रवार से तीन दिवसीय विशेष आयोजन होंगे। पहले दिन शुक्रवार सुबह रामस्नेही चिकित्सालय के भामाशाहों, नेत्रदान करने वालों के परिजनों एवं सेवा कार्यों में सहयोग करने वालों का आचार्यश्री के सानिध्य में सम्मान किया जाएगा।
सायंकालीन आरती के बाद देश के विभिन्न स्थानों से आने वाले भक्तों द्वारा रामद्वारा धाम में भजन संध्या का आयोजन होगा। आचार्य रामदयालजी महाराज का अवतरण दिवस 26 सितम्बर को आनंदोत्सव के रूप में मनाया जाएगा। रामद्वारा धाम में 27 सितम्बर को विराट संत सम्मेलन का आयोजन होगा। इसी दिन दोपहर 2 बजे एक पखवाड़े चलने वाले वाणीजी के सामूहिक पाठ का शुभारंभ होगा। वाणीजी का सामूहिक पाठ 28 सितम्बर से नियमित होगा।
सत्संग में भीलवाड़ा सहित विभिन्न स्थानों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। प्रतिदिन रामधुनी के साथ सुबह 8 से 9 बजे तक वाणीजी का पाठ हो रहा है। सुबह 9 से 10 बजे तक चातुर्मासिक प्रवचन हो रहे हैं। सूर्यास्त के समय संध्या आरती में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।

Anshul Toshniwal, Bhilwara
नाम: अंशुल तोषनीवाल
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